सारस न्यूज, किशनगंज। बचपन को कुपोषण से मुक्त करना स्वस्थ समाज और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। इसी लक्ष्य को केंद्र में रखते हुए किशनगंज जिले में कुपोषण उन्मूलन के प्रयासों को और प्रभावी बनाया गया है। राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के नवीन निर्देशों के आलोक में जिले के पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) की सेवाओं का विस्तार किया गया है, जिससे कुपोषण से ग्रसित बच्चों को समय रहते समुचित उपचार और पोषण सहयोग उपलब्ध कराया जा सकेगा।
अब तक एनआरसी में केवल गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम) से पीड़ित बच्चों को ही भर्ती किया जाता था, लेकिन अब चिकित्सीय जटिलता वाले मध्यम तीव्र कुपोषित (एमएएम) बच्चों को भी उपचार की सुविधा मिलेगी। सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि एनीमिया, रिकेट्स, विटामिन की कमी अथवा अन्य चिकित्सीय समस्याओं से ग्रसित मध्यम कुपोषित बच्चों को अब एनआरसी में भर्ती कर इलाज किया जाएगा। समय पर उपचार नहीं मिलने की स्थिति में ऐसे बच्चों के गंभीर कुपोषण में बदलने की आशंका अधिक रहती है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण–5 (2019–21) के अनुसार बिहार में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में दुर्बलता की दर 22.9 प्रतिशत तथा गंभीर दुर्बलता की दर 8.8 प्रतिशत है। ये आंकड़े समय पर पहचान और हस्तक्षेप की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
नोडल पोषण पुनर्वास केंद्र विश्वजीत कुमार ने बताया कि जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक जिले के पोषण पुनर्वास केंद्रों में कुल 118 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफलतापूर्वक उपचार किया गया। इन बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी के साथ संतुलित पोषण आहार उपलब्ध कराया गया, जिससे उनके वजन, पोषण स्तर और समग्र स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि यह नीतिगत बदलाव जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक वर्ष में 118 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल उपचार इस बात का प्रमाण है कि समय पर हस्तक्षेप से बच्चों की जान बचाई जा सकती है। अब मध्यम कुपोषित बच्चों को भी गंभीर अवस्था में पहुँचने से पहले सुरक्षित किया जा सकेगा।
नोडल पदाधिकारी ने बताया कि नए निर्देशों के तहत एनआरसी की जिम्मेदारी और व्यापक हो गई है। अब भर्ती बच्चों के पोषण स्तर में सुधार, वजन वृद्धि और संक्रमण की दर में कमी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आंगनवाड़ी सेविका, आशा और एएनएम के माध्यम से चिकित्सीय जटिलता वाले एमएएम बच्चों की पहचान कर उन्हें शीघ्र एनआरसी तक पहुँचाया जाएगा।
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने कहा कि कुपोषण केवल स्वास्थ्य विभाग की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि 118 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल उपचार प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। नए निर्णय से अधिक बच्चों को समय पर उपचार मिलेगा और इसकी नियमित समीक्षा कर व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जिले के सभी प्रखंडों में विशेष जागरूकता अभियान चलाकर पोषण पुनर्वास केंद्रों की जानकारी ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों तक पहुँचाई जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों और समुदाय स्तर पर मध्यम कुपोषित बच्चों की स्क्रीनिंग, पहचान और त्वरित रेफरल को प्राथमिकता दी जाएगी। यह पहल सतत विकास लक्ष्य–2 “भूख मिटाओ, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण सुनिश्चित करो” की दिशा में किशनगंज को कुपोषण मुक्त जिला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सारस न्यूज, किशनगंज। बचपन को कुपोषण से मुक्त करना स्वस्थ समाज और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। इसी लक्ष्य को केंद्र में रखते हुए किशनगंज जिले में कुपोषण उन्मूलन के प्रयासों को और प्रभावी बनाया गया है। राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के नवीन निर्देशों के आलोक में जिले के पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) की सेवाओं का विस्तार किया गया है, जिससे कुपोषण से ग्रसित बच्चों को समय रहते समुचित उपचार और पोषण सहयोग उपलब्ध कराया जा सकेगा।
अब तक एनआरसी में केवल गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम) से पीड़ित बच्चों को ही भर्ती किया जाता था, लेकिन अब चिकित्सीय जटिलता वाले मध्यम तीव्र कुपोषित (एमएएम) बच्चों को भी उपचार की सुविधा मिलेगी। सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि एनीमिया, रिकेट्स, विटामिन की कमी अथवा अन्य चिकित्सीय समस्याओं से ग्रसित मध्यम कुपोषित बच्चों को अब एनआरसी में भर्ती कर इलाज किया जाएगा। समय पर उपचार नहीं मिलने की स्थिति में ऐसे बच्चों के गंभीर कुपोषण में बदलने की आशंका अधिक रहती है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण–5 (2019–21) के अनुसार बिहार में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में दुर्बलता की दर 22.9 प्रतिशत तथा गंभीर दुर्बलता की दर 8.8 प्रतिशत है। ये आंकड़े समय पर पहचान और हस्तक्षेप की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
नोडल पोषण पुनर्वास केंद्र विश्वजीत कुमार ने बताया कि जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक जिले के पोषण पुनर्वास केंद्रों में कुल 118 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफलतापूर्वक उपचार किया गया। इन बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी के साथ संतुलित पोषण आहार उपलब्ध कराया गया, जिससे उनके वजन, पोषण स्तर और समग्र स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि यह नीतिगत बदलाव जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एक वर्ष में 118 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल उपचार इस बात का प्रमाण है कि समय पर हस्तक्षेप से बच्चों की जान बचाई जा सकती है। अब मध्यम कुपोषित बच्चों को भी गंभीर अवस्था में पहुँचने से पहले सुरक्षित किया जा सकेगा।
नोडल पदाधिकारी ने बताया कि नए निर्देशों के तहत एनआरसी की जिम्मेदारी और व्यापक हो गई है। अब भर्ती बच्चों के पोषण स्तर में सुधार, वजन वृद्धि और संक्रमण की दर में कमी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। आंगनवाड़ी सेविका, आशा और एएनएम के माध्यम से चिकित्सीय जटिलता वाले एमएएम बच्चों की पहचान कर उन्हें शीघ्र एनआरसी तक पहुँचाया जाएगा।
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने कहा कि कुपोषण केवल स्वास्थ्य विभाग की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि 118 गंभीर कुपोषित बच्चों का सफल उपचार प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। नए निर्णय से अधिक बच्चों को समय पर उपचार मिलेगा और इसकी नियमित समीक्षा कर व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जिले के सभी प्रखंडों में विशेष जागरूकता अभियान चलाकर पोषण पुनर्वास केंद्रों की जानकारी ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों तक पहुँचाई जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों और समुदाय स्तर पर मध्यम कुपोषित बच्चों की स्क्रीनिंग, पहचान और त्वरित रेफरल को प्राथमिकता दी जाएगी। यह पहल सतत विकास लक्ष्य–2 “भूख मिटाओ, खाद्य सुरक्षा और बेहतर पोषण सुनिश्चित करो” की दिशा में किशनगंज को कुपोषण मुक्त जिला बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।