सारस न्यूज, किशनगंज। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक समय पर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना किसी भी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी पहचान होती है। इसी दिशा में किशनगंज जिले ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिले के बैसा गोपालगंज एवं डेरामारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत सफलतापूर्वक प्रमाणित किया गया है।
इस राष्ट्रीय प्रमाणीकरण से यह सुनिश्चित होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य केंद्र भी इलाज, जांच, दवाओं की उपलब्धता, स्वच्छता और मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार जैसे मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं।
गुणवत्ता अंकों के साथ मिली राष्ट्रीय पहचान
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय एसेसरों द्वारा किए गए गहन मूल्यांकन में बैसा गोपालगंज हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को 82.86 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए, जिसके आधार पर उसे “क्वालिटी सर्टिफाइड” घोषित किया गया है। वहीं डेरामारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को 78.19 प्रतिशत अंक के साथ “क्वालिटी सर्टिफाइड (कंडीशनली)” का दर्जा मिला है। इस उपलब्धि के बाद जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मियों और आम जनता में हर्ष का माहौल है।
अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा सरकार की प्राथमिकता
जिलाधिकारी विशाल राज ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का राष्ट्रीय प्रमाणीकरण यह दर्शाता है कि जिला प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सफलता अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को भी गुणवत्ता सुधार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
जनता का भरोसा हो रहा और मजबूत
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणीकरण किसी एक दिन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि निरंतर निगरानी, मूल्यांकन और सुधार का परिणाम है। बैसा गोपालगंज और डेरामारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की टीमों ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में भी उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं संभव हैं। इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों का भरोसा और मजबूत होता है।
हर सेवा की हुई बारीकी से जांच
डीक्यूएसी सुमन सिन्हा ने बताया कि राष्ट्रीय एसेसरों द्वारा दोनों केंद्रों पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, गैर-संचारी रोगों की जांच, ओपीडी सेवाएं, दवा भंडारण, प्रयोगशाला सेवाएं, संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, अभिलेख संधारण और रोगी संतुष्टि जैसे सभी बिंदुओं की गहन समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि डेरामारी केंद्र में सुझाए गए सुधार बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
रोकथाम और समय पर जांच से सशक्त हो रही ग्रामीण व्यवस्था
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनजिम ने कहा कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि बीमारियों की समय रहते पहचान और रोकथाम है। यहां उच्च रक्तचाप, मधुमेह, एनीमिया की नियमित जांच, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का टीकाकरण और बुजुर्गों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग से ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है।
गुणवत्ता और भरोसे की दिशा में मजबूत कदम
बैसा गोपालगंज और डेरामारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणीकरण यह दर्शाता है कि किशनगंज जिला अब इलाज-केंद्रित सोच से आगे बढ़कर गुणवत्ता, जागरूकता और अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह पहल भविष्य में एक सशक्त, सुरक्षित और स्वस्थ ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत नींव साबित होगी।
सारस न्यूज, किशनगंज। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक समय पर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना किसी भी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे बड़ी पहचान होती है। इसी दिशा में किशनगंज जिले ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिले के बैसा गोपालगंज एवं डेरामारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत सफलतापूर्वक प्रमाणित किया गया है।
इस राष्ट्रीय प्रमाणीकरण से यह सुनिश्चित होता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य केंद्र भी इलाज, जांच, दवाओं की उपलब्धता, स्वच्छता और मरीजों के साथ सम्मानजनक व्यवहार जैसे मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं।
गुणवत्ता अंकों के साथ मिली राष्ट्रीय पहचान
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय एसेसरों द्वारा किए गए गहन मूल्यांकन में बैसा गोपालगंज हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को 82.86 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए, जिसके आधार पर उसे “क्वालिटी सर्टिफाइड” घोषित किया गया है। वहीं डेरामारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को 78.19 प्रतिशत अंक के साथ “क्वालिटी सर्टिफाइड (कंडीशनली)” का दर्जा मिला है। इस उपलब्धि के बाद जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, कर्मियों और आम जनता में हर्ष का माहौल है।
अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा सरकार की प्राथमिकता
जिलाधिकारी विशाल राज ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का राष्ट्रीय प्रमाणीकरण यह दर्शाता है कि जिला प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह सफलता अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को भी गुणवत्ता सुधार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
जनता का भरोसा हो रहा और मजबूत
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणीकरण किसी एक दिन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि निरंतर निगरानी, मूल्यांकन और सुधार का परिणाम है। बैसा गोपालगंज और डेरामारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की टीमों ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में भी उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं संभव हैं। इससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों का भरोसा और मजबूत होता है।
हर सेवा की हुई बारीकी से जांच
डीक्यूएसी सुमन सिन्हा ने बताया कि राष्ट्रीय एसेसरों द्वारा दोनों केंद्रों पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, गैर-संचारी रोगों की जांच, ओपीडी सेवाएं, दवा भंडारण, प्रयोगशाला सेवाएं, संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, अभिलेख संधारण और रोगी संतुष्टि जैसे सभी बिंदुओं की गहन समीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि डेरामारी केंद्र में सुझाए गए सुधार बिंदुओं पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।
रोकथाम और समय पर जांच से सशक्त हो रही ग्रामीण व्यवस्था
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनजिम ने कहा कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि बीमारियों की समय रहते पहचान और रोकथाम है। यहां उच्च रक्तचाप, मधुमेह, एनीमिया की नियमित जांच, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का टीकाकरण और बुजुर्गों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग से ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिल रही है।
गुणवत्ता और भरोसे की दिशा में मजबूत कदम
बैसा गोपालगंज और डेरामारी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणीकरण यह दर्शाता है कि किशनगंज जिला अब इलाज-केंद्रित सोच से आगे बढ़कर गुणवत्ता, जागरूकता और अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह पहल भविष्य में एक सशक्त, सुरक्षित और स्वस्थ ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूत नींव साबित होगी।