भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही वार्ताओं के बाद आखिरकार एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दे दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी में इस समझौते को भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक उपलब्धि बताया।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब गणतंत्र दिवस समारोह में 27 यूरोपीय देशों के नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे, जो भारत-EU संबंधों की गहराई को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह केवल एक व्यापारिक करार नहीं, बल्कि भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय है।
भारतीय निर्यात को बड़ा फायदा, 99 प्रतिशत उत्पादों पर टैक्स खत्म
इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ अगले सात वर्षों में भारत से होने वाले 99 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क समाप्त करेगा। इससे वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, रत्न-आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। अकेले इन क्षेत्रों में करीब 33 अरब डॉलर के निर्यात को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
वहीं भारत भी यूरोपीय संघ से आने वाले लगभग 96.6 प्रतिशत उत्पादों पर चरणबद्ध तरीके से आयात शुल्क घटाएगा। इनमें से कई उत्पादों पर शुल्क कटौती समझौते के लागू होते ही शुरू हो जाएगी, जबकि बाकी पर अगले पांच से दस वर्षों में राहत दी जाएगी।
सेवाओं, निवेश और रोजगार के नए अवसर
सरकार के मुताबिक इस एफटीए से भारतीय आईटी, प्रोफेशनल सर्विसेज, शिक्षा और कंसल्टिंग कंपनियों को यूरोपीय बाजार में व्यापक पहुंच मिलेगी। भारतीय सेवा कंपनियों को EU के 144 सेक्टरों में प्रवेश मिलेगा, जबकि यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में 102 सेक्टर खोले जाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता किसानों, छोटे उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा करेगा, साथ ही भारत-EU के बीच निवेश और रोजगार को भी बढ़ावा देगा।
महंगी कारें, वाइन और चॉकलेट होंगी सस्ती
इस समझौते का असर आम उपभोक्ताओं पर भी दिखेगा। यूरोपीय कारों पर लगने वाला आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत तक आ जाएगा। इसी तरह वाइन और स्पिरिट्स पर भी भारी टैक्स कटौती की जाएगी। इसके अलावा मशीनरी, दवाइयों और मेडिकल उपकरणों पर भी शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच मजबूत साझेदारी
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस करार को “मदर ऑफ ऑल डील्स” बताते हुए कहा कि यह समझौता दो अरब लोगों का साझा बाजार तैयार करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत और यूरोप का साथ आना एक मजबूत संदेश है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदी में कहा कि वैश्विक व्यवस्था में उथल-पुथल के दौर में भारत-EU साझेदारी अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को मजबूती देगी।
सुरक्षा, रक्षा और मोबिलिटी पर भी सहमति
व्यापार समझौते के साथ-साथ दोनों पक्षों ने सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी हस्ताक्षर किए। इसमें आतंकवाद विरोध, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और रक्षा उपकरणों के संयुक्त निर्माण पर सहयोग शामिल है। इसके अलावा भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल पेशेवरों की यूरोप में आवाजाही को आसान बनाने के लिए एक नया मोबिलिटी फ्रेमवर्क भी तय किया गया है।
2027 से लागू होगा समझौता
इस समझौते का औपचारिक हस्ताक्षर अगस्त 2026 में होने की संभावना है, जबकि इसे 2027 की शुरुआत से लागू किया जाएगा। करीब दो दशक पहले शुरू हुई बातचीत के बाद यह समझौता भारत-EU रिश्तों में मील का पत्थर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एफटीए न सिर्फ भारत के निर्यात को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका को भी और मजबूत करेगा।
सारस न्यूज़, वेब डेस्क।
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही वार्ताओं के बाद आखिरकार एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप दे दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी में इस समझौते को भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक उपलब्धि बताया।
यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब गणतंत्र दिवस समारोह में 27 यूरोपीय देशों के नेता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे, जो भारत-EU संबंधों की गहराई को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह केवल एक व्यापारिक करार नहीं, बल्कि भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय है।
भारतीय निर्यात को बड़ा फायदा, 99 प्रतिशत उत्पादों पर टैक्स खत्म
इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ अगले सात वर्षों में भारत से होने वाले 99 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क समाप्त करेगा। इससे वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, रत्न-आभूषण जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। अकेले इन क्षेत्रों में करीब 33 अरब डॉलर के निर्यात को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
वहीं भारत भी यूरोपीय संघ से आने वाले लगभग 96.6 प्रतिशत उत्पादों पर चरणबद्ध तरीके से आयात शुल्क घटाएगा। इनमें से कई उत्पादों पर शुल्क कटौती समझौते के लागू होते ही शुरू हो जाएगी, जबकि बाकी पर अगले पांच से दस वर्षों में राहत दी जाएगी।
सेवाओं, निवेश और रोजगार के नए अवसर
सरकार के मुताबिक इस एफटीए से भारतीय आईटी, प्रोफेशनल सर्विसेज, शिक्षा और कंसल्टिंग कंपनियों को यूरोपीय बाजार में व्यापक पहुंच मिलेगी। भारतीय सेवा कंपनियों को EU के 144 सेक्टरों में प्रवेश मिलेगा, जबकि यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में 102 सेक्टर खोले जाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता किसानों, छोटे उद्योगों और विनिर्माण क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा करेगा, साथ ही भारत-EU के बीच निवेश और रोजगार को भी बढ़ावा देगा।
महंगी कारें, वाइन और चॉकलेट होंगी सस्ती
इस समझौते का असर आम उपभोक्ताओं पर भी दिखेगा। यूरोपीय कारों पर लगने वाला आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत तक आ जाएगा। इसी तरह वाइन और स्पिरिट्स पर भी भारी टैक्स कटौती की जाएगी। इसके अलावा मशीनरी, दवाइयों और मेडिकल उपकरणों पर भी शुल्क में बड़ी राहत मिलेगी।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच मजबूत साझेदारी
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस करार को “मदर ऑफ ऑल डील्स” बताते हुए कहा कि यह समझौता दो अरब लोगों का साझा बाजार तैयार करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच भारत और यूरोप का साथ आना एक मजबूत संदेश है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हिंदी में कहा कि वैश्विक व्यवस्था में उथल-पुथल के दौर में भारत-EU साझेदारी अंतरराष्ट्रीय स्थिरता को मजबूती देगी।
सुरक्षा, रक्षा और मोबिलिटी पर भी सहमति
व्यापार समझौते के साथ-साथ दोनों पक्षों ने सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी हस्ताक्षर किए। इसमें आतंकवाद विरोध, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और रक्षा उपकरणों के संयुक्त निर्माण पर सहयोग शामिल है। इसके अलावा भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल पेशेवरों की यूरोप में आवाजाही को आसान बनाने के लिए एक नया मोबिलिटी फ्रेमवर्क भी तय किया गया है।
2027 से लागू होगा समझौता
इस समझौते का औपचारिक हस्ताक्षर अगस्त 2026 में होने की संभावना है, जबकि इसे 2027 की शुरुआत से लागू किया जाएगा। करीब दो दशक पहले शुरू हुई बातचीत के बाद यह समझौता भारत-EU रिश्तों में मील का पत्थर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एफटीए न सिर्फ भारत के निर्यात को नई ऊंचाई देगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका को भी और मजबूत करेगा।