सारस न्यूज़, वेब डेस्क।
बिहार के लिए यह सप्ताह ऐतिहासिक रहा। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि बिहार को अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिलने जा रही है। नई दिल्ली में 2 फरवरी को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि यह ट्रेन वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक का सफर तय करेगी।
बिहार के लिए ‘गेम-चेंजर’ साबित होगी हाई-स्पीड रेल
रेल मंत्री ने इस परियोजना को बिहार के विकास के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ बताया। यह हाई-स्पीड कॉरिडोर न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच व्यापार और पर्यटन को भी नई गति देगा।
प्रमुख विशेषताएं:
- रफ्तार: इस ट्रेन को 350 किमी/घंटा की अधिकतम गति के लिए डिजाइन किया गया है।
- ट्रैक: बिहार के भीतर लगभग 260 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड (ऊपर उठा हुआ) ट्रैक बनाया जाएगा।
- स्टॉपेज: पटना के अलावा, यह कॉरिडोर बिहार के कटिहार और बक्सर जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों को भी जोड़ सकता है।
- समय की बचत: वर्तमान में वाराणसी से सिलीगुड़ी तक की यात्रा में 12-14 घंटे लगते हैं, जो इस ट्रेन के आने के बाद घटकर मात्र 2 घंटे 55 मिनट रह जाएगी।
रेलवे बजट 2026: बिहार पर मेहरबान हुई सरकार
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट में बिहार के रेलवे नेटवर्क के आधुनिकिकरण पर विशेष जोर दिया गया है।
- रिकॉर्ड आवंटन: रेल मंत्रालय को ₹2,77,830 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर आवंटित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.25% अधिक है।
- बिहार की स्थिति: वर्तमान में बिहार में 14 वंदे भारत एक्सप्रेस और 21 अमृत भारत ट्रेनें चल रही हैं। इसके अलावा, राज्य के 98 स्टेशनों को ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है।
- अन्य कॉरिडोर: बजट में वाराणसी-सिलीगुड़ी के साथ-साथ दिल्ली-वाराणसी, मुंबई-पुणे और हैदराबाद-बेंगलुरु जैसे कुल 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर का प्रस्ताव दिया गया है।
“अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन के काम की गुणवत्ता पूरी दुनिया देख रही है। अब बिहार सहित देश के अन्य हिस्सों में भी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का विस्तार ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।” — अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री
वर्तमान स्थिति
यह प्रोजेक्ट फिलहाल डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के स्तर पर है। जमीन अधिग्रहण की जरूरतों और सटीक रूट के लिए सर्वे का काम तेजी से चल रहा है। रेल अधिकारियों का मानना है कि इस कॉरिडोर के बनने से बिहार न केवल उत्तर भारत बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों (गुवाहाटी) से भी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के जरिए जुड़ जाएगा।
