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पशुचिकित्सा महाविद्यालय, किशनगंज में राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ।

सारस न्यूज़, किशनगंज।

अर्राबाड़ी स्थित पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय में सोमवार को “स्वास्थ्य एवं सतत भविष्य के लिए पशु चिकित्सा, मत्स्य पालन, कृषि और डेयरी में समन्वय” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन समारोह में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

सम्मेलन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, छात्रों एवं किसानों की भागीदारी रही। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में आईसीई-एसएसआई, थाईलैंड के निदेशक एवं प्रोफेसर डॉ. एस. बेंजाकुल, बीजे मेडिकल कॉलेज एवं सिविल हॉस्पिटल, अहमदाबाद के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. कमलेश उपाध्याय सहित कई प्रतिष्ठित विद्वान मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सम्मेलन अध्यक्ष एवं महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. चंद्रहास ने की।

मुख्य अतिथि डॉ. इंद्रजीत सिंह ने अपने संबोधन में “वन हेल्थ” अवधारणा को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि मानव, पशु और पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने पशु रोग नियंत्रण, जैव सुरक्षा उपायों और वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों को अपनाकर सतत विकास एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर जोर दिया।

विशिष्ट अतिथि डॉ. एस. बेंजाकुल ने बहु-क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता रेखांकित करते हुए कहा कि पशु चिकित्सा, मत्स्य, डेयरी और कृषि के बीच बेहतर समन्वय से जलवायु परिवर्तन और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है। वहीं डॉ. कमलेश उपाध्याय ने सतत उत्पादन प्रणाली के लिए सहयोगात्मक मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. चंद्रहास ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि सम्मेलन में वन हेल्थ के माध्यम से सामाजिक विकास, उन्नत पशु चिकित्सा पद्धतियां, सतत मत्स्य एवं डेयरी प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा तथा जलवायु-अनुकूल कृषि जैसे छह प्रमुख विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। एसपीएफसीए के अध्यक्ष डॉ. जे.के. प्रसाद ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे नवाचार और तकनीकी विकास के लिए उपयोगी बताया।

आयोजन सचिव डॉ. विनोद कुमार ने जानकारी दी कि सम्मेलन के दौरान स्टॉल एवं प्रदर्शनी के माध्यम से संस्थाएं और कंपनियां अपने नवीन उत्पादों व सेवाओं का प्रदर्शन करेंगी। साथ ही अकादमिक–किसान–उद्योग संवाद सत्र का भी आयोजन किया जाएगा। उन्होंने देशभर से आए प्रतिभागियों, वैज्ञानिकों, छात्रों एवं किसानों का आभार व्यक्त किया।

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