सारस न्यूज़, वेब डेस्क।
पटना: बिहार अब आधिकारिक रूप से नक्सल-मुक्त राज्य घोषित कर दिया गया है। पिछले कई वर्षों से राज्य के विभिन्न जिलों में सक्रिय रहे नक्सलवादी तत्वों का खात्मा करने में राज्य सरकार, सुरक्षा बलों और स्थानीय जनता की संयुक्त पहलों को सफलता मिली है।गौरतलब है कि इससे पहले बिहार के कई हिस्सों — जैसे भोजपुर, गया, जहानाबाद, जमुई और रोहतास — नक्सलवादी गतिविधियों के कारण प्रभावित रहे हैं। लेकिन लगातार रणनीतिक अभियान, सुरक्षा उपायों और सामाजिक विकास कार्यक्रमों के कारण नक्सल प्रभाव को धीरे-धीरे खत्म किया गया।पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद विरोधी अभियानों को तीव्रता से आगे बढ़ाया। इन अभियानों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी बढ़ी, जिसके कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस, अर्धसैनिक बल और प्रशासन की पकड़ मजबूत हुई। साथ ही, राज्य सरकार ने विकास कार्यों, रोजगार योजनाओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के माध्यम से नक्सल प्रभावित जिलों में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर किया, जिससे जनता नक्सलवादी विचारधारा से दूर रही।राज्य के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नक्सलवाद के खिलाफ यह जीत न केवल सुरक्षा बलों की रणनीति का परिणाम है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुधारों का भी अहम योगदान है। विकास कार्यों के साथ ही पंचायत स्तर पर सुरक्षा और शिक्षा कार्यक्रम चलाए गए, जिससे स्थानीय युवाओं को सकारात्मक दिशा में प्रेरित किया गया।राज्य सरकार ने बताया कि अब शेष बची चुनौतियों का सामना भी इसी सामूहिक प्रयास और सतर्कता के साथ किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि नक्सल-मुक्त घोषित होने का मतलब यह नहीं है कि खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है, बल्कि अब भविष्य में किसी भी अप्रिय गतिविधि को रोकने के लिए निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी जाएगी।विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलवाद की समाप्ति के साथ राज्य में निवेश, पर्यटन और उद्योग के विकास को भी मजबूती मिलेगी। यह उपलब्धि बिहार के समग्र विकास और सामाजिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।अब जहां एक ओर नक्सलवादी खतरा कम हुआ है, वहीँ दूसरी ओर राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त कोशिशों से बिहार की तस्वीर एक सुरक्षित, विकसित और शांतिपूर्ण प्रदेश के रूप में उभर रही है।
