जन्म के साथ पाई जाने वाली गंभीर बीमारियाँ न केवल परिवार के लिए चिंता का विषय होती हैं, बल्कि समय पर इलाज नहीं मिलने पर बच्चों के जीवन के लिए भी खतरा बन सकती हैं। बाल हृदय रोग (जन्मजात हृदय रोग) ऐसी ही एक गंभीर समस्या है, जिसमें बच्चे के हृदय की संरचना जन्म से ही सामान्य नहीं होती। लेकिन समय पर पहचान, सही रेफरल और विशेषज्ञ उपचार से ऐसे बच्चों को नया जीवन दिया जा सकता है।
इसी उद्देश्य के साथ किशनगंज जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इसी क्रम में आज राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के तहत दो मरीजों—अल्फाज हुसैन (जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित) और अनीशा कुमारी (कटे होंठ एवं तालु की समस्या)—को सदर अस्पताल, किशनगंज से उन्नत उपचार के लिए इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना रवाना किया गया।
बाल हृदय रोग पर विशेष फोकस, 34 बच्चों को मिला नया जीवन
जिले में बाल हृदय रोग को लेकर स्वास्थ्य विभाग विशेष रणनीति के तहत कार्य कर रहा है। आरबीएसके टीमों द्वारा स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्तर पर नियमित स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि बीमारी की पहचान प्रारंभिक अवस्था में हो सके। इसका सकारात्मक परिणाम यह है कि अब तक जिले के 34 बच्चों का सफल हृदय ऑपरेशन कराया जा चुका है।
यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा व्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के लिए आशा की किरण भी है।
कटे होंठ और तालु के बच्चों के लिए भी निरंतर पहल
कटे होंठ और तालु जैसी जन्मजात समस्याएँ बच्चे के खान-पान, बोलने और सामाजिक विकास में बाधा उत्पन्न करती हैं। आरबीएसके के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ संस्थानों में निःशुल्क सर्जरी और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि जन्मजात हृदय रोग और अन्य विकृतियों में समय पर जांच और इलाज अत्यंत आवश्यक है। अभिभावक बच्चों में दिखने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें। आरबीएसके के तहत जांच, रेफरल और इलाज पूरी तरह निःशुल्क है। हमारा प्रयास है कि जिले का कोई भी बच्चा इलाज से वंचित न रहे।
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य जिले की प्राथमिकता है। सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उठाएँ और नियमित स्वास्थ्य जांच को गंभीरता से लें। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर जरूरतमंद बच्चे को समय पर बेहतर इलाज मिल सके।
अल्फाज हुसैन और अनीशा कुमारी को पटना रेफर किया जाना इस बात का प्रमाण है कि जिला प्रशासन बाल स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आरबीएसके के माध्यम से यह प्रयास निरंतर जारी है—ताकि हर बच्चे को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य मिल सके।
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
जन्म के साथ पाई जाने वाली गंभीर बीमारियाँ न केवल परिवार के लिए चिंता का विषय होती हैं, बल्कि समय पर इलाज नहीं मिलने पर बच्चों के जीवन के लिए भी खतरा बन सकती हैं। बाल हृदय रोग (जन्मजात हृदय रोग) ऐसी ही एक गंभीर समस्या है, जिसमें बच्चे के हृदय की संरचना जन्म से ही सामान्य नहीं होती। लेकिन समय पर पहचान, सही रेफरल और विशेषज्ञ उपचार से ऐसे बच्चों को नया जीवन दिया जा सकता है।
इसी उद्देश्य के साथ किशनगंज जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इसी क्रम में आज राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के तहत दो मरीजों—अल्फाज हुसैन (जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित) और अनीशा कुमारी (कटे होंठ एवं तालु की समस्या)—को सदर अस्पताल, किशनगंज से उन्नत उपचार के लिए इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना रवाना किया गया।
बाल हृदय रोग पर विशेष फोकस, 34 बच्चों को मिला नया जीवन
जिले में बाल हृदय रोग को लेकर स्वास्थ्य विभाग विशेष रणनीति के तहत कार्य कर रहा है। आरबीएसके टीमों द्वारा स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक स्तर पर नियमित स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि बीमारी की पहचान प्रारंभिक अवस्था में हो सके। इसका सकारात्मक परिणाम यह है कि अब तक जिले के 34 बच्चों का सफल हृदय ऑपरेशन कराया जा चुका है।
यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा व्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के लिए आशा की किरण भी है।
कटे होंठ और तालु के बच्चों के लिए भी निरंतर पहल
कटे होंठ और तालु जैसी जन्मजात समस्याएँ बच्चे के खान-पान, बोलने और सामाजिक विकास में बाधा उत्पन्न करती हैं। आरबीएसके के माध्यम से ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें विशेषज्ञ संस्थानों में निःशुल्क सर्जरी और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि जन्मजात हृदय रोग और अन्य विकृतियों में समय पर जांच और इलाज अत्यंत आवश्यक है। अभिभावक बच्चों में दिखने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को नज़रअंदाज़ न करें। आरबीएसके के तहत जांच, रेफरल और इलाज पूरी तरह निःशुल्क है। हमारा प्रयास है कि जिले का कोई भी बच्चा इलाज से वंचित न रहे।
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य जिले की प्राथमिकता है। सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उठाएँ और नियमित स्वास्थ्य जांच को गंभीरता से लें। जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि हर जरूरतमंद बच्चे को समय पर बेहतर इलाज मिल सके।
अल्फाज हुसैन और अनीशा कुमारी को पटना रेफर किया जाना इस बात का प्रमाण है कि जिला प्रशासन बाल स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आरबीएसके के माध्यम से यह प्रयास निरंतर जारी है—ताकि हर बच्चे को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य मिल सके।