विवेक चौधरी, सारस न्यूज़, गलगलिया।
भारत-नेपाल सीमा सड़क परियोजना की धीमी प्रगति को लेकर एक बार फिर सीमावर्ती इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। वर्ष 2013 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ आज तक स्थानीय लोगों को पूरी तरह नहीं मिल पाया है। किसानों का आरोप है कि भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी हुए वर्षों बीत जाने के बावजूद उन्हें जमीन का मुआवजा नहीं मिला, जिसके कारण उन्होंने निर्माण कार्य का विरोध किया।
भातगांव पंचायत के वार्ड संख्या 4 अंतर्गत भक्सर भिट्ठा, निमुगुड़ी, नेंगराडूबा, खटखटी और कुर्लीकोट गांवों में सड़क निर्माण के दौरान ग्रामीणों ने काम रुकवा दिया। स्थिति को देखते हुए गुरुवार को प्रशासन ने दंडाधिकारी और पुलिस बल की मौजूदगी में निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया। विरोध के दौरान कुछ देर तक माहौल तनावपूर्ण रहा, लेकिन राजस्व अधिकारी राहुल कुमार और गलगलिया थाना पुलिस की समझाइश के बाद काम आगे बढ़ सका।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर सड़क बनाई जा रही है, वह उनकी निजी संपत्ति है और उन्हें अब तक क्षतिपूर्ति की राशि प्राप्त नहीं हुई है। जब तक भुगतान नहीं होगा, वे निर्माण कार्य की अनुमति नहीं देंगे।
मौके पर मौजूद दंडाधिकारी राहुल कुमार ने बताया कि संबंधित किसानों को अपने जमीन से जुड़े कागजात अंचल कार्यालय में जमा करने को कहा गया है। दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र लाभुकों के खाते में मुआवजे की राशि भेजी जाएगी।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में इस सीमा सड़क परियोजना का ठेका जेकेएम इंफ्रा को दिया गया था। शुरुआती दौर में कार्य शुरू हुआ, लेकिन कई स्थानों पर मुआवजा विवाद के कारण निर्माण में लगातार रुकावट आती रही, जिससे परियोजना लंबित हो गई। फिलहाल एजेंसी को 31 मार्च तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है और काम तेज गति से चल रहा था।

नेमुगुरी और नेंगराडूबा गांव में उत्पन्न बाधा के बाद अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर राजस्व अधिकारी को दंडाधिकारी नियुक्त किया गया। साथ ही पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर थाना स्तर से पुरुष और महिला बल की तैनाती कर निर्माण कार्य शांतिपूर्ण तरीके से प्रारंभ कराया गया।
कार्यपालक अभियंता शैलेश कुमार ने बताया कि भू-अर्जन से जुड़ी समस्याओं की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। उम्मीद है कि मुआवजे का मुद्दा जल्द सुलझेगा और निर्धारित समयसीमा के भीतर सड़क निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
