हृदय रोग और कटे होंठ-तालु से पीड़ित बच्चों को निःशुल्क इलाज के लिए पटना भेजा गया
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
गरीब परिवारों के लिए जब कोई बच्चा जन्मजात गंभीर बीमारी के साथ पैदा होता है, तो यह केवल स्वास्थ्य की चिंता नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए एक गहरे आर्थिक और मानसिक संकट की स्थिति बन जाती है। ऐसे में उपचार का खर्च अक्सर उनकी सामर्थ्य से बाहर हो जाता है और कई बार इलाज अधूरा ही रह जाता है। इसी कठिन परिस्थिति में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक सच्ची जीवनदायिनी योजना बनकर सामने आई है। यह योजना बच्चों को समय पर पहचान, निःशुल्क जांच, बेहतर संस्थानों में रेफरल और पूर्ण इलाज की सुविधा प्रदान कर उन्हें नया जीवन देने का कार्य कर रही है। वहीं, सदर अस्पताल किशनगंज से जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित दो बच्चों—राजेंद्र कुमार और रागिनी कुमारी—तथा कटे होंठ और तालु से पीड़ित एक बच्ची अनीशा कुमारी को बेहतर इलाज के लिए IGIMS पटना रवाना किया गया।
गरीब परिवारों के लिए संबल बनी योजना
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि जन्मजात हृदय रोग और कटे होंठ-तालु जैसी बीमारियों का इलाज अत्यंत महंगा और जटिल होता है, जिसे सामान्य परिवार वहन नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से अब जिले के बच्चों को निःशुल्क जांच, रेफरल और उच्च स्तरीय अस्पतालों में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यह योजना गरीब परिवारों के लिए किसी संबल से कम नहीं है।
कई बच्चों को मिल चुका है नया जीवन
सिविल सर्जन ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि जिले में अब तक कई बच्चों को इस योजना के माध्यम से लाभान्वित किया जा चुका है। समय पर पहचान और सही उपचार के कारण अनेक बच्चे गंभीर बीमारियों से मुक्त होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव जाकर बच्चों की पहचान कर रही है, ताकि कोई भी जरूरतमंद बच्चा इस सुविधा से वंचित न रह जाए।
परिवारों में जगी उम्मीद और विश्वास
आज पटना के लिए रवाना किए गए बच्चों के परिजन भावुक नजर आए। उनका कहना था कि यदि यह योजना नहीं होती, तो वे अपने बच्चों का इलाज कराने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। अब उनके मन में यह विश्वास जागा है कि उनके बच्चे भी स्वस्थ होकर एक सामान्य और खुशहाल जीवन जी सकेंगे।
समय पर पहचान से संभव है पूर्ण इलाज
एसडीपीएम डॉ. मुनाजिम ने बताया कि जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान और उचित इलाज से उन्हें पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से लगातार स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
इस प्रकार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम किशनगंज में न केवल बच्चों को नया जीवन दे रहा है, बल्कि गरीब परिवारों के लिए आशा, विश्वास और सहारे का मजबूत आधार भी बन रहा है।
हृदय रोग और कटे होंठ-तालु से पीड़ित बच्चों को निःशुल्क इलाज के लिए पटना भेजा गया
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
गरीब परिवारों के लिए जब कोई बच्चा जन्मजात गंभीर बीमारी के साथ पैदा होता है, तो यह केवल स्वास्थ्य की चिंता नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए एक गहरे आर्थिक और मानसिक संकट की स्थिति बन जाती है। ऐसे में उपचार का खर्च अक्सर उनकी सामर्थ्य से बाहर हो जाता है और कई बार इलाज अधूरा ही रह जाता है। इसी कठिन परिस्थिति में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक सच्ची जीवनदायिनी योजना बनकर सामने आई है। यह योजना बच्चों को समय पर पहचान, निःशुल्क जांच, बेहतर संस्थानों में रेफरल और पूर्ण इलाज की सुविधा प्रदान कर उन्हें नया जीवन देने का कार्य कर रही है। वहीं, सदर अस्पताल किशनगंज से जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित दो बच्चों—राजेंद्र कुमार और रागिनी कुमारी—तथा कटे होंठ और तालु से पीड़ित एक बच्ची अनीशा कुमारी को बेहतर इलाज के लिए IGIMS पटना रवाना किया गया।
गरीब परिवारों के लिए संबल बनी योजना
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि जन्मजात हृदय रोग और कटे होंठ-तालु जैसी बीमारियों का इलाज अत्यंत महंगा और जटिल होता है, जिसे सामान्य परिवार वहन नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से अब जिले के बच्चों को निःशुल्क जांच, रेफरल और उच्च स्तरीय अस्पतालों में इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यह योजना गरीब परिवारों के लिए किसी संबल से कम नहीं है।
कई बच्चों को मिल चुका है नया जीवन
सिविल सर्जन ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि जिले में अब तक कई बच्चों को इस योजना के माध्यम से लाभान्वित किया जा चुका है। समय पर पहचान और सही उपचार के कारण अनेक बच्चे गंभीर बीमारियों से मुक्त होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-गांव जाकर बच्चों की पहचान कर रही है, ताकि कोई भी जरूरतमंद बच्चा इस सुविधा से वंचित न रह जाए।
परिवारों में जगी उम्मीद और विश्वास
आज पटना के लिए रवाना किए गए बच्चों के परिजन भावुक नजर आए। उनका कहना था कि यदि यह योजना नहीं होती, तो वे अपने बच्चों का इलाज कराने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे। अब उनके मन में यह विश्वास जागा है कि उनके बच्चे भी स्वस्थ होकर एक सामान्य और खुशहाल जीवन जी सकेंगे।
समय पर पहचान से संभव है पूर्ण इलाज
एसडीपीएम डॉ. मुनाजिम ने बताया कि जन्मजात बीमारियों की समय पर पहचान और उचित इलाज से उन्हें पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से लगातार स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
इस प्रकार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम किशनगंज में न केवल बच्चों को नया जीवन दे रहा है, बल्कि गरीब परिवारों के लिए आशा, विश्वास और सहारे का मजबूत आधार भी बन रहा है।