मॉप-अप दिवस के माध्यम से छूटे बच्चों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य, जिलेभर में विशेष अभियान जारी
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
बच्चों का बेहतर स्वास्थ्य किसी भी समाज की मजबूती का आधार होता है, लेकिन कृमि संक्रमण (पेट के कीड़े) जैसी समस्या उनके शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक और शैक्षणिक प्रगति पर भी नकारात्मक असर डालती है। इससे बच्चों में कुपोषण, थकान और पढ़ाई में कमजोरी देखने को मिलती है। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है, जो बच्चों को स्वस्थ और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इसी कड़ी में आज किशनगंज के बालिका उच्च विद्यालय में सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी द्वारा छात्राओं को कृमिनाशक दवा खिलाकर अभियान की शुरुआत की गई। इस दौरान बच्चों को दवा के फायदे और सेवन के सही तरीके के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई, ताकि वे जागरूक बन सकें।
व्यापक लक्ष्य के साथ चल रहा अभियान
जिला स्तर पर इस अभियान के तहत 11,22,477 बच्चों को दवा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों तक दवा पहुंचाई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
जो बच्चे किसी कारणवश मुख्य दिवस पर दवा नहीं ले पाएंगे, उनके लिए 30 मार्च को मॉप-अप दिवस रखा गया है। इस दिन ऐसे सभी बच्चों को चिन्हित कर उन्हें दवा दी जाएगी, ताकि कोई भी बच्चा इस अभियान से वंचित न रह जाए।
आयु के अनुसार दवा देने के निर्देश
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि एल्बेंडाजोल (Albendazole) दवा बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार दी जाती है। 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली (200 mg) और 2 से 19 वर्ष तक के बच्चों को पूरी गोली (400 mg) दी जाती है।
उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को यह दवा पीसकर खिलानी चाहिए, जबकि बड़े बच्चे इसे चबा सकते हैं या पानी के साथ निगल सकते हैं। दवा देते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चा इसे सही तरीके से ले, जिससे इसका पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों एवं शिक्षकों की निगरानी में ही दिया जाता है।
अधिकारियों की मौजूदगी में अभियान की निगरानी
कार्यक्रम के दौरान जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनाजिम भी उपस्थित रहे। उन्होंने अभियान के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा स्कूलों में जाकर बच्चों को दवा खिलाई जा रही है। साथ ही डीसीएम सुमन सिन्हा द्वारा बहादुरगंज और दिघलबैंक क्षेत्रों में अभियान का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया और जरूरी निर्देश दिए गए।
सामूहिक सहयोग से ही मिलेगी सफलता
सिविल सर्जन ने अभिभावकों, शिक्षकों और आम नागरिकों से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और सुनिश्चित करें कि हर बच्चा दवा जरूर ले। उन्होंने कहा कि यदि कुछ बच्चे छूट जाते हैं तो संक्रमण का खतरा बना रहता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, उज्जवल भविष्य और समाज के समग्र विकास की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है, जिसे सभी के सहयोग से ही सफल बनाया जा सकता है।
मॉप-अप दिवस के माध्यम से छूटे बच्चों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य, जिलेभर में विशेष अभियान जारी
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
बच्चों का बेहतर स्वास्थ्य किसी भी समाज की मजबूती का आधार होता है, लेकिन कृमि संक्रमण (पेट के कीड़े) जैसी समस्या उनके शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक और शैक्षणिक प्रगति पर भी नकारात्मक असर डालती है। इससे बच्चों में कुपोषण, थकान और पढ़ाई में कमजोरी देखने को मिलती है। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के उद्देश्य से जिले में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है, जो बच्चों को स्वस्थ और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इसी कड़ी में आज किशनगंज के बालिका उच्च विद्यालय में सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी द्वारा छात्राओं को कृमिनाशक दवा खिलाकर अभियान की शुरुआत की गई। इस दौरान बच्चों को दवा के फायदे और सेवन के सही तरीके के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई, ताकि वे जागरूक बन सकें।
व्यापक लक्ष्य के साथ चल रहा अभियान
जिला स्तर पर इस अभियान के तहत 11,22,477 बच्चों को दवा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों तक दवा पहुंचाई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
जो बच्चे किसी कारणवश मुख्य दिवस पर दवा नहीं ले पाएंगे, उनके लिए 30 मार्च को मॉप-अप दिवस रखा गया है। इस दिन ऐसे सभी बच्चों को चिन्हित कर उन्हें दवा दी जाएगी, ताकि कोई भी बच्चा इस अभियान से वंचित न रह जाए।
आयु के अनुसार दवा देने के निर्देश
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि एल्बेंडाजोल (Albendazole) दवा बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार दी जाती है। 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली (200 mg) और 2 से 19 वर्ष तक के बच्चों को पूरी गोली (400 mg) दी जाती है।
उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को यह दवा पीसकर खिलानी चाहिए, जबकि बड़े बच्चे इसे चबा सकते हैं या पानी के साथ निगल सकते हैं। दवा देते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चा इसे सही तरीके से ले, जिससे इसका पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों एवं शिक्षकों की निगरानी में ही दिया जाता है।
अधिकारियों की मौजूदगी में अभियान की निगरानी
कार्यक्रम के दौरान जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनाजिम भी उपस्थित रहे। उन्होंने अभियान के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों द्वारा स्कूलों में जाकर बच्चों को दवा खिलाई जा रही है। साथ ही डीसीएम सुमन सिन्हा द्वारा बहादुरगंज और दिघलबैंक क्षेत्रों में अभियान का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया और जरूरी निर्देश दिए गए।
सामूहिक सहयोग से ही मिलेगी सफलता
सिविल सर्जन ने अभिभावकों, शिक्षकों और आम नागरिकों से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और सुनिश्चित करें कि हर बच्चा दवा जरूर ले। उन्होंने कहा कि यदि कुछ बच्चे छूट जाते हैं तो संक्रमण का खतरा बना रहता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, उज्जवल भविष्य और समाज के समग्र विकास की दिशा में एक सामूहिक प्रयास है, जिसे सभी के सहयोग से ही सफल बनाया जा सकता है।