शुक्रवार को 8वीं वाहिनी एसएसबी खपरैल, सुबलजोत के वाहिनी परिसर मुख्यालय में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के दिशानिर्देश में भारतीय सर्वेक्षण विभाग और नेपाल सर्वेक्षण विभाग के साथ संयुक्त रूप से भारत-नेपाल सीमावर्ती जिलों की फर्स्ट फील्ड सर्वे टीम की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक बंगाल व सिक्किम क्षेत्र के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
इस सभा में स्थानीय सीमावर्ती जिलों के विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों व सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों ने भाग लिया। 8वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल खपरैल, सुबलजोत के वाहिनी परिसर मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में भारत-नेपाल संयुक्त फील्ड सर्वे टीम ने सीमा प्रबंधन, मैपिंग समेत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रणनीति बनाई।
बैठक में भारत-नेपाल सीमा को चिह्नित करने वाले बॉर्डर पिलरों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त पिलरों के पुनर्निर्माण तथा गुम हुए पिलरों के पुनःस्थापन को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण सहमति बनी। भारत-नेपाल संयुक्त फील्ड सर्वे टीम की पहली बैठक 8वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के मुख्यालय स्थित पशुपति भवन में आयोजित की गई।
इस अहम बैठक में भारत और नेपाल के सीमावर्ती जिलों के शीर्ष प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में सीमा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस मौके पर किशनगंज डीएम विशाल राज, हिमाद्री शेखर चक्रवर्ती, कैप अधिकारी टीम लीडर-1 भारतीय सर्वेक्षण विभाग (भारत), पश्चिम बंगाल व सिक्किम भू-स्थानिक निदेशालय के प्रेम कुमार सुब्बा, उप-प्राधिकारी न्यायाधीश सोरेंग जिला सिक्किम (भारत) के सुखेन राय, सहायक निदेशक एवं तकनीकी सलाहकार दार्जिलिंग, 41वीं सेक्टर के डीआईजी मंजीत सिंह पड्डा समेत 56वीं, 12वीं, 19वीं, 41वीं, 72वीं, 36वीं, 8वीं, 52वीं वाहिनी के कमांडेंट एवं अन्य अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में सीमा क्षेत्र के बाउंड्री पिलरों की मरम्मत, नए पिलरों का निर्माण, गुम हुए पिलरों का पुनःस्थापन तथा क्षतिग्रस्त पिलरों के पुनर्निर्माण पर सहमति बनी। इसके अलावा आधुनिक तकनीक जैसे यूएवी (ड्रोन) के माध्यम से बड़े पैमाने पर मैपिंग कराने तथा इंडो-नेपाल बाउंड्री रेफरेंस फ्रेम तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों ने माना कि इन कदमों से सीमा चिन्हों की स्पष्ट पहचान होगी और सीमा प्रबंधन अधिक प्रभावी बनेगा। इससे भविष्य में किसी प्रकार के भ्रम या विवाद की स्थिति को भी कम किया जा सकेगा।
सीमा क्षेत्रों में शांति व सुरक्षा पर जोर दिया गया। बैठक को भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के अधिकारियों ने आपसी समन्वय और सहयोग को और मजबूत करने पर बल दिया, ताकि सीमा क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित किया जा सके।
सारस न्यूज़, सिलीगुड़ी।
शुक्रवार को 8वीं वाहिनी एसएसबी खपरैल, सुबलजोत के वाहिनी परिसर मुख्यालय में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के दिशानिर्देश में भारतीय सर्वेक्षण विभाग और नेपाल सर्वेक्षण विभाग के साथ संयुक्त रूप से भारत-नेपाल सीमावर्ती जिलों की फर्स्ट फील्ड सर्वे टीम की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक बंगाल व सिक्किम क्षेत्र के लिए भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
इस सभा में स्थानीय सीमावर्ती जिलों के विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारियों व सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों ने भाग लिया। 8वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल खपरैल, सुबलजोत के वाहिनी परिसर मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में भारत-नेपाल संयुक्त फील्ड सर्वे टीम ने सीमा प्रबंधन, मैपिंग समेत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रणनीति बनाई।
बैठक में भारत-नेपाल सीमा को चिह्नित करने वाले बॉर्डर पिलरों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त पिलरों के पुनर्निर्माण तथा गुम हुए पिलरों के पुनःस्थापन को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण सहमति बनी। भारत-नेपाल संयुक्त फील्ड सर्वे टीम की पहली बैठक 8वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के मुख्यालय स्थित पशुपति भवन में आयोजित की गई।
इस अहम बैठक में भारत और नेपाल के सीमावर्ती जिलों के शीर्ष प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में सीमा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस मौके पर किशनगंज डीएम विशाल राज, हिमाद्री शेखर चक्रवर्ती, कैप अधिकारी टीम लीडर-1 भारतीय सर्वेक्षण विभाग (भारत), पश्चिम बंगाल व सिक्किम भू-स्थानिक निदेशालय के प्रेम कुमार सुब्बा, उप-प्राधिकारी न्यायाधीश सोरेंग जिला सिक्किम (भारत) के सुखेन राय, सहायक निदेशक एवं तकनीकी सलाहकार दार्जिलिंग, 41वीं सेक्टर के डीआईजी मंजीत सिंह पड्डा समेत 56वीं, 12वीं, 19वीं, 41वीं, 72वीं, 36वीं, 8वीं, 52वीं वाहिनी के कमांडेंट एवं अन्य अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में सीमा क्षेत्र के बाउंड्री पिलरों की मरम्मत, नए पिलरों का निर्माण, गुम हुए पिलरों का पुनःस्थापन तथा क्षतिग्रस्त पिलरों के पुनर्निर्माण पर सहमति बनी। इसके अलावा आधुनिक तकनीक जैसे यूएवी (ड्रोन) के माध्यम से बड़े पैमाने पर मैपिंग कराने तथा इंडो-नेपाल बाउंड्री रेफरेंस फ्रेम तैयार करने पर भी चर्चा हुई।
अधिकारियों ने माना कि इन कदमों से सीमा चिन्हों की स्पष्ट पहचान होगी और सीमा प्रबंधन अधिक प्रभावी बनेगा। इससे भविष्य में किसी प्रकार के भ्रम या विवाद की स्थिति को भी कम किया जा सकेगा।
सीमा क्षेत्रों में शांति व सुरक्षा पर जोर दिया गया। बैठक को भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के अधिकारियों ने आपसी समन्वय और सहयोग को और मजबूत करने पर बल दिया, ताकि सीमा क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और विकास सुनिश्चित किया जा सके।
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