छूटे बच्चों को आज दवा देकर कवरेज पूर्ण करने पर जोर
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
बच्चों का स्वस्थ और सुरक्षित बचपन किसी भी विकसित समाज की पहचान होता है। लेकिन कृमि संक्रमण जैसी समस्या बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में गंभीर बाधा उत्पन्न करती है। यही कारण है कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (NDD) के माध्यम से बच्चों को समय-समय पर कृमिनाशक दवा देकर उन्हें रोगमुक्त रखने का प्रयास किया जाता है। यह अभियान न केवल बीमारी से बचाव करता है, बल्कि बच्चों को बेहतर पोषण, ऊर्जा और शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करता है।
विदित हो कि जिले में 25 मार्च को बालिका उच्च विद्यालय, किशनगंज से सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी द्वारा बालिकाओं को दवा खिलाकर अभियान का शुभारंभ किया गया था। इसके पश्चात आज 30 मार्च को मॉप-अप राउंड आयोजित कर उन सभी बच्चों को कृमिनाशक दवा दी गई, जो किसी कारणवश मुख्य दिवस पर छूट गए थे।
मॉप-अप राउंड: एक भी बच्चा न छूटे, इस पर विशेष ध्यान
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि मॉप-अप राउंड का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी बच्चा इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अभियान से वंचित न रह जाए। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और समुदाय स्तर पर छूटे हुए बच्चों की पहचान कर उन्हें दवा खिलाई गई।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहले से ही सूची तैयार कर ली गई थी, जिसके आधार पर संबंधित कर्मियों ने घर-घर जाकर भी बच्चों को दवा देने का कार्य किया। इससे अभियान का दायरा और अधिक व्यापक हुआ तथा अधिकतम बच्चों तक इसका लाभ पहुंचाया गया।
सही मात्रा और विधि से दवा सेवन जरूरी
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि कृमिनाशक दवा एल्बेंडाजोल (Albendazole) बच्चों को उनकी आयु के अनुसार दी जाती है—
• 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली (200 मिलीग्राम) • 2 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एक पूरी गोली (400 मिलीग्राम)
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को गोली पीसकर खिलाई जानी चाहिए, जबकि बड़े बच्चे इसे चबा कर या पानी के साथ निगल सकते हैं। दवा देते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि बच्चा इसे पूरी तरह ग्रहण करे, जिससे इसका प्रभाव सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं की देखरेख में ही दिया जाता है।
सामूहिक प्रयास से ही संभव है पूर्ण सफलता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से कृमिनाशक दवा दिलाएं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग मिलकर इस अभियान को सफल बनाते हैं, तो निश्चित रूप से कृमि संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस और मॉप-अप राउंड का यह संयुक्त प्रयास बच्चों के स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो समाज के हर वर्ग की भागीदारी से ही पूर्ण रूप से सफल हो सकता है।
छूटे बच्चों को आज दवा देकर कवरेज पूर्ण करने पर जोर
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
बच्चों का स्वस्थ और सुरक्षित बचपन किसी भी विकसित समाज की पहचान होता है। लेकिन कृमि संक्रमण जैसी समस्या बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में गंभीर बाधा उत्पन्न करती है। यही कारण है कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (NDD) के माध्यम से बच्चों को समय-समय पर कृमिनाशक दवा देकर उन्हें रोगमुक्त रखने का प्रयास किया जाता है। यह अभियान न केवल बीमारी से बचाव करता है, बल्कि बच्चों को बेहतर पोषण, ऊर्जा और शिक्षा की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करता है।
विदित हो कि जिले में 25 मार्च को बालिका उच्च विद्यालय, किशनगंज से सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी द्वारा बालिकाओं को दवा खिलाकर अभियान का शुभारंभ किया गया था। इसके पश्चात आज 30 मार्च को मॉप-अप राउंड आयोजित कर उन सभी बच्चों को कृमिनाशक दवा दी गई, जो किसी कारणवश मुख्य दिवस पर छूट गए थे।
मॉप-अप राउंड: एक भी बच्चा न छूटे, इस पर विशेष ध्यान
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि मॉप-अप राउंड का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी बच्चा इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य अभियान से वंचित न रह जाए। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और समुदाय स्तर पर छूटे हुए बच्चों की पहचान कर उन्हें दवा खिलाई गई।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहले से ही सूची तैयार कर ली गई थी, जिसके आधार पर संबंधित कर्मियों ने घर-घर जाकर भी बच्चों को दवा देने का कार्य किया। इससे अभियान का दायरा और अधिक व्यापक हुआ तथा अधिकतम बच्चों तक इसका लाभ पहुंचाया गया।
सही मात्रा और विधि से दवा सेवन जरूरी
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि कृमिनाशक दवा एल्बेंडाजोल (Albendazole) बच्चों को उनकी आयु के अनुसार दी जाती है—
• 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली (200 मिलीग्राम) • 2 से 19 वर्ष तक के बच्चों को एक पूरी गोली (400 मिलीग्राम)
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को गोली पीसकर खिलाई जानी चाहिए, जबकि बड़े बच्चे इसे चबा कर या पानी के साथ निगल सकते हैं। दवा देते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि बच्चा इसे पूरी तरह ग्रहण करे, जिससे इसका प्रभाव सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह दवा पूरी तरह सुरक्षित है और इसे प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं की देखरेख में ही दिया जाता है।
सामूहिक प्रयास से ही संभव है पूर्ण सफलता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से कृमिनाशक दवा दिलाएं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें। उन्होंने कहा कि यदि सभी लोग मिलकर इस अभियान को सफल बनाते हैं, तो निश्चित रूप से कृमि संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस और मॉप-अप राउंड का यह संयुक्त प्रयास बच्चों के स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो समाज के हर वर्ग की भागीदारी से ही पूर्ण रूप से सफल हो सकता है।