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किशनगंज में “ज्ञान भारतम् मिशन” को लेकर जिला स्तरीय बैठक, पांडुलिपियों के सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण पर जोर।

सारस न्यूज़, किशनगंज।

किशनगंज समाहरणालय में जिला पदाधिकारी विशाल राज की अध्यक्षता में “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, संरक्षण और डिजिटलीकरण को लेकर जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित रखने और डिजिटल माध्यम से संरक्षित करने की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार तथा भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। साथ ही जिला स्तर पर समिति के गठन, नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति और प्रखंड स्तर पर सर्वेक्षण टीम बनाने की प्रक्रिया पर भी विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने बताया कि पांडुलिपियों की खोज और सूची तैयार करने का कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाएगा।

जिला पदाधिकारी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने-अपने क्षेत्रों में संभावित स्थानों पर पांडुलिपियों की खोज की जाए। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय, मंदिर, मदरसा, पुराने विद्यालय, ऐतिहासिक स्थल तथा अन्य धार्मिक संस्थानों में प्राचीन दस्तावेज मिलने की संभावना रहती है, इसलिए इन स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जाए। जहां भी पांडुलिपियां मिलें, उनकी विस्तृत सूची तैयार की जाए।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिले के प्रमुख पुस्तकालयों, विशेषकर राजेन्द्र पुस्तकालय, के साथ-साथ जिला अभिलेखागार में भी पुराने दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसके अलावा कैथी सहित अन्य प्राचीन लिपियों में लिखी पांडुलिपियों की पहचान कर उन्हें संरक्षित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन ने ऐसे लोगों की भी पहचान करने पर जोर दिया जिनके पास परंपरागत रूप से पांडुलिपियां सुरक्षित रखी गई हैं।

उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार झा ने बैठक में स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़ी पांडुलिपियों की खोज पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि सुरजापुरी जैसी स्थानीय भाषाओं से संबंधित सामग्री जिले की सांस्कृतिक विरासत को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी प्रहलाद कुमार ने जानकारी दी कि जिले में पांडुलिपियों के सर्वेक्षण के लिए समिति का गठन किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि जो भी पांडुलिपियां प्राप्त होंगी, उन्हें “ज्ञान भारतम्” मोबाइल एप के माध्यम से अपलोड किया जाएगा, ताकि उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।

जिला पदाधिकारी ने कहा कि पांडुलिपियां देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिनका संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि मिशन के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए समन्वित रूप से कार्य करें और अधिक से अधिक पांडुलिपियों की पहचान कर उन्हें डिजिटल माध्यम से सुरक्षित करें।

क्या होती है पांडुलिपि
पांडुलिपि वह प्राचीन हस्तलिखित दस्तावेज होती है, जो कागज, ताड़पत्र, भोजपत्र या अन्य पारंपरिक माध्यमों पर लिखी गई हो और जिसमें ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक या वैज्ञानिक महत्व की जानकारी हो। सामान्यतः 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने ऐसे दस्तावेज पांडुलिपि की श्रेणी में आते हैं।

मिशन का उद्देश्य
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों की पहचान करना, उनका संरक्षण सुनिश्चित करना और उन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह विरासत संरक्षित रह सके।

डिजिटलीकरण की प्रक्रिया
पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए पहले उनकी पहचान कर सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद उच्च गुणवत्ता में स्कैनिंग या फोटोग्राफी की जाएगी। प्रत्येक पांडुलिपि से जुड़ी जानकारी जैसे शीर्षक, भाषा, विषय और लेखक आदि का विवरण तैयार किया जाएगा। इसके बाद संबंधित डेटा को पोर्टल या मोबाइल एप के माध्यम से अपलोड कर डिजिटल आर्काइव बनाया जाएगा।

बैठक के प्रमुख निर्णय
बैठक में जिला स्तरीय समिति को अनुमोदन दिया गया तथा नोडल पदाधिकारी की नियुक्ति के निर्देश दिए गए। प्रखंड स्तर पर सर्वेक्षण टीम बनाने, तीन माह के भीतर सर्वेक्षण कार्य पूरा करने, मोबाइल एप और एसओपी के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने तथा जन-जागरूकता अभियान चलाने पर सहमति बनी। इसके साथ ही पूरे कार्य की साप्ताहिक और मासिक समीक्षा की व्यवस्था भी करने का निर्णय लिया गया।

प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने नागरिकों, पुस्तकालयों, संस्थानों और धार्मिक स्थलों से अपील की है कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि सुरक्षित है तो उसकी जानकारी “ज्ञान भारतम्” मोबाइल एप के माध्यम से साझा करें, ताकि उसे डिजिटल रूप में संरक्षित किया जा सके।

बैठक में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार झा, वरीय उप समाहर्ता सुनीता कुमारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी प्रहलाद कुमार सहित कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

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