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ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस से नवजात और माताओं को मिल रहा समग्र स्वास्थ्य संरक्षण।

जन्म के बाद छह माह तक केवल स्तनपान से ही बनती है मजबूत प्रतिरक्षा क्षमतासंपूर्ण टीकाकरण, स्वच्छता और ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के माध्यम से मिल रहा समग्र स्वास्थ्य संरक्षण

राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।

नवजात शिशु का जीवन का प्रारंभिक काल अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण होता है, जो उसके पूरे जीवन की सेहत और विकास की दिशा तय करता है। इस दौरान शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता का विकास होना न केवल उसे वर्तमान में बीमारियों से बचाता है, बल्कि भविष्य में भी एक स्वस्थ और सशक्त जीवन का आधार तैयार करता है। बदलते मौसम, बढ़ते संक्रमण और जागरूकता की कमी के कारण नवजातों में बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में आवश्यक है कि परिवार के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग भी समन्वित प्रयासों के माध्यम से नवजात देखभाल को प्राथमिकता दे।

इसी क्रम में जिले में ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं नवजात शिशुओं को एक ही मंच पर स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पोषण परामर्श और स्वच्छता संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस दौरान स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा स्तनपान, नवजात देखभाल और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपायों को लेकर लोगों को जागरूक भी किया गया।

माँ का दूध ही नवजात के लिए पहला सुरक्षा कवच

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि नवजात के लिए माँ का दूध किसी अमृत से कम नहीं है। यह न केवल शिशु को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है, बल्कि उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि जन्म के बाद पहले छह माह तक शिशु को केवल माँ का ही दूध दिया जाना चाहिए। इस दौरान पानी या किसी भी प्रकार का ऊपरी आहार देना हानिकारक हो सकता है। माँ के दूध में मौजूद प्रोटीन, विटामिन, वसा और खनिज तत्व शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

मजबूत प्रतिरक्षा से संक्रामक बीमारियों से मिलता है संरक्षण

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि मजबूत रोग-प्रतिरोधक क्षमता नवजात को कई संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखती है। उन्होंने कहा कि यदि शुरुआती अवस्था में ही बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत कर दी जाए, तो वह भविष्य में भी कम बीमार पड़ता है और उसका समग्र विकास बेहतर होता है। इसके लिए स्तनपान के साथ-साथ नियमित स्वास्थ्य जांच और देखभाल बेहद जरूरी है।

जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना बेहद आवश्यक

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को माँ का दूध पिलाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि माँ का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिए “प्रथम टीका” के समान होता है, जो उसे शुरुआती संक्रमणों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए किसी भी भ्रांति के कारण इसे त्यागना नहीं चाहिए।

छह माह बाद ही दें ऊपरी आहार, स्तनपान जारी रखें

डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि नवजात को छह माह के बाद ही ऊपरी आहार देना शुरू करना चाहिए और कम से कम दो वर्षों तक स्तनपान जारी रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि शिशु की देखभाल के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। बच्चे को गोद लेने से पहले हाथ धोना, साफ कपड़े पहनाना और गंदगी से दूर रखना संक्रामक बीमारियों से बचाव में सहायक होता है।

संपूर्ण टीकाकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस से मिलती है समग्र सुरक्षा

डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि संपूर्ण टीकाकरण नवजात को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के माध्यम से टीकाकरण, पोषण परामर्श और स्वास्थ्य जांच जैसी सेवाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और सेवाओं की पहुंच बढ़ती है।

जिले में प्रत्येक बुधवार और शुक्रवार को आंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित टीकाकरण सत्र आयोजित किए जाते हैं, जहां अभिभावकों को बच्चों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करना चाहिए।

नवजात की बेहतर सेहत के लिए स्तनपान, स्वच्छता, संपूर्ण टीकाकरण और ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस जैसे कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि इन सभी पहलुओं पर सामूहिक रूप से ध्यान दिया जाए, तो न केवल नवजात को बीमारियों से बचाया जा सकता है, बल्कि एक स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त समाज की मजबूत नींव भी रखी जा सकती है।

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