सारस न्यूज, किशनगंज।
ठाकुरगंज प्रखंड में बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ, पटना के आह्वान पर 08 अप्रैल 2026 से कार्यरत सभी 09 पंचायत सचिवों के हड़ताल पर चले जाने के कारण जनजीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। पंचायत स्तर पर मिलने वाली मूलभूत सेवाएं बाधित हो गई हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।हड़ताल के चलते जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने, विभिन्न प्रकार की पेंशन योजनाओं का लाभ लेने, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं, राशन कार्ड बनवाने और उसमें सुधार कराने जैसे आवश्यक कार्य पूरी तरह से प्रभावित हो गए हैं। इसके अलावा पंचायतों में चल रहे विकास कार्य और विभिन्न सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन भी ठप पड़ गया है।इस संबंध में प्रखंड पंचायत सचिव संघ के अध्यक्ष राजेश कुमार, सचिव दिवाकर महतो, कोषाध्यक्ष बंटी कुमार, जिला मंत्री कमलेश कुमार, उपाध्यक्ष झंटू उरांव, उप सचिव जीतू कुमार एवं सदस्य मंजर हुसैन ने बताया कि पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार के वादाखिलाफी और उदासीन रवैये के कारण उन्हें मजबूरी में हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि उनकी मांगों पर लंबे समय से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।जिला मंत्री कमलेश कुमार ने पंचायत सचिवों की प्रमुख पांच सूत्री मांगों का उल्लेख करते हुए बताया कि अंतर-जिला स्थानांतरण की व्यवस्था लागू की जाए, पंचायत सचिवों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की जाए, 6ठे वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुसार ग्रेड पे 4200 किया जाए, अभिकर्ता एवं ठेकेदारी कार्यों से मुक्ति दी जाए तथा पंचायत सचिवों को प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी के पद पर प्रोन्नति के लिए निर्धारित 55 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा समाप्त की जाए।उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में पिछले लगभग 50 दिनों से राजस्व कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं, जिनके कार्यों को अब तक पंचायत सचिव ही संभाल रहे थे। लेकिन अब पंचायत सचिवों के भी हड़ताल पर चले जाने से जाति, आय, निवास, एनसीएल, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र सहित पारिवारिक सूची से जुड़े कार्य पूरी तरह बाधित हो गए हैं, जिससे आम नागरिकों की समस्याएं और बढ़ गई हैं।वहीं प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अहमर अब्दाली ने बताया कि स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पंचायत स्तर पर कार्यरत विकास मित्र, कार्यपालक सहायक, आवास सहायक और किसान सलाहकारों को कुछ कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि लॉगिन आधारित कार्यों का कोई विकल्प नहीं है, जिसके कारण कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी नहीं हो पा रहे हैं।
