सारस न्यूज़, अररिया।
एफसीआई गोदाम के बाहर फूड एंड एलाइड वर्कर्स यूनियन के मजदूरों ने दिया धरना
श्रम विभाग की अधिसूचना के अनुसार प्रति बोरी ₹11.40 लागू करने की मांग
फूड एंड एलाइड वर्कर्स यूनियन के मजदूरों ने मजदूरी में कटौती के विरोध में सूबे की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीन दिवसीय हड़ताल की। इस दौरान मजदूरों ने कृषि बाजार समिति परिसर स्थित एफसीआई गोदाम के बाहर धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
हड़ताल का नेतृत्व यूनियन के राज्य उपाध्यक्ष सह सरदार उमेश पासवान ने किया। उन्होंने बताया कि बिहार राज्य खाद्य निगम ने 1 अक्टूबर 2024 से अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी को लागू नहीं किया है। इसके बजाय लोडिंग-अनलोडिंग की निविदा के माध्यम से मजदूरी दर ₹11.64 से घटाकर ₹4.55 कर दी गई है, जो न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 का उल्लंघन है।
उमेश पासवान ने कहा कि बिहार राज्य खाद्य निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और मुख्यालय ने श्रम विभाग द्वारा अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी को लागू करने के लिए जिला प्रबंधकों को समय-समय पर निर्देश दिया था। इसके बावजूद, मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी से कम दर पर भुगतान करना उच्च न्यायालय के आदेश का भी उल्लंघन है।
29% कटौती और पीएफ-ईएसआई मुद्दा
परिवहन अभिकर्ताओं द्वारा मजदूरों की मजदूरी में 29% कटौती जबरन की जा रही है, जो भविष्य निधि (पीएफ) और ईएसआई अंशदान के नाम पर हो रही है। मजदूरों का कहना है कि कटौती के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि यह राशि वास्तव में जमा की जा रही है या नहीं।
मजदूरों ने इसे मनमानी और गैरकानूनी करार देते हुए मांग की कि:
- न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान की निविदा को अमान्य किया जाए।
- मजदूरी में की गई जबरन कटौती को रोका जाए।
- नाजायज कटौती की गई राशि मजदूरों को वापस की जाए।
मजदूरों की मांगें और नाम
धरना देने वाले मजदूरों में प्रकाश यादव, छोटू कुमार, राजेश पासवान, सरदार मोहम्मद हसन, कुंदन कुमार, जितेंद्र यादव, योगेश पासवान, मोहम्मद शमशाद, रंजीत यादव, चंदन पासवान, गोपाल पासवान, दिलीप पासवान, छोटू मंडल, और कुंदन पासवान सहित अन्य ने सरकार से न्यूनतम मजदूरी और श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुविधाओं को लागू करने की मांग की। सरकार और संबंधित विभागों से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई गई है ताकि मजदूरों को उनका अधिकार मिल सके।
