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टीबी हारेगा, पंचायतें चमकेंगी: किशनगंज में ‘टीबी मुक्त पंचायत’ अभियान की शुरुआत।

प्रत्येक प्रखंड में हुई समीक्षा बैठक, हर प्रखंड से दो पंचायतों का चयन

टीबी मुक्त पंचायत बनेगी विकास और स्वास्थ्य की नई मिसाल, 36 मरीजों ने दिखाई उम्मीद की राह

राहुल कुमार, सारस न्यूज, किशनगंज।

टीबी (क्षय रोग) सिर्फ एक संक्रामक बीमारी नहीं, बल्कि यह समाज के सबसे कमजोर वर्गों को प्रभावित करने वाला एक गंभीर स्वास्थ्य संकट है। यह रोग धीरे-धीरे शरीर को भीतर से खोखला कर देता है और यदि समय रहते इसकी पहचान व इलाज न हो, तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। दुखद बात यह है कि आज भी इसके इलाज और लक्षणों को लेकर समाज में भ्रम, शर्म और भेदभाव जैसी समस्याएं मौजूद हैं। भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक देश को “टीबी मुक्त भारत” बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी क्रम में किशनगंज जिले में ‘टीबी मुक्त पंचायत अभियान’ का शुभारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर टीबी की पहचान, उपचार और उन्मूलन सुनिश्चित करना है।

प्रत्येक प्रखंड में समीक्षा बैठक, निक्षय योजना की भी समीक्षा:

जिले के सभी प्रखंडों में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों की अध्यक्षता में समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें स्वास्थ्य विभाग की टीम, आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदी, पंचायत प्रतिनिधि समेत कई हितधारकों ने भाग लिया। इन बैठकों में ‘टीबी मुक्त पंचायत’ अभियान की रूपरेखा साझा की गई और निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत टीबी मरीजों को मिलने वाली सहायता की त्वरित भुगतान प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। सिविल सर्जन डॉ. मंजर आलम ने बताया कि अप्रैल माह तक जिले में 856 टीबी मरीजों की पहचान की जा चुकी है, जिनका इलाज विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क किया जा रहा है। अब तक 36 मरीजों ने नियमित दवा लेकर टीबी को पूरी तरह मात दी है।

हर प्रखंड से दो पंचायतों का चयन, टीबी मुक्त पंचायत की ओर कदम:

जिले के प्रत्येक प्रखंड से दो पंचायतों को चिन्हित किया गया है, जहां वार्ड स्तर पर सक्रिय खोज, स्वास्थ्य शिविर, जन-जागरूकता कार्यक्रम और स्कूलों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। चिन्हित पंचायतों में प्रति 1000 आबादी पर 50 लक्षणयुक्त मरीजों की जांच की जाएगी। यदि पंचायत में दो से कम मरीज पाए जाते हैं और 80% राजस्व ग्रामों में स्थिति सामान्य रहती है, तो उसे “टीबी मुक्त पंचायत” घोषित किया जाएगा।

क्या होगा टीबी मुक्त पंचायत बनने से बदलाव?

सिविल सर्जन डॉ. मंजर आलम ने बताया कि “टीबी मुक्त पंचायत” केवल एक स्वास्थ्य उपलब्धि नहीं, बल्कि यह एक सशक्त, जागरूक और स्वस्थ समाज की पहचान होगी। इससे होने वाले बदलावों में शामिल हैं:

  • भ्रांतियों और भेदभाव से मुक्ति: रोगियों को सामाजिक स्वीकार्यता मिलेगी।
  • स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच: जागरूकता के कारण लोग समय पर जांच और इलाज के लिए आगे आएंगे।
  • पोषण व सहयोग में वृद्धि: निक्षय मित्रों और सरकारी योजनाओं के सहयोग से मरीजों को बेहतर पोषण और देखभाल मिलेगी।
  • विकास की रफ्तार तेज़: जब लोग स्वस्थ होंगे, तो कार्यक्षमता बढ़ेगी और पंचायतों का सामाजिक-आर्थिक विकास भी तेज होगा।

टीबी मुक्त भारत में किशनगंज की अहम भागीदारी:

डॉ. मंजर आलम ने कहा, “इस अभियान का मुख्य उद्देश्य टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना, मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना और समाज में भय व भेदभाव की भावना को खत्म करना है। टीबी को हराने के लिए हर पंचायत, हर वार्ड और हर परिवार की भागीदारी जरूरी है।”

चिह्नित पंचायतों में मुखिया, पंचायत सचिव, शिक्षक, आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, जीविका दीदी और टीबी चैंपियनों की एक टीम गठित की जाएगी, जो लोगों को जागरूक करेगी और लक्षण दिखाई देने पर जांच के लिए प्रेरित करेगी।

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