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बरसात और उमस के बीच बढ़ा चिकनपॉक्स का खतरा।

राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।

बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सतर्क रहने की सलाह
समय पर पहचान और इलाज से रोका जा सकता है संक्रमण का प्रसार


बरसात की नमी और उमस भरी गर्मी ने जहां एक ओर मौसमी बीमारियों को बढ़ावा दिया है, वहीं चिकनपॉक्स जैसी संक्रामक बीमारी के मामले भी सामने आने लगे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक अत्यंत संक्रामक वायरल रोग है, जो विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों को तेजी से प्रभावित कर सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए संक्रमण से बचाव और रोकथाम के उपायों पर जोर दिया है।


क्या है चिकनपॉक्स और कैसे फैलता है संक्रमण?

चिकनपॉक्स, जिसे वेरिसेला वायरस के नाम से जाना जाता है, हवा के माध्यम से या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। शुरुआत में यह रोग चेहरे और छाती पर फफोलेदार दानों के रूप में उभरता है, जो बाद में पूरे शरीर में फैल जाते हैं। इन दानों में खुजली, जलन और तरल पदार्थ भरा होता है, जो बाद में सूखकर पपड़ी का रूप ले लेते हैं।

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया, “चिकनपॉक्स के तीन चरण होते हैं — पहले चरण में चकत्ते निकलते हैं, दूसरे में वे फफोले बनते हैं, और तीसरे चरण में वे घाव बनकर सूखने लगते हैं। जब तक ये दाने पूरी तरह सूख न जाएं, तब तक संक्रमित व्यक्ति दूसरों के लिए खतरा बना रहता है।”

उन्होंने आगे कहा कि बुखार, थकान, गले में खराश, शरीर पर फोड़े, बच्चों में चिड़चिड़ापन, नींद में वृद्धि और भूख की कमी इसके प्रमुख लक्षण हैं।


👶 बच्चों में खतरा अधिक, आइसोलेशन अनिवार्य

जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि “बच्चों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है, हालांकि यह किसी भी आयु वर्ग को प्रभावित कर सकता है।” विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों को सतर्क करते हुए आवश्यक दवाओं और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने बताया कि रोग के प्रसार को रोकने के लिए संक्रमित व्यक्ति को कम से कम 6 दिनों तक आइसोलेशन में रहना आवश्यक है। इस अवधि में स्कूल, कार्यालय और सार्वजनिक स्थानों से दूरी बनाना अनिवार्य है।


🏥 समय पर डॉक्टर से संपर्क है जरूरी

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन ने कहा, “चिकनपॉक्स का इलाज संभव है, बशर्ते लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया जाए। विशेष सतर्कता नवजात शिशुओं, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को रखनी चाहिए।”

डॉ. राजेश कुमार ने भी जोर देते हुए कहा, “अगर किसी में चिकनपॉक्स जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाएं। इसके अलावा एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं से संपर्क कर जरूरी सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।”


बचाव ही सबसे अच्छा उपाय

विशेषज्ञों के अनुसार, चिकनपॉक्स से बचने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता, संक्रमित व्यक्ति से दूरी, हाथों की बार-बार सफाई, और कपड़े व बिस्तर की साफ-सफाई आवश्यक है। जिन बच्चों को अब तक चेचक का टीका नहीं लगा है, उन्हें तुरंत टीकाकरण कराना चाहिए।

बरसात और उमस भरे इस मौसम में चिकनपॉक्स तेजी से फैल सकता है, इसलिए आवश्यक है कि लोग स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी का पालन करें और लक्षण दिखने पर देरी न करें


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