सारस न्यूज, वेब डेस्क।
देशभर में बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और सरकार की कथित मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ अब आम जनता सड़कों पर उतरने को तैयार है। इसी कड़ी में विभिन्न ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने आगामी बुधवार को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया है। यह हड़ताल केंद्र सरकार की उन नीतियों के खिलाफ है जिन्हें संगठन श्रमिकों और किसानों के हितों के विरुद्ध मानते हैं।
इसके साथ ही, बिहार में चल रही मतदाता सूची के पुनरीक्षण प्रक्रिया को तत्काल वापस लेने की मांग को लेकर भी राज्यव्यापी ‘बिहार बंद’ का ऐलान किया गया है। संगठनों का आरोप है कि यह पुनरीक्षण कार्य गरीबों, दलितों और वंचित तबकों को मतदाता सूची से बाहर करने की एक सोची-समझी साजिश है।
इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन में जन जागरण शक्ति संगठन, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, नरेगा संघर्ष मोर्चा और बिहार राज्य विद्यालय रसोइया यूनियन जैसे कई प्रमुख संगठन बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। इन संगठनों ने बुधवार को सड़कों पर उतरने और विरोध दर्ज कराने का निर्णय लिया है।
जन जागरण शक्ति संगठन के सचिव आशीष रंजन ने बताया कि आम हड़ताल और बिहार बंद के समर्थन में श्रमिकों की एक विशाल रैली निकाली जाएगी, जो बस स्टैंड से शुरू होकर चांदनी चौक होते हुए धरना स्थल तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि यह हड़ताल केवल मजदूरों या किसानों की नहीं, बल्कि हर उस आम आदमी की आवाज है, जो आज अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है।
रंजन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन सरकार को चेतावनी देता है कि यदि उनकी मांगों को अनदेखा किया गया तो आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।
हड़ताल को सफल बनाने के लिए जगह-जगह जनसभाओं, नुक्कड़ नाटकों और पर्चा वितरण जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। आंदोलनकारी संगठनों का दावा है कि उन्हें विभिन्न सामाजिक वर्गों से व्यापक समर्थन मिल रहा है।
अब देखना यह होगा कि इस हड़ताल और बंद का सरकार पर क्या असर पड़ता है और क्या यह आंदोलन केंद्र की नीतियों को प्रभावित कर पाता है या नहीं।
