ठाकुरगंज प्रखंड के भातगांव पंचायत अंतर्गत नेमुगुरी ग्राम स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में मातृ पोषण संवाद एवं जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के साथ छोटे बच्चों की माताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य को मजबूत करना, बच्चे के पहले 1000 दिनों के महत्व, नियमित टीकाकरण और परिवार नियोजन के बारे में सही एवं व्यावहारिक जानकारी देना था। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित किया गया। संदेश दिया गया कि सही पोषण, समय पर जांच और नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम कर सकती हैं और आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ बना सकती हैं।
माताओं के लिए आहार सूची और देखभाल के व्यावहारिक टिप्स
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने माताओं के बीच उम्र के अनुसार बच्चों का आहार चार्ट वितरित किया और 6 माह बाद पूरक आहार शुरू करने की विधि, हाथ धोने की आदत, साफ बर्तन में भोजन देना, खुले में शौच से बचना तथा नियमित वजन एवं स्वास्थ्य जांच के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सही और वैज्ञानिक जानकारी के अभाव में ही बच्चे कुपोषित होते हैं, जबकि जागरूकता के साथ हर घर से एक स्वस्थ बच्चा निकल सकता है।
आंगनबाड़ी सेविका सहर बानो ने कहा कि ऐसे संवाद कार्यक्रमों से माताओं का आत्मविश्वास बढ़ता है। वे रोजमर्रा की पोषण संबंधी गलतियों को सुधारने लगती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि माताएँ “कम लेकिन सही” आहार सिद्धांत अपनाएँ, बार-बार एक जैसा भोजन देने की बजाय विविधता लाएँ और बीमारी के दौरान भी डॉक्टर की सलाह से हल्का, पौष्टिक भोजन देना जारी रखें।
मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता
सिविल सर्जन डॉ. चौधरी ने संदेश दिया कि किशनगंज जिले में मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर:
गर्भवती महिलाओं की समय पर एएनसी जांच
आयरन-फोलिक एसिड की उपलब्धता
एनीमिया की जांच
सुरक्षित संस्थागत प्रसव
नवजात की विशेष देखभाल
के लिए उचित व्यवस्था की गई है।
उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि वे गर्भावस्था के दौरान सभी निर्धारित जांच समय पर कराएँ, आयरन-फोलिक एसिड की गोलियाँ नियमित लें और प्रसव हमेशा अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में ही कराएँ, ताकि जटिलताओं का जोखिम कम हो सके।
टीकाकरण और परिवार नियोजन पर विशेष ज़ोर
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एख्लाकुर रहमान ने कहा कि नियमित टीकाकरण बच्चे के लिए सुरक्षा कवच है। जन्म से पाँच वर्ष तक सभी टीके समय पर लगवाना हर परिवार की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत टीबी, पोलियो, खसरा, डिप्थीरिया, टेटनस, न्यूमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के सभी टीके निःशुल्क उपलब्ध हैं। यदि किसी कारण तारीख छूट जाए तो अगली सत्र में अवश्य पूरा करवाना चाहिए।
परिवार नियोजन पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “छोटा परिवार, स्वस्थ परिवार” की अवधारणा अब व्यवहार में अपनाई जानी चाहिए। दो गर्भ के बीच पर्याप्त अंतर रखने से न केवल माँ की सेहत सुरक्षित रहती है बल्कि प्रत्येक बच्चे को बेहतर देखभाल एवं पोषण मिलता है। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध सुरक्षित साधनों—कंडोम, गोली, IUCD, नसबंदी आदि—का उपयोग करने की अपील की।
यूनिसेफ का सहयोग और समुदाय की बढ़ती जागरूकता
यूनिसेफ के बीएमसी एजाज अफजल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम सरकार और विकास साझेदारों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम हैं। लक्ष्य यह है कि हर माँ तक पोषण, स्तनपान, टीकाकरण, स्वच्छता और परिवार नियोजन से संबंधित विज्ञान-आधारित जानकारी सरल भाषा में पहुँचे और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आए। उन्होंने कहा कि बच्चे की सेहत केवल अस्पताल की नहीं, बल्कि परिवार और समुदाय की संयुक्त जिम्मेदारी है — सही जानकारी, सही समय पर सही सेवा और सही निर्णय ही बच्चों के स्वस्थ भविष्य की नींव रखते हैं।
नेमुगुरी की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
बैठक के दौरान नेमुगुरी की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और सवाल-जवाब से स्पष्ट दिखा कि ग्रामीण माताएँ अब अपने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और भविष्य के प्रति अधिक सजग हो रही हैं। कई माताओं ने संकल्प लिया कि वे गर्भावस्था की जांच समय पर कराएँगी, बच्चों का टीकाकरण नहीं छोड़ेंगी और परिवार नियोजन पर पति और परिवार से खुलकर चर्चा करेंगी।
नेमुगुरी में आयोजित यह मातृ पोषण संवाद कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य शिक्षा को सशक्त बनाने, माताओं को वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने और मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य, नियमित टीकाकरण तथा परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुआ।
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
ठाकुरगंज प्रखंड के भातगांव पंचायत अंतर्गत नेमुगुरी ग्राम स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में मातृ पोषण संवाद एवं जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के साथ छोटे बच्चों की माताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य को मजबूत करना, बच्चे के पहले 1000 दिनों के महत्व, नियमित टीकाकरण और परिवार नियोजन के बारे में सही एवं व्यावहारिक जानकारी देना था। यह कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित किया गया। संदेश दिया गया कि सही पोषण, समय पर जांच और नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम कर सकती हैं और आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ बना सकती हैं।
माताओं के लिए आहार सूची और देखभाल के व्यावहारिक टिप्स
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने माताओं के बीच उम्र के अनुसार बच्चों का आहार चार्ट वितरित किया और 6 माह बाद पूरक आहार शुरू करने की विधि, हाथ धोने की आदत, साफ बर्तन में भोजन देना, खुले में शौच से बचना तथा नियमित वजन एवं स्वास्थ्य जांच के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सही और वैज्ञानिक जानकारी के अभाव में ही बच्चे कुपोषित होते हैं, जबकि जागरूकता के साथ हर घर से एक स्वस्थ बच्चा निकल सकता है।
आंगनबाड़ी सेविका सहर बानो ने कहा कि ऐसे संवाद कार्यक्रमों से माताओं का आत्मविश्वास बढ़ता है। वे रोजमर्रा की पोषण संबंधी गलतियों को सुधारने लगती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि माताएँ “कम लेकिन सही” आहार सिद्धांत अपनाएँ, बार-बार एक जैसा भोजन देने की बजाय विविधता लाएँ और बीमारी के दौरान भी डॉक्टर की सलाह से हल्का, पौष्टिक भोजन देना जारी रखें।
मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता
सिविल सर्जन डॉ. चौधरी ने संदेश दिया कि किशनगंज जिले में मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर:
गर्भवती महिलाओं की समय पर एएनसी जांच
आयरन-फोलिक एसिड की उपलब्धता
एनीमिया की जांच
सुरक्षित संस्थागत प्रसव
नवजात की विशेष देखभाल
के लिए उचित व्यवस्था की गई है।
उन्होंने माताओं से आग्रह किया कि वे गर्भावस्था के दौरान सभी निर्धारित जांच समय पर कराएँ, आयरन-फोलिक एसिड की गोलियाँ नियमित लें और प्रसव हमेशा अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में ही कराएँ, ताकि जटिलताओं का जोखिम कम हो सके।
टीकाकरण और परिवार नियोजन पर विशेष ज़ोर
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एख्लाकुर रहमान ने कहा कि नियमित टीकाकरण बच्चे के लिए सुरक्षा कवच है। जन्म से पाँच वर्ष तक सभी टीके समय पर लगवाना हर परिवार की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत टीबी, पोलियो, खसरा, डिप्थीरिया, टेटनस, न्यूमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के सभी टीके निःशुल्क उपलब्ध हैं। यदि किसी कारण तारीख छूट जाए तो अगली सत्र में अवश्य पूरा करवाना चाहिए।
परिवार नियोजन पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “छोटा परिवार, स्वस्थ परिवार” की अवधारणा अब व्यवहार में अपनाई जानी चाहिए। दो गर्भ के बीच पर्याप्त अंतर रखने से न केवल माँ की सेहत सुरक्षित रहती है बल्कि प्रत्येक बच्चे को बेहतर देखभाल एवं पोषण मिलता है। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध सुरक्षित साधनों—कंडोम, गोली, IUCD, नसबंदी आदि—का उपयोग करने की अपील की।
यूनिसेफ का सहयोग और समुदाय की बढ़ती जागरूकता
यूनिसेफ के बीएमसी एजाज अफजल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम सरकार और विकास साझेदारों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम हैं। लक्ष्य यह है कि हर माँ तक पोषण, स्तनपान, टीकाकरण, स्वच्छता और परिवार नियोजन से संबंधित विज्ञान-आधारित जानकारी सरल भाषा में पहुँचे और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आए। उन्होंने कहा कि बच्चे की सेहत केवल अस्पताल की नहीं, बल्कि परिवार और समुदाय की संयुक्त जिम्मेदारी है — सही जानकारी, सही समय पर सही सेवा और सही निर्णय ही बच्चों के स्वस्थ भविष्य की नींव रखते हैं।
नेमुगुरी की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
बैठक के दौरान नेमुगुरी की महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और सवाल-जवाब से स्पष्ट दिखा कि ग्रामीण माताएँ अब अपने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और भविष्य के प्रति अधिक सजग हो रही हैं। कई माताओं ने संकल्प लिया कि वे गर्भावस्था की जांच समय पर कराएँगी, बच्चों का टीकाकरण नहीं छोड़ेंगी और परिवार नियोजन पर पति और परिवार से खुलकर चर्चा करेंगी।
नेमुगुरी में आयोजित यह मातृ पोषण संवाद कार्यक्रम स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य शिक्षा को सशक्त बनाने, माताओं को वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने और मातृत्व एवं बाल स्वास्थ्य, नियमित टीकाकरण तथा परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हुआ।