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ठाकुरगंज में CM ड्रीम प्रोजेक्ट धराशायी! पंचायतों में लगी सोलर लाइटें 3 दिन में खराब, ग्रामीण अंधेरे में… शिकायतों के बाद भी मरम्मत नहीं

प्रतिनिधि, सारस न्यूज़, गलगलिया।

ठाकुरगंज प्रखंड में मुख्यमंत्री ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत लगाई गई सोलर लाइटें अब ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन चुकी हैं। जिन लाइटों का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में रात के समय सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना था, वही लाइटें महज दो से चार दिनों में खराब होकर अंधेरा फैलाने लगी हैं।

इस महत्वाकांक्षी योजना की असलियत तब सामने आई जब लगभग हर पंचायत में सोलर लाइटों के फेल होने की शिकायतें आने लगीं। ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है, क्योंकि सरकार के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद ज़मीनी हकीकत बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है।

ठाकुरगंज प्रखंड के भातगांव ग्राम पंचायत के वार्ड संख्या 1 से 16 में दो माह पहले सोलर लाइटें लगाई गई थीं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि लाइटें सिर्फ तीन दिनों में ही खराब हो गईं। अंधेरे में डूबे ग्रामीण लगातार परेशानी झेल रहे हैं।

वार्ड सदस्य निर्मला देवी ने इसकी लिखित शिकायत मुखिया, पंचायत सचिव और प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी अजीत कुमार को दी है। ग्रामीणों ने भी कई बार शिकायतें कीं, लेकिन स्थानीय स्तर पर लगातार सिर्फ आश्वासन ही मिला। मरम्मत अब तक नहीं हुई।

लाइट बंद होने से लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। कई ग्रामीणों ने यह सवाल उठाया है कि अगर तीन दिन में ही लाइट खराब होनी थी, तो आखिर इतने बड़े पैमाने पर यह योजना क्यों लागू की गई? क्या टेक्निकल जांच और क्वालिटी चेक किए बिना ही ठेकेदारों पर भरोसा किया गया?

इस पूरे मामले पर प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि संबंधित टेक्नीशियन से बात कर ली गई है और जल्द ही लाइटें ठीक करवाई जाएंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना के तहत पांच साल की मेंटेनेंस गारंटी ठेकेदार को दी गई है, और यदि समय पर मरम्मत नहीं की गई, तो ठेकेदार पर कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हो रही, तो मेंटेनेंस की गारंटी सिर्फ काग़ज़ों में ही रह गई है।

सरकारी योजनाओं पर भारी खर्च होने के बावजूद अगर तकनीकी खामियों के चलते योजनाएँ फेल होती रहें, तो इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है। ठाकुरगंज की यह स्थिति बड़ी योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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