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जिले में हर धड़कन सुरक्षित करने का अभियान।

राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।

आरबीएसके के तहत दो बच्चे आईजीआईएमएस पटना के लिए रवाना

जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे इंतेरा बेगम और हसमत रज़ा को मिलेगी उच्च स्तरीय जांच व उपचार की सुविधा

किशनगंज जैसे सीमांत जिले में स्वास्थ्य सेवाएं हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही हैं। वर्षों तक जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए उच्चस्तरीय उपचार तक पहुंचना किसी दूर के सपने से कम नहीं था। आर्थिक तंगी, जागरूकता की कमी और बड़े चिकित्सा संस्थानों तक सहज पहुंच न होने के कारण कई परिवार अपने बच्चों की कमजोर होती धड़कनों को लाचारी से देखते रहते थे।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह तस्वीर तेजी से बदली है और इसके केंद्र में है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK), जिसने जिले में जन्मजात हृदय रोग के उपचार को अब सुलभ, सरल और पूरी तरह निःशुल्क बना दिया है। इसी कड़ी में जिले के लिए एक और उम्मीद भरी खबर सामने आई है। आरबीएसके की समय पर पहचान और त्वरित कार्रवाई से दो मासूम बच्चों—इंटेरा बेगम और हसमत रज़ा—को जीवन रक्षक चिकित्सा की ओर कदम बढ़ाने का अवसर मिला है।

दोनों बच्चों को आज सदर अस्पताल, किशनगंज से सुरक्षित रूप से आईजीआईएमएस, पटना के लिए रवाना किया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा इनके हृदय संबंधी विकारों की विस्तृत जांच की जाएगी और आवश्यक उपचार की दिशा तय की जाएगी।

जांच से लेकर इलाज तक सरकार की पूर्ण जिम्मेदारी

दोनों बच्चों की पहचान आरबीएसके टीम ने नियमित स्कूल एवं घर-आधारित स्क्रीनिंग के दौरान की थी। चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा इनके इलाज के लिए तत्काल रेफरल दिया गया।

उल्लेखनीय है कि जन्मजात हृदय रोग का उपचार अत्यंत महंगा और जटिल होता है, लेकिन सरकार इस पूरी प्रक्रिया का आर्थिक बोझ स्वयं वहन कर रही है। आईजीआईएमएस में विस्तृत जांच के बाद आवश्यकता अनुसार इन बच्चों को श्री सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल, अहमदाबाद या इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) में भी भेजा जा सकता है।

अब तक जिले के 31 बच्चे बाल हृदय योजना के माध्यम से सफलतापूर्वक उपचार प्राप्त कर चुके हैं, जिससे किशनगंज बिहार के उन अग्रणी जिलों में शामिल हो गया है जहां आरबीएसके की सफलता साफ़ दिखाई दे रही है।

“समय पर पहचान से बचाई जा सकती हैं अनगिनत जिंदगियां”

इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि जन्मजात हृदय रोग के लक्षण अक्सर सामान्य से प्रतीत होते हैं—जैसे थकान, दूध न पी पाना, सांस फूलना, वजन न बढ़ना आदि। लेकिन यदि इन संकेतों की समय पर पहचान हो जाए, तो बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि जिले में आरबीएसके की टीम बेहद सक्रिय है और लगातार ऐसे बच्चों की पहचान की जा रही है जिन्हें तत्काल इलाज की आवश्यकता है। इंटेरा और हसमत का इलाज पूरी तरह सरकारी खर्च पर किया जाएगा। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा देर से पहचान के कारण अपना भविष्य न खोए।

डॉ. चौधरी ने यह भी बताया कि जिले के सभी प्रखंडों में स्क्रीनिंग अभियान तेज किया गया है और अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के स्वास्थ्य में किसी भी असामान्यता को हल्के में न लें।

“जांच में देरी न करें, सरकार आपके साथ है”

जिलाधिकारी विशाल राज ने इस अवसर पर अभिभावकों को जागरूक करते हुए कहा कि जन्मजात हृदय रोग का समय पर उपचार तभी संभव है जब परिवार तुरंत जांच कराए। उन्होंने कहा कि सरकार हर तरह की सहायता दे रही है और किसी भी परिवार को आर्थिक कारणों से इलाज टालने की जरूरत नहीं है।

यदि बच्चे में सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक थकान, बार-बार बीमार पड़ना या त्वचा में नीलेपन जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत आरबीएसके टीम से संपर्क करें। बच्चों का जीवन अनमोल है, इसे जोखिम में न डालें।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि जिले में नियमित रूप से स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें अभिभावकों को अवश्य भाग लेना चाहिए।

आरबीएसके का प्रयास — वंचित इलाकों में जीवन और उम्मीद पहुंचाने का मिशन

जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनजिम ने बताया कि आरबीएसके ने पिछले कुछ महीनों में ठाकुरगंज, बहादुरगंज, पोठिया और कोचाधामन जैसे प्रखंडों में व्यापक स्क्रीनिंग अभियान चलाया है। इससे ऐसे बच्चों की पहचान बढ़ी है जिनके हृदय उपचार की अत्यंत आवश्यकता है।

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बच्चों की पहचान से लेकर अस्पताल रेफरल, इलाज, दवाइयां, जांच, यात्रा और रहने तक का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी अपने बच्चों को सर्वोच्च स्तरीय चिकित्सा उपलब्ध हो रही है।

इंटेरा बेगम और हसमत रज़ा का आज का यह रेफरल इस बात का प्रमाण है कि जिले में अब जन्मजात हृदय रोग किसी बच्चे के भविष्य के सामने दीवार नहीं बनेगा। यह उम्मीद, स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा का एक निरंतर चल रहा अभियान है, जो जिले के हर परिवार तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है।

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