सारस न्यूज़, वेब डेस्क।
बिहार दिवस के अवसर पर पूरे बिहार में उत्साह, सांस्कृतिक रंग और राज्य गौरव का माहौल देखने को मिला। हर वर्ष 22 मार्च को मनाया जाने वाला यह दिवस बिहार के गठन की ऐतिहासिक याद को समर्पित है। वर्ष 1912 में इसी दिन बिहार को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग कर स्वतंत्र प्रांत का दर्जा मिला था, जिसके बाद से यह तिथि राज्य की पहचान और प्रगति का प्रतीक बन गई।
राजधानी पटना सहित विभिन्न जिलों में सरकारी संस्थानों, विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संगठनों द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। कई स्थानों पर प्रभात फेरी, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, वाद-विवाद प्रतियोगिताएं और बिहार की लोकसंस्कृति पर आधारित कार्यक्रम हुए। बच्चों और युवाओं ने राज्य के इतिहास, साहित्य, कला और सामाजिक योगदान को लेकर अपनी प्रस्तुतियों से लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि बिहार केवल ऐतिहासिक धरोहरों का प्रदेश नहीं, बल्कि शिक्षा, कृषि, संस्कृति और मानव संसाधन की दृष्टि से देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं, आधारभूत संरचना, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए कार्यों को भी कार्यक्रमों में रेखांकित किया गया।
बिहार दिवस के मौके पर लोगों ने राज्य की समृद्ध विरासत—नालंदा महाविहार, बोधगया और वैशाली जैसी ऐतिहासिक धरोहरों—पर गर्व व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि बिहार की पहचान केवल अतीत से नहीं, बल्कि वर्तमान में बढ़ते आत्मविश्वास और भविष्य की संभावनाओं से भी जुड़ी है।
जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों ने लोकगीत, झिझिया, जट-जटिन और अन्य पारंपरिक प्रस्तुतियों से वातावरण को उत्सवमय बना दिया। कई स्थानों पर लोगों ने “हमारा बिहार, हमारा गौरव” संदेश के साथ राज्य की एकता और विकास का संकल्प दोहराया।
