सारस न्यूज़, वेब डेस्क।
रंगों के पर्व होली के ठीक पहले बिहार के बाजारों में नकली और मिलावटी खाद्य पदार्थों की भारी खेप फैलने का गंभीर मामला सामने आया है, जिससे खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस साल 10 टन से अधिक नकली खोवा, पनीर और घी सहित अन्य मिलावटी उत्पाद बाजार में घूम रहे हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, पूर्णिया इलाके से बस द्वारा मुजफ्फरपुर तक नकली और सिंथेटिक खोवा, पनीर एवं घी भेजे जा रहे हैं, जो केमिकल, एसेंस, अरारोट, मैदा और पाम ऑयल से तैयार किए गए हैं। ऐसे उत्पादों का उपयोग अनेक मिठाई और पकवान बनाने में किया जा रहा है।
विशेष रूप से मिलावटखोरों द्वारा तैयार किए गए घी में वनस्पति घी, रिफाइंड तेल, नारियल व तिल के तेल तथा पिघला हुआ बटर या उबले आलू-शकरकंद की पिसाई के बाद एसेंस मिलाकर नकली घी का निर्माण किया जा रहा है। इसी तरह मिलावटी बेसन से लड्डू बनाए जा रहे हैं, जो त्योहार के अवसर पर लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी सुदामा चौधरी ने बताया कि पिछले साल होली पर जिला प्रशासन ने मिलावट के खिलाफ तीन टीम गठित की थीं तथा कई छापेमारी भी की थीं। लेकिन इस बार होली तक केवल 10 दिन शेष होते हुए अब तक कोई टीम गठित नहीं हो पाई है, जिससे जांच और रोकथाम की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। अधिकारी के पास पर्याप्त मानव बल के अभाव के कारण छापेमारी अभियान शुरू नहीं हो पाया है।
एक चिंता का विषय यह भी है कि कुछ जगहों पर मोबिल जला कर उसे साफ करने के बाद उसमें एसेंस मिलाकर नकली सरसों तेल भी तैयार किया जा रहा है, जिसकी मार्केट में आपूर्ति की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले भी दो माह पहले अहियापुर के पटियासा में ऐसी नकली तेल बनाने वाली एक बड़ी फैक्ट्री पकड़ी गई थी।
इस परिस्थिति के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग को अब प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए शीघ्र टीम गठित करने और व्यापक जांच अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि त्योहार के दौरान लोगों को जाली एवं मिलावटी उत्पादों से बचाया जा सके।
