सारस न्यूज़, वेब डेस्क।
लोकसभा में आज निजी स्कूलों की मनमानी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया गया। सांसद ने कहा कि कई प्राइवेट स्कूल अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाल रहे हैं, क्योंकि वे किताबों और यूनिफॉर्म की खरीद के लिए केवल एक तय दुकानदार से सामान लेने का दबाव बनाते हैं। इससे अभिभावकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है और उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता।
संसद में इस विषय को उठाते हुए कहा गया कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। निजी स्कूलों द्वारा तय दुकानों से ही किताबें और ड्रेस खरीदने की बाध्यता के कारण सामान्य परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ती है।
इस दौरान समस्या के समाधान के लिए एक समर्पित शिकायत पोर्टल बनाने की मांग भी की गई, ताकि अभिभावक स्कूलों की ऐसी मनमानी के खिलाफ सीधे शिकायत दर्ज करा सकें। प्रस्तावित पोर्टल के माध्यम से संबंधित मामलों की निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई।
सांसद ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। इस मुद्दे पर सदन में कई सदस्यों ने सहमति जताई और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण की आवश्यकता बताई।
यह मुद्दा उठने के बाद अभिभावकों में उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी।
