सारस न्यूज़, वेब डेस्क।
नीट यूजी परीक्षा (NEET UG) दोबारा नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा नीट परीक्षा कराए जाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है, सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) की परीक्षा दुबारा आयोजित नहीं की जाएगी। यह निर्णय उन आरोपों के संदर्भ में लिया गया है जिनमें कहा गया था कि NEET-UG परीक्षा का पेपर पटना और हजारीबाग के दो केंद्रों पर लीक हुआ था।
कोर्ट ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि NEET-UG परीक्षा में कोई व्यापक या सिस्टमेटिक गड़बड़ी नहीं हुई है। इसलिए, पूरी परीक्षा को दुबारा आयोजित करने की आवश्यकता नहीं है। यह कदम उन लाखों छात्रों के लिए राहत की बात है जिन्होंने कड़ी मेहनत से इस परीक्षा की तैयारी की थी।
NTA की मॉनिटरिंग और सुधार की आवश्यकता
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की मॉनिटरिंग के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने का आदेश दिया है। इस कमेटी को NEET परीक्षा के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOP) तैयार करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, कमेटी को साइबर सिक्योरिटी में पाई गई ख़ामियों की पहचान करने का भी निर्देश दिया गया है।
यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे। एक्सपर्ट कमेटी से 30 सितंबर तक इस संदर्भ में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
परीक्षा की विश्वसनीयता और छात्र हित
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल कुछ केंद्रों पर हुई गड़बड़ी के कारण पूरे देश में परीक्षा दुबारा आयोजित करना उचित नहीं है। इस प्रकार का निर्णय न केवल छात्रों के समय और संसाधनों की बचत करता है, बल्कि परीक्षा की विश्वसनीयता को भी बनाए रखता है।
इसके अलावा, एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों और SOPs के लागू होने से भविष्य में परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता में सुधार होगा। साइबर सिक्योरिटी में ख़ामियों की पहचान और उन्हें दूर करने के लिए उठाए गए कदम परीक्षा प्रणाली को और भी मजबूत और विश्वसनीय बनाएंगे।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय न केवल न्यायसंगत है, बल्कि छात्रों के हित में भी है। परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए उठाए गए कदम सराहनीय हैं। हमें उम्मीद है कि NTA और एक्सपर्ट कमेटी मिलकर एक ऐसा सिस्टम तैयार करेंगे जो भविष्य में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने में सक्षम हो।
