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कार्तिक पूर्णिमा तिथि के अवसर पर पुलिस ने विधि-व्यवस्था संधारण के संबंध में जारी किया दिशा निर्देश:- एसपी कुमार आशीष

शशि कोशी रोक्का, सारस न्यूज़, किशनगंज।

किशनगंज पुलिस अधीक्षक कुमार आशीष ने जानकारी देते हुए कहा की आगामी 18 एवं 19 को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर नदियों एवं तालाबों में स्नान-दान की परंपरा है, विशेषकर गंगा, गंडक, सोन, फल्गु आदि नदियों के तट पर श्रद्धालु काफी संख्या में स्नान एवं पूजा पाठ करते हैं। इस अवसर पर अधिकांश स्थानों पर एक दिन पूर्व ही से ही श्रद्धालुओं की काफी भीड़ हो जाएगी। नदियों के घाटों के किनारे मेला तथा बाजार लगता है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर पूर्णियाँ जिला में कोशी, सौरा नदी, कटिहार जिला में कोशी, गंगा, महानंदा आदि, किशनगंज जिला में महानंदा आदि नदियों एवं उसके सहायक नदियों में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ एकत्रित होने की दृष्टिकोण से सतर्कता अपेक्षित बताया गया है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर विधि-व्यवस्था संधारण हेतु निम्नांकित बिन्दुओं पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक बताया गया है
नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ इकट्ठा होती है। अतःवहाँ गोताखोरों एवं बचाव दल की प्रतिनियुक्ति की जाएगी।
इन दिनों वातावरण में घना कुहासा छाया रहता है। ऐसे में नदियों के घाटों पर सुरक्षित जलस्तर तक रस्सी का घेरा बनाया जाएगा ताकि श्रद्धालु निर्धारित घेरे से बाहर न जाए। कहीं-कहीं छठ घाटों तक सुविधापूर्वक पहुंचने के दृष्टिकोण से पीपा पुल या अस्थायी पुलों का निर्माण किया जाता है। जो ज्यादा भीड़ -भाड़ होने की स्थिति से ऐसे स्थल सुदृढ़ बने होने चाहिए। कभी-कभी प्रमुख पवित्र नदियों अनुमान से अधिक भीड़ होने पर यातायात एवं पार्किंग की समस्या से निपटने के लिए पूर्व से व्यवस्था की जानी चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर निकटस्थ घाटों के निकट दुकानो, बाजारों तथा मेला आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाऐं एवं बच्चे की भीड़ एकत्रित होते हैं। अतः विधि-व्यवस्था संधारण हेतु पूर्व से प्रबंधन आवश्यक है, जिससे भगदड़ की आशंका न रहे। मजबूत बैरिकेडिंग एवं मजबूत रस्सों की मदद से आवागमन को नियंत्रित रखा जाना चाहिए। जिन घाटों पर भीड़ /श्रद्धालुओं का अत्यधिक दबाव रहता है, उन घाटों को चिन्हित कर घाट के प्रवेश निकास तथा आवागमन के मार्गों की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए। भीड़ में शरारती तथा असामाजिक तत्वों द्वारा महिलाओं के साथ की जानी वाली छेड़खानी जैसी घटनाओं से निपटने हेतु पर्याप्त संख्या में बल /महिला पुलिसकर्मी /पुलिस पदाधिकारी तथा दण्डाधिकारी की प्रतिनियुक्ति आवश्यक है। आपात स्थिति से निपटने हेतु घाटों के निकट चिकित्सा शिविर / एम्बुलेंस की व्यवस्था की जानी चाहिए। महत्वपूर्ण घाटों के निकट क्विक रिस्पॉन्स टीम का गठन होना चाहिए, ताकि विधि – व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर इसका समुचित उपयोग किया जा सके, अतः उक्त परिप्रेक्ष्य में आप सभी को निर्देश दिया जाता है कि अपने -अपने क्षेत्रान्तर्गत प्रवाहित होने वाली नदियों के घाटों के अतिरिक्त संवेदनशील स्थानों की पहचान कर सुरक्षामूलक आवश्यक कार्रवाई ससमय सुनिश्चित करें।

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