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किचक वध स्थल पर भव्य मेला की तैयारी अंतिम चरण में, अज्ञातवास के दौरान पांडव पुत्र भीम ने कीचक का किया था वध।

विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया।

किशनगंज जिला के भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र गलगलिया निम्बूगुड़ी से महज तीन किमी पर स्थित नेपाल के झापा जिला महेशपुर गाँव में हर वर्ष की भांति इस बार भी ऐतिहासिक कीचक वध मेला का आयोजन कल रविवार को किया गया है। हालांकि आयोजन समिति ने पिछले दो वर्षों में कोरोना महामारी के चलते मेला नहीं लगाया था, लेकिन समिति इस वर्ष भव्य मेला आयोजित करने की तैयारी कर रही है। सुरक्षा समिति के अध्यक्ष दिल बहादुर थेबे ने बताया कि भद्रपुर नगर पालिका वार्ड नं- 2 व 3 स्थित किचक वध धार्मिक स्थल पर एक दिवसीय मेला लगाने की तैयारी अंतिम चरण में है।

धार्मिक मान्यता है कि माघे शुक्ल पूर्णिमा के दिन किचक वध के ऐतिहासिक धार्मिक तालाब में अनायास ही पानी आ जाता है, इसलिए उस तालाब में स्नान करने से व्रती श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। भक्तों द्वारा तालाब में पैसे फेंकने, पान और पान के पत्तों से प्रार्थना करने और कबूतर उड़ाने की धार्मिक परंपरा है। स्थानीय लोगों के अनुसार अज्ञातवाश के दौरान भीमसेन ने पांच पांडवों की रानी द्रौपदी के युवावस्था और रूप पर बुरी नजर रखने वाले सेनापति कीचक को मार डाला था।

उसी कहानी के आधार पर इस स्थान का नाम किचक वध रखा गया और बाद में इसे ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन स्थल का नाम दिया गया। भक्त उस मूर्ति की भी पूजा करते हैं जहां भीमसेन ने कीचक का वध किया था। इस मेले में लाखों की संख्या में भारत के कई राज्य बिहार, बंगाल, आसाम, भूटान व सिक्किम तथा नेपाल के झापा,मोरंग,सप्तरी जिलों से श्रद्धालु विभिन्न मार्गों से नेपाल डोन्जो नदी के समीप उक्त स्थान पर भारी भीड़ के साथ माथा टेकने पहुंचते हैं।

मेले के दिन होती है स्थानीय अवकाश

किचक वध धार्मिक मेला के अवसर पर नेपाल के भद्रपुर नगर पालिका व कचनकवल ग्रामीण नगर पालिका ने कल रविवार को स्थानीय अवकाश देने का निर्णय लिया है।  नगर पालिका के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी टेक कुमार रेग्मी ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी करते हुए किचक वध मेले के दिन स्थानीय अवकाश देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम कार्यकारिणी के तहत आने वाली सभी एजेंसियों और शिक्षण संस्थानों को छुट्टी दे दी गई है। ग्रामीण नगरपालिका के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी हीराकुमारी यादव ने बताया कि कचनकवल ग्रामीण नगरपालिका ने भी रविवार को स्थानीय अवकाश देने का फैसला किया है।

किचक बध स्थल के उत्खनन में मिले अवशेष

पाडवों ने बिहार एवं नेपाल की सीमा पर बसे ठाकुरगंज और इससे सटे नेपाल के महेशपुर में अज्ञात वाश बिताया था। यहाँ के विभिन्न जगहों पर मोजूद अवशेष इस बात की गवाही देते नजर आते हैं कि इस इलाके का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है।समय के साथ सब कुछ बदल जाने के बाद भी ठाकुरगंज, महेशपुर में पौराणिक अवशेष आज भी सुरक्षित है। कीचक वध स्थल के आंशिक क्षेत्र में नेपाल पुरातत्व विभाग द्वारा अब तक यहाँ कई चरणों में उत्खनन हो चुका है जिसमें कई अवशेष मिले हैं।

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