विजय गुप्ता, सारस न्यूज, गलगलिया।
सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और अवैध कब्जा हटाने को लेकर पथ निर्माण विभाग के अधिकारी गंभीर नहीं दिख रहे हैं। शिकायतों को कागजों पर ही निस्तारित कर कोरम पूरा करने का काम कर रहे हैं। मामला किशनगंज जिले के गलगलिया थाना क्षेत्र अन्तर्गत बसस्टैंड मोड़ का है जहाँ जगरनाथ महासेठ के द्वारा अभी हाल ही में पीडब्लूडी की करीब 15 फिट जमीन पर अवैध कब्जा कर पक्की दीवार देकर दुकान बना लिया गया है। इस अतिक्रमण से नेपाल व बंगाल जाने वाले वाहनों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। वहीं इस मोड़ के पास ही अंतर्राज्यीय बस पड़ाव है और जाम की समस्या से बसों के यात्रियों को अक्सर विलंब होती रहती है। वहीं इस समस्या के निराकरण के लिए स्थानीय नागरिकों ने 20 दिसंबर 2022 को पथ निर्माण विभाग के सहायक अभियंता ठाकुरगंज को लिखित शिकायत की थी और इस परेशानी से पथ प्रमंडल किशनगंज के कार्यपालक अभियंता को भी अवगत कराते हुए अतिक्रमण हटाने की गुहार लगाई गई थी पर तीन माह से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी शिकायत के विरुद्ध पथ निर्माण विभाग के पदाधिकारियों द्वारा अतिक्रमण मुक्त नहीं कराई गई। हालांकि शिकायत के बाद विभाग के अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुँचकर जाँच की गई है जिसमें सरकारी जमीन को अतिक्रमण कर दुकान बनाने की बात सामने आई है। मगर विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इसको लेकर जरा भी गंभीर नहीं हैं।
मांगी गई सूचना पर विभागीय पदाधिकारी का नहीं हुआ असर:-
गलगलिया बस स्टैंड मोड़ पर किये गए अतिक्रमण की शिकायत पर अब तक कार्रवाई नहीं करने तथा अवैध अतिक्रमण को मुक्त न करने को ले सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत 02 मार्च 2023 को लोक सूचना अधिकारी सह कार्यपालक अभियंता पथ प्रमंडल, किशनगंज से सूचना की माँग कर आवेदक द्वारा पूछा गया था कि अतिक्रमण मुक्त करने को लेकर दिए गए आवेदन पर विभाग के पदाधिकारी द्वारा अब तक क्या कार्रवाई की गई ? यदि अब तक कोई कार्रवाई नही की गई तो क्या कारण है, और इसके लिए कौन-कौन अधिकारी/पदाधिकारी जिम्मेदार हैं ? एवं अतिक्रमण मुक्त कराने में लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारी पर क्या विभागीय कार्रवाई हो सकती है ? मगर इसका भी कोई असर विभागीय पदाधिकारी पर नहीं हुआ और नियमतः 30 दिन बीत जाने के बाद भी सूचना अप्राप्त रहा। जिसके बाद आवेदक द्वारा सूचना उपलब्ध कराने हेतु प्रथम अपीलीय प्राधिकारी सह अधीक्षण अभियंता, पथ अंचल पूर्णियाँ के यहाँ अपील दायर की गई है।
फिलहाल उक्त अतिक्रमण स्थल को खाली नहीं होने से स्थानीय लोगों के साथ साथ पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल एवं पड़ोसी देश नेपाल के राहगीरों को आवाजाही में भारी परेशानी उठानी पड़ रही हैं।
