जिले ने मिशन इंद्रधनुष-5.0 अभियान के दूसरे चरण में भी मारी बाजी- इस बार भी लक्ष्य से अधिक किया गया टीकाकरण- पहले चरण में भी जिले का बेहतर रहा है प्रदर्शन।
जिले में 12 तरह की बीमारियों से बचाव को लेकर मिशन इंद्रधनुष-5.0 अभियान के दूसरे चरण में भी जिले ने बाजी मारी है। 09 से 14 अक्टूबर तक चले अभियान के दौरान भी लक्ष्य से अधिक बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया है। शनिवार को खत्म हुए दूसरे अभियान के दौरान 10,414 बच्चों का टीकाकरण किया गया जबकि लक्ष्य 9,692 का था। इसी तरह 2,971 गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया, जबकि लक्ष्य 1976 का था। इसे लेकर जिलेभर में 861 केंद्र बनाए गए थे। सफलता की दर 110 प्रतिशत से भी अधिक रही। विदित हो कि पहले चक्र का मिशन इंद्रधनुष अभियान भी जिले में सफल रहा है। अभियान के दौरान जीरो से 2 वर्ष के टीकाकरण में छूटे हुए बच्चों के लक्ष्य 9,186 के सापेक्ष 9,760 बच्चों का टीकाकरण किया गया, जो 106 प्रतिशत है। वहीं टीकाकरण में छूटी हुई गर्भवती महिलाओं के लक्ष्य 2,157 के सापेक्ष 3,360 गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया, जो 156 प्रतिशत है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेन्द्र कुमार ने बताया कि मिशन इंद्रधनुष-5.0 अभियान के दोनों ही चरण में सफलता की दर 100 प्रतिशत से अधिक रही। इस उपलब्धि के पीछे सभी स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत है।
सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलता है बढ़ावाः
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. कुमार ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे न केवल गंभीर बीमारी से बचाव होता बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलता है। बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है। इसलिए जिले के सभी लाभार्थियों की सूची बनाकर टीकाकरण किया गया। अभी दूसरा चरण का अभियान भले ही खत्म हो गया है, लेकिन आंगनबांड़ी केंद्रों और अस्पतालों में टीकाकरण जारी रहेगा। इसलिए अभी भी जिनके घरों में बच्चे और गर्भवती महिलाएं छूट गए हों, वह जरूर टीकाकरण करवा लें। उन्होंने बताया कि नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर सप्ताह बुधवार और शुक्रवार को होता है। जरूरत पड़ने पर अन्य दिन भी टीकाकरण किया जाता है। इसके माध्यम से 2 वर्ष तक के बच्चों को टीके लगाए जाते हैं। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण होने से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलता है। अभियान का तीसरा व अंतिम चक्र 27 नवम्बर से 02 दिसंबर के बीच होगा। अभियान के क्रम में नियमित टीकाकरण का आच्छादन अधिक बेहतर व प्रभावी बनाने को लेकर हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
अभियान के सफल क्रियान्वयन का हो रहा प्रयास:
सिविल सर्जन डॉ कौशल किशोर ने बताया कि विस्तृत रणनीति के तहत मिशन इंद्रधनुष 5.0 अभियान की सफलता सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान के क्रम में दो साल से कम उम्र के सभी बच्चे व गर्भवती महिलाएं टीकाकरण से वंचित न रहें इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसे लेकर सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में अभियान की सफलता विभाग की प्राथमिकताओं में शुमार है। वैसे इलाके जहां नियमित टीकाकरण की पहुंच सीमित है, ऐसे चिह्नित इलाकों में मिशन इन्द्रधनुष अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विशेष पहल किए जाने की जानकारी उन्होंने दी।
विभिन्न रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी:
सिविल सर्जन डॉ किशोर ने बताया कि नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिशन इन्द्रधनुष कार्यक्रम, टीकाकरण, गर्भवती महिला व दो वर्ष तक के बच्चों को विभिन्न बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने के लिहाज से जरूरी है। मिशन इंद्रधनुष अभियान के क्रम में जिले के सभी सात प्रखंडों में टीकाकरण को लेकर विशेष इंतजाम किए गए। दो साल तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी मिजिल्स, विटामिन-ए, डीपीटी बूस्टर डोज व बूस्टर ओपीवी के टीके लगाए गए। वहीं गर्भवती महिलाओं को अभियान के क्रम में टेटनेस, डिप्थेरिया का टीका लगाया गया।
उन्होंने बताया कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत टीकाकरण से वंचित दो वर्ष तक के सभी बच्चों व सभी गर्भवती महिलाओं तक टीकाकरण की पहुंच सुनिश्चित कराना मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है।
राहुल कुमार, सारस न्यूज, किशनगंज।
जिले में 12 तरह की बीमारियों से बचाव को लेकर मिशन इंद्रधनुष-5.0 अभियान के दूसरे चरण में भी जिले ने बाजी मारी है। 09 से 14 अक्टूबर तक चले अभियान के दौरान भी लक्ष्य से अधिक बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया है। शनिवार को खत्म हुए दूसरे अभियान के दौरान 10,414 बच्चों का टीकाकरण किया गया जबकि लक्ष्य 9,692 का था। इसी तरह 2,971 गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया, जबकि लक्ष्य 1976 का था। इसे लेकर जिलेभर में 861 केंद्र बनाए गए थे। सफलता की दर 110 प्रतिशत से भी अधिक रही। विदित हो कि पहले चक्र का मिशन इंद्रधनुष अभियान भी जिले में सफल रहा है। अभियान के दौरान जीरो से 2 वर्ष के टीकाकरण में छूटे हुए बच्चों के लक्ष्य 9,186 के सापेक्ष 9,760 बच्चों का टीकाकरण किया गया, जो 106 प्रतिशत है। वहीं टीकाकरण में छूटी हुई गर्भवती महिलाओं के लक्ष्य 2,157 के सापेक्ष 3,360 गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया गया, जो 156 प्रतिशत है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेन्द्र कुमार ने बताया कि मिशन इंद्रधनुष-5.0 अभियान के दोनों ही चरण में सफलता की दर 100 प्रतिशत से अधिक रही। इस उपलब्धि के पीछे सभी स्वास्थ्यकर्मियों की मेहनत है।
सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलता है बढ़ावाः
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. कुमार ने बताया कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को गंभीर बीमारी से बचाव के लिए नियमित टीकाकरण जरूरी है। इससे न केवल गंभीर बीमारी से बचाव होता बल्कि सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा भी मिलता है। बच्चों का शारीरिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है। इसलिए जिले के सभी लाभार्थियों की सूची बनाकर टीकाकरण किया गया। अभी दूसरा चरण का अभियान भले ही खत्म हो गया है, लेकिन आंगनबांड़ी केंद्रों और अस्पतालों में टीकाकरण जारी रहेगा। इसलिए अभी भी जिनके घरों में बच्चे और गर्भवती महिलाएं छूट गए हों, वह जरूर टीकाकरण करवा लें। उन्होंने बताया कि नियमित टीकाकरण का आयोजन जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हर सप्ताह बुधवार और शुक्रवार को होता है। जरूरत पड़ने पर अन्य दिन भी टीकाकरण किया जाता है। इसके माध्यम से 2 वर्ष तक के बच्चों को टीके लगाए जाते हैं। नियमित टीकाकरण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को कई गंभीर बीमारियों से बचाव करता है। साथ ही प्रसव के दौरान जटिलताओं से सामना करने की भी संभावना नहीं के बराबर रहती है। गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण होने से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिलता है। अभियान का तीसरा व अंतिम चक्र 27 नवम्बर से 02 दिसंबर के बीच होगा। अभियान के क्रम में नियमित टीकाकरण का आच्छादन अधिक बेहतर व प्रभावी बनाने को लेकर हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
अभियान के सफल क्रियान्वयन का हो रहा प्रयास:
सिविल सर्जन डॉ कौशल किशोर ने बताया कि विस्तृत रणनीति के तहत मिशन इंद्रधनुष 5.0 अभियान की सफलता सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान के क्रम में दो साल से कम उम्र के सभी बच्चे व गर्भवती महिलाएं टीकाकरण से वंचित न रहें इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसे लेकर सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में अभियान की सफलता विभाग की प्राथमिकताओं में शुमार है। वैसे इलाके जहां नियमित टीकाकरण की पहुंच सीमित है, ऐसे चिह्नित इलाकों में मिशन इन्द्रधनुष अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विशेष पहल किए जाने की जानकारी उन्होंने दी।
विभिन्न रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी:
सिविल सर्जन डॉ किशोर ने बताया कि नियमित टीकाकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिशन इन्द्रधनुष कार्यक्रम, टीकाकरण, गर्भवती महिला व दो वर्ष तक के बच्चों को विभिन्न बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करने के लिहाज से जरूरी है। मिशन इंद्रधनुष अभियान के क्रम में जिले के सभी सात प्रखंडों में टीकाकरण को लेकर विशेष इंतजाम किए गए। दो साल तक के बच्चों को बीसीजी, ओपीवी, पेंटावेलेंट, रोटा वैक्सीन, आईपीवी मिजिल्स, विटामिन-ए, डीपीटी बूस्टर डोज व बूस्टर ओपीवी के टीके लगाए गए। वहीं गर्भवती महिलाओं को अभियान के क्रम में टेटनेस, डिप्थेरिया का टीका लगाया गया।
उन्होंने बताया कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत टीकाकरण से वंचित दो वर्ष तक के सभी बच्चों व सभी गर्भवती महिलाओं तक टीकाकरण की पहुंच सुनिश्चित कराना मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है।