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ड्रेगन फ्रुट की खेती पर दिया गया पांच दिवसीय प्रशिक्षण का समापन। कटिहार जिला के 45 किसानों को दिया गया प्रशिक्षण

बीरबल महतो, सारस न्यूज़, किशनगंज।

कृषि विज्ञान केंद्र किशनगंज में कटिहार जिले के किसानों को ड्रेगन फ्रुट की खेती पर दिया जा रहा पांच दिवसीय प्रशिक्षण का शुक्रवार को समापन हो गया। कृषि विज्ञान केंद्र में चल रहे प्रशिक्षण के बाद 45 प्रशिक्षुओं को प्रमाण पत्र भी दिया गया। कटिहार आत्मा के द्वारा कटिहार जिले के विभिन्न प्रखंडों के किसानों को प्रशिक्षण के लिए किशनगंज स्थित कृषि विज्ञान केंद्र भेजा गया था। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कटिहार जिले में ड्रेगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देना है। इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण में केंद्र के वैज्ञानिकों के द्वारा ड्रेगन फ्रूट की खेती के सभी पहलुओं जैसे शस्य क्रियाएं, पौधे की स्थापना, पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई एवं जल प्रबंधन, औषधीय महत्व, पौधशाला की तैयारी एवं देखभाल, आय व्यय एवं विपणन इत्यादि विषयों पर विस्तार से चर्चा की गयी। केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान ई. मनोज कुमार राय ने बताया कि इसकी खेती में शुरुआत में खर्च अधिक लगता है लेकिन छोटे किसान भी 50-100 पौधों से खेती शुरु कर चरणबद्ध तरीके से इसका विस्तार कर सकते हैं। क्योंकि दूसरे वर्ष में वह अपने ही बाग से पौधे निकालकर अपनी खेती का रकवा बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिस तरह लोगों का रुझान इस फल की ओर बढ़ा है इसके बाजार की समस्या अभी नहीं है। वर्ष 2014 में किशनगंज जिले के ठाकुरगंज के प्रगतिशील किसान नागराज नखत के द्वारा शुरु हुई खेती ने प्रदेश के अन्य जिलों के किसानों का ध्यान आकृष्ट किया है। यही कारण है कि इसकी खेती के गुर सीखने अन्य जिलों के किसान भी कृषि विज्ञान केंद्र किशनगंज आ रहे हैं। इससे पहले भी मुंगेर जिला के 18 किसान यहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक व मुख्य प्रशिक्षक डा. हेमंत कुमार सिंह ने बताया कि राज्य के अन्य जिलों के किसान दूरभाष पर संपर्क कर इसकी खेती की जानकारी प्राप्त करते रहते हैं। इन्होंने इसकी खेती की सभी पहलुओं की विस्तृत जानकारी किसानों को दी। किसानों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब भी दिया। प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान सभी कृषकों ने इसकी खेती शुरु करने की बात कही। ड्रेगन फ्रूट की खेती के साथ-साथ किसानों को अनानास की खेती के बारे में भी जानकारी दी गयी। प्रशिक्षण के अंतिम दिन सभी किसानों को डा. कलाम कृषि महाविद्यालय अर्राबाड़ी का भ्रमण भी कराया गया। जहां ये अनानास की खेती, रेशम कीट पालन इकाई का अवलोकन किया। साथ ही कॉलेज के आस पास हो रहे चाय की खेती की भी जानकारी किसानों ने ली। मौके पर वैज्ञानिक डा. नीरज प्रकाश, नंदिनी राय, पुनीता कुमारी, राकेश मंडल, आत्मा कटिहार के इंद्रजीत यादव आदि मौजूद थे।

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