किशनगंज जिले में टीबी (क्षय रोग) को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे 100 दिवसीय विशेष अभियान को नई गति मिली है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिन्हित हाई रिस्क गांवों में सघन स्क्रीनिंग, जांच और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक संभावित मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा जा सके।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर तेजी से फैल सकती है। इसलिए अभियान का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध मरीजों की जल्द पहचान करना, उन्हें जांच की सुविधा उपलब्ध कराना और उपचार की पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित करना है, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को रोका जा सके।
हाई रिस्क गांवों पर विशेष फोकस जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि निक्षय पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर जिले के कई गांवों को हाई रिस्क क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। इन गांवों में स्वास्थ्य टीम लगातार घर-घर जाकर सर्वे कर रही है और टीबी के लक्षण वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल मरीजों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि उन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखना भी है जहां संक्रमण की संभावना अधिक है।
पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से गांव में ही जांच सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि अभियान के दौरान पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जांच की प्रक्रिया काफी आसान हो गई है। अब स्वास्थ्य टीम सीधे गांवों में पहुंचकर मौके पर ही एक्स-रे जांच कर रही है। इससे मरीजों को अस्पताल जाने की आवश्यकता कम हो रही है और अधिक लोगों की जांच संभव हो पा रही है।
स्क्रीनिंग और आधुनिक तकनीक से मिल रही मदद जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि पोर्टेबल एक्स-रे और लक्षण आधारित स्क्रीनिंग इस अभियान की प्रमुख कड़ी हैं। इनके माध्यम से संदिग्ध मरीजों की तुरंत पहचान कर उन्हें आगे की जांच और उपचार से जोड़ा जा रहा है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से जांच की गति और सटीकता दोनों में सुधार हुआ है, जिससे अभियान को मजबूती मिल रही है।
निःशुल्क उपचार और पोषण सहायता स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जिन मरीजों में टीबी की पुष्टि होती है, उन्हें निःशुल्क दवा उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत आर्थिक सहायता भी दी जाती है, ताकि मरीजों को पोषण मिल सके और वे जल्दी स्वस्थ हो सकें। स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से मरीजों की निगरानी करते हुए दवा का पूरा कोर्स सुनिश्चित कर रहे हैं।
जागरूकता कार्यक्रमों पर भी जोर अभियान के अंतर्गत लोगों को टीबी के लक्षण, जांच और उपचार के प्रति जागरूक करने के लिए संवाद कार्यक्रम और जनजागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में स्वास्थ्य अधिकारी और सहयोगी संस्थाएं लोगों को टीबी से बचाव और समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
सामूहिक प्रयास से ही संभव होगा टीबी मुक्त भारत स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। आम जनता, स्वास्थ्यकर्मी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
जिले में चल रहा यह 100 दिवसीय विशेष अभियान स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाने का भी काम कर रहा है। प्रशासन का मानना है कि सामूहिक प्रयास और सक्रिय भागीदारी से टीबी मुक्त भारत का सपना जरूर साकार होगा।
सारस न्यूज़, किशनगंज।
किशनगंज जिले में टीबी (क्षय रोग) को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे 100 दिवसीय विशेष अभियान को नई गति मिली है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिन्हित हाई रिस्क गांवों में सघन स्क्रीनिंग, जांच और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक संभावित मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा जा सके।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर तेजी से फैल सकती है। इसलिए अभियान का मुख्य उद्देश्य संदिग्ध मरीजों की जल्द पहचान करना, उन्हें जांच की सुविधा उपलब्ध कराना और उपचार की पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित करना है, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को रोका जा सके।
हाई रिस्क गांवों पर विशेष फोकस जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि निक्षय पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर जिले के कई गांवों को हाई रिस्क क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। इन गांवों में स्वास्थ्य टीम लगातार घर-घर जाकर सर्वे कर रही है और टीबी के लक्षण वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल मरीजों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि उन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखना भी है जहां संक्रमण की संभावना अधिक है।
पोर्टेबल एक्स-रे मशीन से गांव में ही जांच सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि अभियान के दौरान पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का उपयोग किया जा रहा है, जिससे जांच की प्रक्रिया काफी आसान हो गई है। अब स्वास्थ्य टीम सीधे गांवों में पहुंचकर मौके पर ही एक्स-रे जांच कर रही है। इससे मरीजों को अस्पताल जाने की आवश्यकता कम हो रही है और अधिक लोगों की जांच संभव हो पा रही है।
स्क्रीनिंग और आधुनिक तकनीक से मिल रही मदद जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि पोर्टेबल एक्स-रे और लक्षण आधारित स्क्रीनिंग इस अभियान की प्रमुख कड़ी हैं। इनके माध्यम से संदिग्ध मरीजों की तुरंत पहचान कर उन्हें आगे की जांच और उपचार से जोड़ा जा रहा है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से जांच की गति और सटीकता दोनों में सुधार हुआ है, जिससे अभियान को मजबूती मिल रही है।
निःशुल्क उपचार और पोषण सहायता स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि जिन मरीजों में टीबी की पुष्टि होती है, उन्हें निःशुल्क दवा उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत आर्थिक सहायता भी दी जाती है, ताकि मरीजों को पोषण मिल सके और वे जल्दी स्वस्थ हो सकें। स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से मरीजों की निगरानी करते हुए दवा का पूरा कोर्स सुनिश्चित कर रहे हैं।
जागरूकता कार्यक्रमों पर भी जोर अभियान के अंतर्गत लोगों को टीबी के लक्षण, जांच और उपचार के प्रति जागरूक करने के लिए संवाद कार्यक्रम और जनजागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में स्वास्थ्य अधिकारी और सहयोगी संस्थाएं लोगों को टीबी से बचाव और समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
सामूहिक प्रयास से ही संभव होगा टीबी मुक्त भारत स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। आम जनता, स्वास्थ्यकर्मी, जनप्रतिनिधि और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
जिले में चल रहा यह 100 दिवसीय विशेष अभियान स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाने का भी काम कर रहा है। प्रशासन का मानना है कि सामूहिक प्रयास और सक्रिय भागीदारी से टीबी मुक्त भारत का सपना जरूर साकार होगा।