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गर्भावस्था में एनीमिया बना मातृ-शिशु स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा, समय पर पहचान और आशा दीदियों की जागरूकता से ही संभव है सुरक्षित मातृत्व।

राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।

गर्भावस्था के दौरान एनीमिया केवल खून की कमी नहीं, बल्कि माँ और गर्भस्थ शिशु दोनों के जीवन के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है। हीमोग्लोबिन की कमी से गर्भवती महिलाओं में अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, सांस लेने में कठिनाई, समय से पूर्व प्रसव, अत्यधिक रक्तस्राव तथा कई मामलों में मातृ मृत्यु तक का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में गर्भावस्था के प्रारंभिक चरण से ही एनीमिया की पहचान और उसका समय पर उपचार अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं तक सही समय पर सही जानकारी पहुँचाने में आशा दीदियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आती है। घर-घर जाकर जागरूकता फैलाना, जांच के लिए प्रेरित करना और उपचार से जोड़ना एनीमिया मुक्त भारत अभियान की सफलता की नींव है।

एनीमिया मुक्त भारत अभियान को मिला बल

मातृत्व एनीमिया के प्रभावी प्रबंधन और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किशनगंज जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत निरंतर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिले के स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ आशा दिवस के अवसर पर ठाकुरगंज प्रखंड में आशा दीदियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान डीसीएम सुमन सिन्हा ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के खून में 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम हीमोग्लोबिन होना एनीमिया की श्रेणी में आता है और इसकी गंभीरता के अनुसार उपचार किया जाना चाहिए। गंभीर और अतिगंभीर एनीमिया की स्थिति में प्रसव के दौरान माँ और शिशु दोनों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

आशा दिवस पर ठाकुरगंज में आशा दीदियों को विशेष प्रशिक्षण

आशा दिवस के अवसर पर किशनगंज जिले के ठाकुरगंज प्रखंड में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में डीसीएम सुमन सिन्हा द्वारा आशा दीदियों को गर्भावस्था में एनीमिया के खतरे, लक्षण एवं बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।

उन्होंने बताया कि आशा दीदियाँ घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं को समय पर जांच, आयरन-फोलिक एसिड के नियमित सेवन, संतुलित आहार तथा आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य केंद्र में रेफरल के लिए प्रेरित करें। समुदाय स्तर पर व्यवहार परिवर्तन लाने में आशा दीदियों की सक्रिय भूमिका को अत्यंत आवश्यक बताया गया।

नियमित जांच और समय पर उपचार से ही सुरक्षित मातृत्व संभव : सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि जिले में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। सभी स्वास्थ्य कर्मियों और आशा दीदियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक गर्भवती महिला की प्रसव-पूर्व जांच के दौरान हीमोग्लोबिन की स्थिति की पहचान अवश्य हो। एनीमिया से ग्रसित महिलाओं को समय पर आईवी आयरन सुक्रोज एवं आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराकर मातृ-शिशु स्वास्थ्य को सुरक्षित किया जा सकता है।

आशा दीदियाँ एनीमिया मुक्त भारत अभियान की रीढ़ : जिला पदाधिकारी

जिला पदाधिकारी विशाल राज ने कहा कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने में आशा दीदियों की भूमिका सबसे अहम है। वे समुदाय और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच सेतु का कार्य करती हैं। जागरूकता, नियमित जांच और समय पर उपचार के माध्यम से किशनगंज जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रशासन इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग के हर प्रयास को पूर्ण समर्थन दे रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि निरंतर प्रशिक्षण, फील्ड-स्तरीय निगरानी और आशा दीदियों की सक्रिय भागीदारी से किशनगंज जिले में एनीमिया की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में ठोस प्रयास जारी हैं, ताकि प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित और स्वस्थ मातृत्व मिल सके।

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