राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
सरस्वती विद्या मंदिर में वंदना सह उद्घाटन सत्र में विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के सचिव गणेश प्रसाद मौर्य, अभिभावक प्रतिनिधि एवं प्राथमिक प्रधानाध्यापक श्री हरिश्चन्द्र मिश्र तथा प्राचार्य नागेन्द्र तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति रही। विद्यालय की सभी व्यवस्थाओं को समुचित रूप से संचालित करने के लिए सत्रारंभ के अंतर्गत त्रि-दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जाती है, जिसमें विगत एवं आगत सत्र की समीक्षा के साथ आगामी योजनाएं बनाई जा रही हैं।
कार्यशाला की उपादेयता एवं प्रस्तावना की प्रस्तुति के क्रम में सचिव महोदय ने अपने विद्यालय की समस्त गतिविधियों को अनुपम, उत्कृष्ट एवं मानक बनाने पर बल दिया। साथ ही शिक्षण कौशल को अत्याधुनिक विधियों एवं व्यवस्थाओं से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उपाध्यक्ष अधिवक्ता शिशिर दास ने सर्वाधिक कमजोर भैया-बहनों के विकास हेतु चिंतन एवं मार्गदर्शन किया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में पीसीसीआर (PCCR) अर्थात पूर्णता, एकाग्रता, प्रतिस्पर्धा एवं जिम्मेदारी पर विशेष बल दिया। वहीं हरिश्चन्द्र मिश्र ने वर्तमान शिक्षण व्यवस्था पर चुटीले व्यंग्य करते हुए परंपरागत एवं आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के समन्वय की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
कार्यशाला के चतुर्थ सत्र के अंतर्गत इस वर्ष राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित निधि चौधरी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने नई शिक्षा नीति पर बल देते हुए शिक्षा क्षेत्र को और अधिक उन्नत एवं उत्कृष्ट बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। एक ओर उन्होंने बच्चों की समझ विकसित करने की बात कही, वहीं दूसरी ओर गतिविधि-आधारित शिक्षण को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने बच्चों को चरित्रवान, संस्कारी, अध्ययनशील एवं प्रगतिशील बनाने के कई उपायों की चर्चा की तथा शिक्षा को समावेशी बनाने की इच्छा भी जताई, जिसे आचार्यों ने खूब सराहा और आत्मसात करने का संकल्प लिया।
आगामी सत्रों में प्राचार्य नागेन्द्र कुमार तिवारी का उद्बोधन एवं मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। इस क्रम में उन्होंने विद्यालय के उत्कृष्ट परीक्षा परिणामों की गदगद कंठ से सराहना की तथा इसके लिए अपनी आचार्य टोली को हृदय से धन्यवाद दिया।
