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बिहार सरकार की पहल: विलुप्तप्राय लोककलाओं को संजीवनी देगी मुख्यमंत्री गुरु-शिष्य परंपरा योजना।

सारस न्यूज़, किशनगंज।


किशनगंज में प्रशिक्षण हेतु चयन की प्रक्रिया शुरू, युवा प्रतिभाओं को मिलेगा मंच

किशनगंज: बिहार की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को संजोने और विलुप्त हो रही लोककलाओं को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने एक अनूठी पहल की है। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा मुख्यमंत्री गुरु-शिष्य परंपरा योजना की शुरुआत की गई है, जिसके अंतर्गत राज्य की दुर्लभ और लुप्तप्राय लोककलाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार पर ज़ोर दिया जाएगा।

इस योजना के तहत अनुभवी गुरुओं की देखरेख में युवा कलाकारों को दो वर्षों तक प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण में शामिल कलाएं लोक गाथाओं, लोकनाट्य, लोक नृत्य, लोक संगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, शास्त्रीय गायन एवं चित्रकला की उन विधाओं को कवर करेंगी, जो अब धीरे-धीरे लुप्त हो रही हैं।

📌 शामिल कलाएं:

लोक गाथाएं: गौरियाबाबा, भरथरी बाबा, दीनाभद्री, राजा सलहेश, रेशमा-चूहड़मल, सती बिहुला, हिरनी-वीरनी
लोकनाट्य: विदेशिया, नारदी, डोमकुछ, बगुली, बिरहा, ज़ालिम सिंह, चकुली, बंका, कीर्तनियाँ
नृत्य: पाईका, कर्मा, धोबिया, झरनी, करिया झूमर, झिझिया, पावरिया, कठघोड़वा
संगीत: सुमंगली, रोपनी गीत, कटनी गीत, चैता, पूरबी, संस्कार गीत
वाद्य यंत्र: सारंगी, विचित्र वीणा, रुद्र वीणा, ईसराज, वायलिन, शहनाई, बीन, नगाड़ा
शास्त्रीय विधाएं: ख़्याल गायन, ध्रुपद-धमार, पखावज, सितार, ठुमरी, दादरा, होरी, सतरिया
चित्रकला: पटना कलम, टेराकोटा, सिक्की कला, माली कला, भोजपुरी पीड़िया, भोजपुरी छापा कला

📚 प्रशिक्षण अवधि:

  • कुल अवधि: 2 वर्ष
  • प्रति माह न्यूनतम 12 दिन का प्रशिक्षण आवश्यक

💰 वित्तीय प्रावधान:

  • गुरु: ₹15,000/- प्रति माह
  • संगत कलाकार: ₹7,500/- प्रति माह
  • प्रशिक्षु (शिष्य): ₹3,000/- प्रति माह

✅ चयन प्रक्रिया:

  • गुरुओं का चयन राज्यस्तरीय विशेषज्ञ समिति द्वारा किया जाएगा।
  • शिष्यों का चयन संबंधित गुरु एवं ज़िला कला-संस्कृति पदाधिकारी द्वारा किया जाएगा।
  • संगत कलाकारों का चयन गुरु द्वारा किया जाएगा।

🎓 समापन पर दीक्षांत समारोह:

प्रशिक्षण पूर्ण होने पर भव्य दीक्षांत समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रशिक्षु अपनी कला विधाओं की प्रस्तुति देंगे और गुरुओं को सम्मानित किया जाएगा।

📞 संपर्क सूत्र:

इस योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए ज़िला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, किशनगंज के कार्यालय (खेल भवन) में संपर्क किया जा सकता है।


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