स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी माने जाने वाले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर अब केवल उपचार के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि परिवार नियोजन जैसे संवेदनशील और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण विषय पर जनजागरूकता और सेवाओं की उपलब्धता का आधार भी बनते जा रहे हैं। जब समुदाय स्तर पर सही परामर्श, भरोसेमंद जानकारी और सुलभ सेवाएं एक ही स्थान पर मिलती हैं, तभी परिवार नियोजन अभियानों को वास्तविक सफलता मिलती है। इसी सोच के तहत जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को परिवार नियोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
सीएचओ की भूमिका से बदलेगा परिवार नियोजन का परिदृश्य
प्रशिक्षक जिला योजना समन्वयक विश्वजीत कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य सीएचओ को परिवार नियोजन के विभिन्न अस्थायी व स्थायी साधनों, दंपति परामर्श, मिथकों के समाधान और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की जानकारी देकर उन्हें समुदाय के लिए और अधिक सक्षम बनाना था।
एचडब्ल्यूसी स्तर पर सीएचओ की सक्रियता से न केवल महिलाओं, बल्कि पुरुषों की भागीदारी भी बढ़ेगी, जिससे दंपति आधारित निर्णय को प्रोत्साहन मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि यदि सीएचओ सही रणनीति के साथ कार्य करें, तो जिले में परिवार नियोजन अभियान को व्यापक सफलता दिलाई जा सकती है।
गुणवत्ता और विश्वास दोनों जरूरी
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए मानव संसाधन का प्रशिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपने संदेश में कहा, “हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर उपलब्ध सेवाएं तभी सफल होंगी, जब समुदाय का स्वास्थ्य कर्मियों पर भरोसा बने। सीएचओ का व्यवहार, परामर्श की गुणवत्ता और फॉलोअप परिवार नियोजन की सफलता का आधार है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार चल रहे अभियानों को धरातल पर उतारने में सीएचओ की भूमिका निर्णायक होगी। राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिले में 23 फरवरी से 05 मार्च 2026 तक “दंपति संपर्क सप्ताह” तथा 06 मार्च से 20 मार्च 2026 तक “परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा” आयोजित किया जा रहा है।
इन अभियानों के दौरान योग्य दंपतियों की पहचान, घर-घर संपर्क, परामर्श, अस्थायी साधनों की उपलब्धता और स्थायी साधनों के लिए रेफरल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त सीएचओ इन गतिविधियों के संचालन में अग्रणी भूमिका निभाएंगे, जिससे अभियान की प्रभावशीलता और पहुंच दोनों बढ़ेंगी।
सुदृढ़ एचडब्ल्यूसी से ही संभव है स्थायी सफलता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि जिले में परिवार नियोजन की स्थायी सफलता तभी संभव है, जब हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पूरी तरह सक्रिय, संसाधनयुक्त और प्रशिक्षित मानव बल से लैस हों। सीएचओ को दिया गया यह प्रशिक्षण उसी दिशा में एक ठोस कदम है, जो आने वाले समय में सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ परिवार और संतुलित जनसंख्या के लक्ष्य को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।
परिवार नियोजन कार्यक्रम को मजबूती देने में सहयोगी संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। पीएसआई इंडिया द्वारा तकनीकी सहयोग, व्यवहार परिवर्तन संचार और फील्ड-स्तरीय मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो रही है। वहीं सिफार के सहयोग से समुदाय में जागरूकता बढ़ाने, पुरुष सहभागिता को प्रोत्साहित करने और सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
प्रशिक्षण में व्यवहारिक ज्ञान और जमीनी अनुभव पर जोर
प्रशिक्षण सत्र में जिला योजना समन्वयक विश्वजीत कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि परिवार नियोजन केवल साधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दंपतियों को उनके जीवन, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े फैसलों में सहयोग देने की प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि सीएचओ समुदाय के सबसे नजदीकी स्वास्थ्य प्रतिनिधि हैं। यदि वे सही समय पर सही जानकारी और परामर्श दें, तो अनचाही गर्भावस्था और मातृ-शिशु मृत्यु दर को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है।
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी माने जाने वाले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर अब केवल उपचार के केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि परिवार नियोजन जैसे संवेदनशील और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण विषय पर जनजागरूकता और सेवाओं की उपलब्धता का आधार भी बनते जा रहे हैं। जब समुदाय स्तर पर सही परामर्श, भरोसेमंद जानकारी और सुलभ सेवाएं एक ही स्थान पर मिलती हैं, तभी परिवार नियोजन अभियानों को वास्तविक सफलता मिलती है। इसी सोच के तहत जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को परिवार नियोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
सीएचओ की भूमिका से बदलेगा परिवार नियोजन का परिदृश्य
प्रशिक्षक जिला योजना समन्वयक विश्वजीत कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य सीएचओ को परिवार नियोजन के विभिन्न अस्थायी व स्थायी साधनों, दंपति परामर्श, मिथकों के समाधान और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की जानकारी देकर उन्हें समुदाय के लिए और अधिक सक्षम बनाना था।
एचडब्ल्यूसी स्तर पर सीएचओ की सक्रियता से न केवल महिलाओं, बल्कि पुरुषों की भागीदारी भी बढ़ेगी, जिससे दंपति आधारित निर्णय को प्रोत्साहन मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि यदि सीएचओ सही रणनीति के साथ कार्य करें, तो जिले में परिवार नियोजन अभियान को व्यापक सफलता दिलाई जा सकती है।
गुणवत्ता और विश्वास दोनों जरूरी
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए मानव संसाधन का प्रशिक्षित होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपने संदेश में कहा, “हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर उपलब्ध सेवाएं तभी सफल होंगी, जब समुदाय का स्वास्थ्य कर्मियों पर भरोसा बने। सीएचओ का व्यवहार, परामर्श की गुणवत्ता और फॉलोअप परिवार नियोजन की सफलता का आधार है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार चल रहे अभियानों को धरातल पर उतारने में सीएचओ की भूमिका निर्णायक होगी। राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिले में 23 फरवरी से 05 मार्च 2026 तक “दंपति संपर्क सप्ताह” तथा 06 मार्च से 20 मार्च 2026 तक “परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा” आयोजित किया जा रहा है।
इन अभियानों के दौरान योग्य दंपतियों की पहचान, घर-घर संपर्क, परामर्श, अस्थायी साधनों की उपलब्धता और स्थायी साधनों के लिए रेफरल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त सीएचओ इन गतिविधियों के संचालन में अग्रणी भूमिका निभाएंगे, जिससे अभियान की प्रभावशीलता और पहुंच दोनों बढ़ेंगी।
सुदृढ़ एचडब्ल्यूसी से ही संभव है स्थायी सफलता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि जिले में परिवार नियोजन की स्थायी सफलता तभी संभव है, जब हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पूरी तरह सक्रिय, संसाधनयुक्त और प्रशिक्षित मानव बल से लैस हों। सीएचओ को दिया गया यह प्रशिक्षण उसी दिशा में एक ठोस कदम है, जो आने वाले समय में सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ परिवार और संतुलित जनसंख्या के लक्ष्य को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।
परिवार नियोजन कार्यक्रम को मजबूती देने में सहयोगी संस्थाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। पीएसआई इंडिया द्वारा तकनीकी सहयोग, व्यवहार परिवर्तन संचार और फील्ड-स्तरीय मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो रही है। वहीं सिफार के सहयोग से समुदाय में जागरूकता बढ़ाने, पुरुष सहभागिता को प्रोत्साहित करने और सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
प्रशिक्षण में व्यवहारिक ज्ञान और जमीनी अनुभव पर जोर
प्रशिक्षण सत्र में जिला योजना समन्वयक विश्वजीत कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि परिवार नियोजन केवल साधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दंपतियों को उनके जीवन, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े फैसलों में सहयोग देने की प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि सीएचओ समुदाय के सबसे नजदीकी स्वास्थ्य प्रतिनिधि हैं। यदि वे सही समय पर सही जानकारी और परामर्श दें, तो अनचाही गर्भावस्था और मातृ-शिशु मृत्यु दर को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है।