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फाइलेरिया: लाइलाज परंतु नियंत्रित होने वाली बीमारी, आत्म-देखभाल से ही संभव है राहत, पीएचसी टेढ़ागाछ में विधायक तौसीफ आलम की मौजूदगी में एमएमडीपी किट वितरण।

17 फाइलेरिया मरीजों को मिली राहत सामग्री, 21 दिव्यांगजनों को सौंपा गया प्रमाण-पत्र

राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।

फाइलेरिया एक ऐसी गंभीर लेकिन उपेक्षित बीमारी है, जो धीरे-धीरे व्यक्ति को शारीरिक रूप से कमजोर कर सामाजिक रूप से अलग-थलग कर देती है। मच्छरों के माध्यम से फैलने वाली यह बीमारी शुरुआती दौर में मामूली सूजन या दर्द के रूप में सामने आती है, लेकिन समय के साथ हाथ-पैरों की असामान्य सूजन, चलने-फिरने में कठिनाई और स्थायी विकृति का कारण बन जाती है। यह बीमारी भले ही पूर्णतः लाइलाज हो, लेकिन समय पर आत्म-देखभाल, नियमित स्वच्छता और मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसएबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) किट के सही उपयोग से इसके प्रभाव को नियंत्रित किया जा सकता है।

इसी उद्देश्य से पीएचसी टेढ़ागाछ में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रखंड विकास पदाधिकारी अजय कुमार, अंचल अधिकारी तथा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, टेढ़ागाछ की उपस्थिति रही। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने कहा कि फाइलेरिया मरीजों को नियमित रूप से पैरों की सफाई, व्यायाम और स्वच्छता अपनानी चाहिए, ताकि संक्रमण की जटिलताओं से बचा जा सके।

विधायक की उपस्थिति में फाइलेरिया मरीजों को मिली एमएमडीपी किट

आयोजित कार्यक्रम में बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक श्री तौसीफ आलम ने 17 फाइलेरिया प्रभावित मरीजों को एमएमडीपी किट प्रदान की। किट में साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम, तौलिया, टब, मग सहित स्वच्छता एवं आत्म-देखभाल से जुड़ी सभी आवश्यक सामग्री शामिल थी। विधायक मो. तौसीफ आलम ने कहा कि फाइलेरिया जैसी बीमारी से पीड़ित लोगों को केवल दवा ही नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन और सम्मानजनक देखभाल की आवश्यकता होती है। एमएमडीपी किट मरीजों को आत्मनिर्भर बनाती है और उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने का भरोसा देती है।

21 दिव्यांगजनों को मिला अधिकार और पहचान

बीएचएम अजय साह ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान 21 दिव्यांगजनों को दिव्यांगता प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया। इससे उन्हें सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सुविधा होगी। लाभार्थियों ने प्रमाण-पत्र मिलने पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे अपने जीवन में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

स्वास्थ्य विभाग की प्रतिबद्धता दोहराई

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया भले ही लाइलाज हो, लेकिन आत्म-देखभाल और सामुदायिक जागरूकता से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। एमएमडीपी किट मरीजों को संक्रमण से बचाने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाती है।

वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ. मंजर आलम ने बताया कि फाइलेरिया को साइलेंट डिजीज कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण वर्षों बाद सामने आते हैं। यदि मरीज नियमित देखभाल और स्वच्छता अपनाएं, तो बीमारी आगे नहीं बढ़ती। हमारा प्रयास है कि हर प्रभावित व्यक्ति तक यह सुविधा पहुंचे।

जागरूकता और आत्म-देखभाल से ही संभव है समाधान

कार्यक्रम के अंत में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने सभी लाभार्थियों को एमएमडीपी किट के सही उपयोग, रोजाना स्वच्छता और व्यायाम की जानकारी दी। यह आयोजन न केवल फाइलेरिया नियंत्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा, बल्कि इससे यह संदेश भी गया कि आत्म-देखभाल और जनभागीदारी से ही इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

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