सूबे की बेटियों के सुरक्षित और सुनहरे भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ते हुए प्रदेश की 13 लाख किशोरियों के लिए एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान को पूरी तरह निःशुल्क करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अभियान का देशव्यापी शुभारंभ शनिवार को अजमेर, राजस्थान से करेंगे।
प्रदेश में इस अभियान का शुभारंभ इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगा। अभियान के शुभारंभ के अवसर पर प्रदेश के प्रत्येक जिले में लॉन्चिंग स्थल पर 20 किशोरियों को ‘गार्डासिल’ (एचपीवी) टीका लगाकर कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि अभियान के तहत वे किशोरियां, जिन्होंने अपना 14वां जन्मदिन मना लिया है लेकिन अभी 15 वर्ष की नहीं हुई हैं, वे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर इस घातक सर्वाइकल कैंसर से बचाव का ‘सुरक्षा कवच’ प्राप्त कर सकेंगी। यह पहल स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक अत्यधिक महंगा होने के कारण यह टीका केवल संपन्न परिवारों की पहुंच तक सीमित था। अब इसे आमजन के लिए उपलब्ध करा दिया गया है। यह अभियान पहले जिला स्तर पर और बाद में प्रखंड स्तर पर संचालित किया जाएगा।
टीके से रोका जा सकता है एचपीवी कैंसर संक्रमण
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने कहा कि भारत में महिलाओं के बीच सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है, जिसके कारण हर साल हजारों महिलाएं असमय मृत्यु का शिकार हो जाती हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर में करीब 78,499 नए मामले सामने आए और 42,392 मौतें दर्ज की गईं।
यह बीमारी मुख्य रूप से एचपीवी संक्रमण के कारण होती है, जिसे समय रहते एक टीके के माध्यम से 93 प्रतिशत तक रोका जा सकता है। बिहार सरकार ने इसे प्राथमिकता देते हुए राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह की सिफारिशों को लागू किया है। इसके तहत 14 वर्ष की बच्चियों को इस टीके की एक ही खुराक दी जाएगी, जो उन्हें लंबे समय तक इस संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करेगी।
टीके की प्रभावशीलता और वैश्विक स्वीकार्यता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि एचपीवी टीका पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है। विश्व के 160 देशों ने एचपीवी टीकाकरण को अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत के राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह ने भी इसे प्रमाणित किया है।
दिसंबर 2022 तक दुनिया भर में 50 करोड़ से अधिक खुराकें वितरित की जा चुकी हैं। यह टीका एचपीवी वायरस के वेरिएंट 16 और 18 के खिलाफ 93 प्रतिशत तक प्रभावी है, जो भारत में लगभग 83 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। यह टीका न केवल जीवन बचाता है, बल्कि भविष्य में होने वाले महंगे इलाज और मानसिक कष्ट से भी परिवारों को सुरक्षित रखता है।
लक्षणों की पहचान और बचाव ही एकमात्र उपाय
इस कैंसर के शुरुआती चरण में जननांगों से असामान्य रक्तस्राव या दर्द जैसे लक्षण प्रायः दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। बीमारी बढ़ने पर वजन कम होना, पैरों में सूजन या पीठ दर्द जैसे संकेत सामने आते हैं। ऐसे में बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 35 से 45 वर्ष की आयु में, जब महिलाएं अपने परिवार और पेशेवर जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही होती हैं, तब यह बीमारी अधिक असर डालती है। टीकाकरण के माध्यम से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘यू-विन’ से होगी मॉनिटरिंग
इस अभियान को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘यू-विन’ का उपयोग कर रहा है। अभिभावक अपनी बेटियों का पंजीकरण घर बैठे या नजदीकी टीकाकरण केंद्र पर जाकर करा सकते हैं और टीकाकरण के बाद डिजिटल प्रमाणपत्र भी प्राप्त कर सकते हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह टीकाकरण पूरी तरह स्वैच्छिक होगा और इसके लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य होगी। टीका लगने के बाद हल्का दर्द या मामूली बुखार जैसे सामान्य लक्षण हो सकते हैं, जो दो-तीन दिनों में स्वतः ठीक हो जाते हैं। बिहार के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर पटना जैसे शहरी इलाकों तक इस अभियान को मिशन मोड में चलाया जा रहा है, ताकि राज्य की कोई भी बेटी इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
सूबे की बेटियों के सुरक्षित और सुनहरे भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ते हुए प्रदेश की 13 लाख किशोरियों के लिए एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान को पूरी तरह निःशुल्क करने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अभियान का देशव्यापी शुभारंभ शनिवार को अजमेर, राजस्थान से करेंगे।
प्रदेश में इस अभियान का शुभारंभ इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान, पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगा। अभियान के शुभारंभ के अवसर पर प्रदेश के प्रत्येक जिले में लॉन्चिंग स्थल पर 20 किशोरियों को ‘गार्डासिल’ (एचपीवी) टीका लगाकर कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि अभियान के तहत वे किशोरियां, जिन्होंने अपना 14वां जन्मदिन मना लिया है लेकिन अभी 15 वर्ष की नहीं हुई हैं, वे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर इस घातक सर्वाइकल कैंसर से बचाव का ‘सुरक्षा कवच’ प्राप्त कर सकेंगी। यह पहल स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब तक अत्यधिक महंगा होने के कारण यह टीका केवल संपन्न परिवारों की पहुंच तक सीमित था। अब इसे आमजन के लिए उपलब्ध करा दिया गया है। यह अभियान पहले जिला स्तर पर और बाद में प्रखंड स्तर पर संचालित किया जाएगा।
टीके से रोका जा सकता है एचपीवी कैंसर संक्रमण
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार ने कहा कि भारत में महिलाओं के बीच सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है, जिसके कारण हर साल हजारों महिलाएं असमय मृत्यु का शिकार हो जाती हैं। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में देशभर में करीब 78,499 नए मामले सामने आए और 42,392 मौतें दर्ज की गईं।
यह बीमारी मुख्य रूप से एचपीवी संक्रमण के कारण होती है, जिसे समय रहते एक टीके के माध्यम से 93 प्रतिशत तक रोका जा सकता है। बिहार सरकार ने इसे प्राथमिकता देते हुए राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह की सिफारिशों को लागू किया है। इसके तहत 14 वर्ष की बच्चियों को इस टीके की एक ही खुराक दी जाएगी, जो उन्हें लंबे समय तक इस संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करेगी।
टीके की प्रभावशीलता और वैश्विक स्वीकार्यता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि एचपीवी टीका पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है। विश्व के 160 देशों ने एचपीवी टीकाकरण को अपने राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत के राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह ने भी इसे प्रमाणित किया है।
दिसंबर 2022 तक दुनिया भर में 50 करोड़ से अधिक खुराकें वितरित की जा चुकी हैं। यह टीका एचपीवी वायरस के वेरिएंट 16 और 18 के खिलाफ 93 प्रतिशत तक प्रभावी है, जो भारत में लगभग 83 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। यह टीका न केवल जीवन बचाता है, बल्कि भविष्य में होने वाले महंगे इलाज और मानसिक कष्ट से भी परिवारों को सुरक्षित रखता है।
लक्षणों की पहचान और बचाव ही एकमात्र उपाय
इस कैंसर के शुरुआती चरण में जननांगों से असामान्य रक्तस्राव या दर्द जैसे लक्षण प्रायः दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है। बीमारी बढ़ने पर वजन कम होना, पैरों में सूजन या पीठ दर्द जैसे संकेत सामने आते हैं। ऐसे में बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 35 से 45 वर्ष की आयु में, जब महिलाएं अपने परिवार और पेशेवर जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही होती हैं, तब यह बीमारी अधिक असर डालती है। टीकाकरण के माध्यम से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘यू-विन’ से होगी मॉनिटरिंग
इस अभियान को पारदर्शी और सुलभ बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘यू-विन’ का उपयोग कर रहा है। अभिभावक अपनी बेटियों का पंजीकरण घर बैठे या नजदीकी टीकाकरण केंद्र पर जाकर करा सकते हैं और टीकाकरण के बाद डिजिटल प्रमाणपत्र भी प्राप्त कर सकते हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह टीकाकरण पूरी तरह स्वैच्छिक होगा और इसके लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य होगी। टीका लगने के बाद हल्का दर्द या मामूली बुखार जैसे सामान्य लक्षण हो सकते हैं, जो दो-तीन दिनों में स्वतः ठीक हो जाते हैं। बिहार के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर पटना जैसे शहरी इलाकों तक इस अभियान को मिशन मोड में चलाया जा रहा है, ताकि राज्य की कोई भी बेटी इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।