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स्वास्थ्य विभाग ने बाल विवाह उन्मूलन को दिया नया आयाम।

बेटियों के स्वास्थ्य-सुरक्षा का साझा संकल्प

राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।

‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान की वर्षगांठ पर किशनगंज स्वास्थ्य विभाग ने जिस गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ जागरूकता गतिविधियाँ संचालित कीं, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि बाल विवाह के खिलाफ यह संघर्ष अब केवल सामाजिक सुधार का प्रयास नहीं, बल्कि स्वास्थ्य-सुरक्षा और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अभियान बन चुका है। जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों, नर्सों और फ्रंटलाइन वर्करों ने समुदाय को बताया कि कम उम्र में विवाह और गर्भधारण बच्ची के जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

बेटी का बचपन छीनने का अर्थ—उसका स्वास्थ्य, भविष्य और अस्तित्व छीन लेना

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि जनस्वास्थ्य पर सीधा हमला है। किशोर उम्र का शरीर विवाह और गर्भधारण की जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं होता। इससे एनीमिया, कुपोषण, उच्च रक्तचाप, ईकलैंप्सिया, समयपूर्व प्रसव और कम वजन वाले बच्चों के जन्म जैसी समस्याएँ पैदा होती हैं, जो आगे पूरी पीढ़ी के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं।

SDG-3 और SDG-5 को प्राप्त करने का रास्ता—बाल विवाह का पूर्ण उन्मूलन

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि बाल विवाह समाप्त किए बिना SDG-3 (स्वास्थ्य और कल्याण) तथा SDG-5 (लैंगिक समानता) को प्राप्त करना संभव नहीं है। कम उम्र की गर्भावस्था मातृ मृत्यु दर बढ़ाती है और लड़की की शिक्षा तथा सामाजिक-आर्थिक प्रगति को रोक देती है। डॉक्टरों ने कहा,
“बेटी की सुरक्षित उम्र उसके सुरक्षित भविष्य की पहली शर्त है।”

यह लड़ाई हमारी बेटियों के सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई है’

जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि बाल विवाह रोकने का प्रत्येक प्रयास केवल सामाजिक बदलाव नहीं, बल्कि जीवन बचाने की दिशा में आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि जिस बच्ची के हाथ में किताब होनी चाहिए, उसके हाथ में विवाह का बोझ दे देना उसके सपनों और अस्तित्व दोनों का अंत है। उन्होंने इसे परिवारों और समुदायों में चेतना जगाने वाला आंदोलन बताया।

‘कम उम्र की गर्भावस्था—मातृ मृत्यु की भयावह वजहों में से एक’

सिविल सर्जन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया है कि गर्भवती किशोरियों की पहचान कर उनकी विशेष देखभाल और काउंसलिंग की जाए। आशा और एएनएम को गांव-गांव जाकर लोगों को यह समझाने को कहा गया है कि बाल विवाह रोकना मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

बाल विवाह मुक्त भविष्य ही स्वस्थ और विकसित समाज की नींव

जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनाजिम ने कहा कि यह अभियान एक भावनात्मक संकल्प था—कि किशनगंज की हर बेटी को सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वस्थ जीवन दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने यह स्पष्ट किया कि विकास तभी संभव है जब बेटियों को बोझ नहीं, भविष्य माना जाए।
‘बाल विवाह मुक्त किशनगंज’ अब लक्ष्य नहीं, बल्कि पूरा किया जाने वाला वादा है, जिसके लिए प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समुदाय एकजुट हैं।

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