जिले को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा 100 दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग अभियान अब तेज गति पकड़ चुका है। इस अभियान के तहत उन गांवों और वार्डों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां संक्रमण का खतरा अधिक माना गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम माइक्रोप्लान के आधार पर इन क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर लोगों की जांच कर रही है, ताकि टीबी के संभावित मरीजों की समय रहते पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा जा सके।
हाई रिस्क गांवों में विशेष अभियान
जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों में चिन्हित हाई रिस्क गांवों में सघन स्क्रीनिंग की जा रही है। किशनगंज सदर प्रखंड के 62 गांवों और वार्डों के अलावा ठाकुरगंज के 50, बहादुरगंज के 40, कोचाधामन के 45, पोठिया के 35, टेढ़ागाछ के 35 तथा दिघलबैंक के 30 गांवों में स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं। इस दौरान दो सप्ताह से अधिक खांसी, लगातार बुखार और वजन में कमी जैसे लक्षणों वाले लोगों की पहचान कर उन्हें तुरंत जांच के लिए भेजा जा रहा है।
टेढ़ागाछ में अभियान की निगरानी
अभियान की प्रगति को लेकर टेढ़ागाछ प्रखंड में विशेष निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार और बीएचएम अजय कुमार साह ने खानियाबाद हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्क्रीनिंग कार्यों की समीक्षा की और स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक संदिग्ध मरीज की समय पर जांच सुनिश्चित की जाए और अभियान में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
समय पर पहचान और उपचार जरूरी
डॉ. मंजर आलम ने कहा कि निक्षय पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर चिन्हित गांवों में अभियान को लक्ष्य के अनुसार संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि टीबी एक पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, बशर्ते इसकी समय पर पहचान कर इलाज शुरू किया जाए। इसलिए स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि कोई भी संभावित मरीज जांच से वंचित न रहे।
मरीजों को मिल रही उपचार और पोषण सहायता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि स्क्रीनिंग के दौरान जिन मरीजों में टीबी की पुष्टि हो रही है, उन्हें तुरंत निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है, ताकि उनके पोषण स्तर में सुधार हो सके। सभी मरीजों की नियमित निगरानी की जा रही है और उनकी जांच से संबंधित जानकारी पोर्टल पर अपडेट की जा रही है।
जनभागीदारी से ही मिलेगा टीबी पर नियंत्रण
जिलाधिकारी विशाल राज ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार या अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
जिले में चल रहा 100 दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग अभियान न केवल मरीजों की समय पर पहचान में मदद कर रहा है, बल्कि लोगों को जागरूक कर टीबी मुक्त किशनगंज बनाने की दिशा में भी मजबूत कदम साबित हो रहा है।
सारस न्यूज़, किशनगंज।
जिले को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जा रहा 100 दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग अभियान अब तेज गति पकड़ चुका है। इस अभियान के तहत उन गांवों और वार्डों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां संक्रमण का खतरा अधिक माना गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम माइक्रोप्लान के आधार पर इन क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर लोगों की जांच कर रही है, ताकि टीबी के संभावित मरीजों की समय रहते पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा जा सके।
हाई रिस्क गांवों में विशेष अभियान
जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि जिले के सभी प्रखंडों में चिन्हित हाई रिस्क गांवों में सघन स्क्रीनिंग की जा रही है। किशनगंज सदर प्रखंड के 62 गांवों और वार्डों के अलावा ठाकुरगंज के 50, बहादुरगंज के 40, कोचाधामन के 45, पोठिया के 35, टेढ़ागाछ के 35 तथा दिघलबैंक के 30 गांवों में स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं। इस दौरान दो सप्ताह से अधिक खांसी, लगातार बुखार और वजन में कमी जैसे लक्षणों वाले लोगों की पहचान कर उन्हें तुरंत जांच के लिए भेजा जा रहा है।
टेढ़ागाछ में अभियान की निगरानी
अभियान की प्रगति को लेकर टेढ़ागाछ प्रखंड में विशेष निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार और बीएचएम अजय कुमार साह ने खानियाबाद हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्क्रीनिंग कार्यों की समीक्षा की और स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक संदिग्ध मरीज की समय पर जांच सुनिश्चित की जाए और अभियान में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
समय पर पहचान और उपचार जरूरी
डॉ. मंजर आलम ने कहा कि निक्षय पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर चिन्हित गांवों में अभियान को लक्ष्य के अनुसार संचालित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि टीबी एक पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी है, बशर्ते इसकी समय पर पहचान कर इलाज शुरू किया जाए। इसलिए स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि कोई भी संभावित मरीज जांच से वंचित न रहे।
मरीजों को मिल रही उपचार और पोषण सहायता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि स्क्रीनिंग के दौरान जिन मरीजों में टीबी की पुष्टि हो रही है, उन्हें तुरंत निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत मरीजों को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है, ताकि उनके पोषण स्तर में सुधार हो सके। सभी मरीजों की नियमित निगरानी की जा रही है और उनकी जांच से संबंधित जानकारी पोर्टल पर अपडेट की जा रही है।
जनभागीदारी से ही मिलेगा टीबी पर नियंत्रण
जिलाधिकारी विशाल राज ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, बुखार या अचानक वजन कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
जिले में चल रहा 100 दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग अभियान न केवल मरीजों की समय पर पहचान में मदद कर रहा है, बल्कि लोगों को जागरूक कर टीबी मुक्त किशनगंज बनाने की दिशा में भी मजबूत कदम साबित हो रहा है।