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किशनगंज की जीविका दीदियों ने चाय उत्पादन में बढ़ाया कदम, इस सीजन 10 लाख किलो चायपत्ती तैयार करने का लक्ष्य।

सारस न्यूज़, किशनगंज।

किशनगंज में जीविका से जुड़ी महिलाओं द्वारा संचालित चाय उद्योग अब जिले की नई पहचान बनता जा रहा है। पोठिया स्थित टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई में मंगलवार को नए सीजन के लिए चायपत्ती उत्पादन का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस बार महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने 10 लाख किलो चायपत्ती उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।

जीविका जिला परियोजना प्रबंधक अनुराधा चंद्रा ने बताया कि पिछले सीजन में करीब डेढ़ लाख किलो चायपत्ती तैयार की गई थी, जिसमें से एक लाख किलो से अधिक उत्पाद बाजार में बिक चुका है। जीविका दीदियों द्वारा तैयार की जा रही महानंदा लीफ चायपत्ती अब किशनगंज की पहचान के रूप में उभर रही है और बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

पोठिया की इस इकाई से सीधे तौर पर 45 लोगों को रोजगार मिला है। इनमें 21 महिलाएं और 24 पुरुष कार्यरत हैं। यहां काम करने वाले कर्मियों को उनके कार्य के अनुसार 10 हजार रुपये से लेकर 40 हजार रुपये तक मासिक वेतन दिया जा रहा है।

चाय उद्योग से जुड़े लगभग 1800 किसानों से चाय पत्ता खरीदा जा रहा है। यह खरीद विभिन्न संग्रहण केंद्रों के माध्यम से 45 किसान संग्रहकर्ताओं द्वारा की जाती है। किसानों को चाय पत्ता बेचने के सात दिनों के भीतर राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेज दी जाती है। अगस्त 2025 से दिसंबर 2025 के बीच कुल 6 लाख 86 हजार 251 किलो हरी चाय पत्ती खरीदी गई।

ट्रायल के दौरान महानंदा एफपीसी की निदेशक मंडल से जुड़ी जीविका दीदियां नीलम, चांदनी, उमा रानी और ज्योतिका सिंह मौजूद रहीं। इसके अलावा प्रबंधक सतीश कुमार, प्रभारी मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी राजदीप कुमार तथा कंसल्टेंट राजन चौबे ने भी उत्पादन प्रक्रिया का निरीक्षण किया।

इस चाय फैक्ट्री का संचालन पूरी तरह महानंदा एफपीसी की महिला निदेशक मंडल के हाथों में है। यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का मजबूत उदाहरण बन रहा है।

चाय उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2010 में पोठिया प्रखंड के कुसियारी पंचायत स्थित कालीदास किस्मत क्षेत्र में लगभग 10 एकड़ भूमि पर 9.64 करोड़ रुपये की लागत से इस चाय कारखाने की स्थापना की गई थी। इसका उद्देश्य स्थानीय किसानों को चाय खेती से जोड़कर रोजगार के अवसर बढ़ाना था।

बाद में जीविका के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर महानंदा जीविका महिला एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड का गठन 14 जून 2021 को कंपनी अधिनियम 2013 के तहत किया गया। वर्तमान में यह कंपनी पोठिया, ठाकुरगंज और किशनगंज सदर प्रखंडों में सक्रिय है और इससे 737 महिला शेयरधारक जुड़ी हुई हैं।

25 अप्रैल 2025 को बिहार कैबिनेट ने इस टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग इकाई को जीविका को सौंपने की मंजूरी दी थी। इसके बाद 27 अप्रैल 2025 को जिला ग्रामीण विकास अभिकरण द्वारा फैक्ट्री का संचालन औपचारिक रूप से जीविका को हस्तांतरित किया गया और फिर महानंदा एफपीसी को इसकी जिम्मेदारी दी गई। अब यह इकाई ग्रामीण महिलाओं की मेहनत से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रही है।


By Hasrat

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