सारस न्यूज, किशनगंज।
पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, किशनगंज में भारत सरकार की राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के अंतर्गत ग्रामीण भारत के बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान टेक्नीशियन (मैत्री) प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. चंद्रहास एवं जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. सतीश कुमार द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. चंद्रहास ने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कृत्रिम गर्भाधान से संबंधित यह प्रशिक्षण न केवल स्वरोजगार का सशक्त माध्यम है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने प्रशिक्षण को गंभीरता से ग्रहण कर पशुपालकों के हित में कार्य करने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. सतीश कुमार ने प्रशिक्षणार्थियों को इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मैत्री कार्यकर्ता पशुधन विकास में एक मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
कोर्स को-ऑर्डिनेटर डॉ. नीलम कुशवाहा ने जानकारी दी कि इस योजना के तहत ग्रामीण भारत के शिक्षित युवाओं को मैत्री कार्यकर्ता के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे पशुपालकों के घर जाकर कृत्रिम गर्भाधान एवं प्राथमिक पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा सकें और पशुधन उत्पादकता में वृद्धि हो।
कार्यक्रम की ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेट्री डॉ. नैंसी जसरोटिया ने बताया कि प्रशिक्षण की अवधि एक माह की होगी, जो 5 जनवरी से 3 फरवरी तक चलेगी। प्रत्येक बैच में 30 मैत्री प्रशिक्षु शामिल हैं।
इस अवसर पर डॉ. राजू, डॉ. प्रत्युष, डॉ. अभिषेक सहित महाविद्यालय के अन्य संकाय सदस्य एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।
