जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में सघन प्रसव पूर्व जांच, सदर अस्पताल में सेवाओं की गुणवत्ता परखीं गई
माँ और नवजात शिशु की सुरक्षा केवल एक स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और सतत विकास का मूल आधार है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए जिले में प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों एवं सदर अस्पताल में विशेष प्रसव पूर्व जांच कार्यक्रम संचालित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाना है।अभियान के अंतर्गत बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचीं, जहां उनकी क्रमबद्ध एवं वैज्ञानिक पद्धति से जांच की गई। रक्तचाप, हीमोग्लोबिन स्तर, वजन, मूत्र परीक्षण, पेट की जांच एवं भ्रूण की वृद्धि का आकलन कर माताओं की स्वास्थ्य स्थिति का समग्र मूल्यांकन किया गया। आवश्यकतानुसार आयरन, कैल्शियम एवं अन्य जरूरी दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।
सदर अस्पताल में निरीक्षण, सेवाओं की गुणवत्ता पर विशेष फोकस
सदर अस्पताल में संचालित प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के अंतर्गत प्रदान की जा रही सेवाओं का निरीक्षण सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन द्वारा किया गया। उन्होंने जांच कक्षों, परामर्श व्यवस्था और दवा वितरण प्रणाली का गहन निरीक्षण किया तथा लाभार्थी महिलाओं से सीधे संवाद कर फीडबैक लिया।डॉ. हुसैन ने स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक गर्भवती महिला को सम्मानजनक व्यवहार, स्पष्ट परामर्श और समयबद्ध सेवाएं मिलनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचा जा सके।
चार प्रसव पूर्व जांच से सुरक्षित प्रसव की मजबूत तैयारी
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान गर्भवती महिलाओं के लिए एक संरक्षित कवच के रूप में कार्य कर रहा है।उन्होंने बताया कि तीसरे से नौवें माह के बीच कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच अनिवार्य हैं। इन जांचों के माध्यम से गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं की पहचान पहले ही हो जाती है, जिससे समय रहते उपचार या रेफरल संभव होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण से लेकर जांच, दवा और चिकित्सकीय परामर्श तक सभी सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क हैं।
सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में निर्णायक पहल
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने कहा कि मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम सीधे तौर पर सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि माँ का स्वस्थ रहना परिवार और समाज दोनों की स्थिरता से जुड़ा है। समय पर जांच और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी गर्भवती महिला स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।
उच्च जोखिम गर्भावस्था पर कड़ी निगरानी
महिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शबनम यास्मीन ने बताया कि अभियान के दौरान उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष पहचान की जा रही है।उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गंभीर एनीमिया, अत्यधिक या कम वजन, किशोरावस्था में गर्भधारण अथवा पूर्व सिजेरियन प्रसव जैसे मामलों में नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान से प्रसव के दौरान होने वाली गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।कार्यक्रम में शामिल गर्भवती महिला रुखसाना खातून ने बताया कि यहां हर जांच अच्छे से होती है। डॉक्टर समझाकर बताते हैं और दवा भी मिलती है। हमें अब डर नहीं लगता, क्योंकि समय-समय पर जांच हो रही है।
हर गांव तक सुरक्षित मातृत्व का संकल्प
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनाजिम ने कहा कि आशा एवं एएनएम के सहयोग से गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं को अभियान से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है कि हर गर्भवती महिला तक समय पर जांच, हर प्रसव सुरक्षित और हर नवजात स्वस्थ। प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान आज जिले में मातृ स्वास्थ्य की रीढ़ बन चुका है, जो न केवल जीवन रक्षा कर रहा है, बल्कि जिले को सुरक्षित और सशक्त भविष्य की ओर अग्रसर कर रहा है।
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में सघन प्रसव पूर्व जांच, सदर अस्पताल में सेवाओं की गुणवत्ता परखीं गई
माँ और नवजात शिशु की सुरक्षा केवल एक स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व और सतत विकास का मूल आधार है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए जिले में प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों एवं सदर अस्पताल में विशेष प्रसव पूर्व जांच कार्यक्रम संचालित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान कर मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाना है।अभियान के अंतर्गत बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचीं, जहां उनकी क्रमबद्ध एवं वैज्ञानिक पद्धति से जांच की गई। रक्तचाप, हीमोग्लोबिन स्तर, वजन, मूत्र परीक्षण, पेट की जांच एवं भ्रूण की वृद्धि का आकलन कर माताओं की स्वास्थ्य स्थिति का समग्र मूल्यांकन किया गया। आवश्यकतानुसार आयरन, कैल्शियम एवं अन्य जरूरी दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।
सदर अस्पताल में निरीक्षण, सेवाओं की गुणवत्ता पर विशेष फोकस
सदर अस्पताल में संचालित प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के अंतर्गत प्रदान की जा रही सेवाओं का निरीक्षण सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अनवर हुसैन द्वारा किया गया। उन्होंने जांच कक्षों, परामर्श व्यवस्था और दवा वितरण प्रणाली का गहन निरीक्षण किया तथा लाभार्थी महिलाओं से सीधे संवाद कर फीडबैक लिया।डॉ. हुसैन ने स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक गर्भवती महिला को सम्मानजनक व्यवहार, स्पष्ट परामर्श और समयबद्ध सेवाएं मिलनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचा जा सके।
चार प्रसव पूर्व जांच से सुरक्षित प्रसव की मजबूत तैयारी
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान गर्भवती महिलाओं के लिए एक संरक्षित कवच के रूप में कार्य कर रहा है।उन्होंने बताया कि तीसरे से नौवें माह के बीच कम से कम चार प्रसव पूर्व जांच अनिवार्य हैं। इन जांचों के माध्यम से गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं की पहचान पहले ही हो जाती है, जिससे समय रहते उपचार या रेफरल संभव होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पंजीकरण से लेकर जांच, दवा और चिकित्सकीय परामर्श तक सभी सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क हैं।
सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में निर्णायक पहल
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने कहा कि मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम सीधे तौर पर सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि माँ का स्वस्थ रहना परिवार और समाज दोनों की स्थिरता से जुड़ा है। समय पर जांच और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी गर्भवती महिला स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।
उच्च जोखिम गर्भावस्था पर कड़ी निगरानी
महिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शबनम यास्मीन ने बताया कि अभियान के दौरान उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष पहचान की जा रही है।उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गंभीर एनीमिया, अत्यधिक या कम वजन, किशोरावस्था में गर्भधारण अथवा पूर्व सिजेरियन प्रसव जैसे मामलों में नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान से प्रसव के दौरान होने वाली गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है।कार्यक्रम में शामिल गर्भवती महिला रुखसाना खातून ने बताया कि यहां हर जांच अच्छे से होती है। डॉक्टर समझाकर बताते हैं और दवा भी मिलती है। हमें अब डर नहीं लगता, क्योंकि समय-समय पर जांच हो रही है।
हर गांव तक सुरक्षित मातृत्व का संकल्प
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनाजिम ने कहा कि आशा एवं एएनएम के सहयोग से गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं को अभियान से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है कि हर गर्भवती महिला तक समय पर जांच, हर प्रसव सुरक्षित और हर नवजात स्वस्थ। प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान आज जिले में मातृ स्वास्थ्य की रीढ़ बन चुका है, जो न केवल जीवन रक्षा कर रहा है, बल्कि जिले को सुरक्षित और सशक्त भविष्य की ओर अग्रसर कर रहा है।