मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने तथा परिवार नियोजन सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में किशनगंज जिला निरंतर आगे बढ़ रहा है। सुरक्षित, सरल और दीर्घकालिक गर्भनिरोधक साधनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्टाफ नर्स/एएनएम के लिए पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी पर आधारित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की आज विधिवत शुरुआत की गई। यह प्रशिक्षण सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी के मार्गदर्शन में सदर अस्पताल, किशनगंज में आयोजित किया जा रहा है। पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी महिलाओं के लिए अत्यंत सुरक्षित और प्रभावी गर्भनिरोधक उपाय हैं, जो दो बच्चों के बीच सुरक्षित अंतर सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रसव के तुरंत बाद पीपीआईयूसीडी लगाने से अनचाहे गर्भधारण से बचाव के साथ-साथ मातृ स्वास्थ्य में भी सुधार होता है।
जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से चयनित स्टाफ नर्स व एएनएम होंगी प्रशिक्षित
जिले के सदर अस्पताल में 19 जनवरी से शुरू हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत स्टाफ नर्स/जीएनएम/एएनएम भाग ले रही हैं। प्रशिक्षण दो बैचों में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रतिभागियों को पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी के सुरक्षित इन्सर्शन, आवश्यक सावधानियों, संभावित दुष्प्रभावों, फॉलो-अप और प्रभावी काउंसलिंग से संबंधित व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी दी जा रही है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रसव कक्ष में तैनात स्वास्थ्यकर्मी महिलाओं को सही परामर्श देकर आत्मविश्वास के साथ यह सेवा उपलब्ध करा सकें और परिवार नियोजन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो।
मिथकों से मुक्ति, सही जानकारी पर जोर
प्रशिक्षक सुमन सिन्हा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान आईयूसीडी एवं पीपीआईयूसीडी से जुड़े सामाजिक मिथकों, गलत धारणाओं और आशंकाओं पर विशेष चर्चा की जा रही है। डीसीएम सह प्रशिक्षक सुमन सिन्हा ने कहा कि जानकारी के अभाव में कई महिलाएं इन सुरक्षित साधनों को अपनाने से हिचकिचाती हैं। इस प्रशिक्षण के बाद स्वास्थ्यकर्मी न केवल तकनीकी रूप से दक्ष होंगे, बल्कि प्रभावी काउंसलिंग के माध्यम से महिलाओं और उनके परिजनों का भरोसा भी जीत सकेंगे।
पीपीआईयूसीडी उपलब्धि में किशनगंज की सशक्त पहचान
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि परिवार नियोजन कार्यक्रम के क्षेत्र में किशनगंज जिला लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। पीपीआईयूसीडी उपलब्धि के मामले में जिला वर्तमान में सूबे में सातवें स्थान पर है, जो जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। प्रशिक्षण के माध्यम से मानव संसाधन को और मजबूत कर इस उपलब्धि को आगे और बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण में प्रशिक्षण की अहम भूमिका
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी जैसे आधुनिक गर्भनिरोधक साधनों की सही जानकारी और सुरक्षित उपयोग से अनचाहे गर्भधारण में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की कि वे समुदाय में जाकर महिलाओं को सही जानकारी दें, उनके मन में मौजूद शंकाओं को दूर करें और परिवार नियोजन को एक सकारात्मक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करें।
महिलाओं को मिलेगा सशक्त, किफायती और भरोसेमंद विकल्प
डीसीएम सुमन सिन्हा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल गर्भनिरोधक साधनों का प्रचार-प्रसार नहीं, बल्कि महिलाओं को उनके स्वास्थ्य और परिवार नियोजन के प्रति जागरूक बनाना भी है। पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी के माध्यम से महिलाओं को अनचाहे गर्भधारण से बचाव का सुरक्षित और दीर्घकालिक विकल्प मिलता है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की भी संभावना बढ़ती है। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण के बाद जिले में पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी सेवाओं की गुणवत्ता, स्वीकार्यता और उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे किशनगंज परिवार नियोजन के क्षेत्र में सूबे में और मजबूत पहचान बनाएगा।
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने तथा परिवार नियोजन सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में किशनगंज जिला निरंतर आगे बढ़ रहा है। सुरक्षित, सरल और दीर्घकालिक गर्भनिरोधक साधनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्टाफ नर्स/एएनएम के लिए पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी पर आधारित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की आज विधिवत शुरुआत की गई। यह प्रशिक्षण सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी के मार्गदर्शन में सदर अस्पताल, किशनगंज में आयोजित किया जा रहा है। पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी महिलाओं के लिए अत्यंत सुरक्षित और प्रभावी गर्भनिरोधक उपाय हैं, जो दो बच्चों के बीच सुरक्षित अंतर सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रसव के तुरंत बाद पीपीआईयूसीडी लगाने से अनचाहे गर्भधारण से बचाव के साथ-साथ मातृ स्वास्थ्य में भी सुधार होता है।
जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों से चयनित स्टाफ नर्स व एएनएम होंगी प्रशिक्षित
जिले के सदर अस्पताल में 19 जनवरी से शुरू हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत स्टाफ नर्स/जीएनएम/एएनएम भाग ले रही हैं। प्रशिक्षण दो बैचों में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रतिभागियों को पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी के सुरक्षित इन्सर्शन, आवश्यक सावधानियों, संभावित दुष्प्रभावों, फॉलो-अप और प्रभावी काउंसलिंग से संबंधित व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी दी जा रही है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रसव कक्ष में तैनात स्वास्थ्यकर्मी महिलाओं को सही परामर्श देकर आत्मविश्वास के साथ यह सेवा उपलब्ध करा सकें और परिवार नियोजन सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हो।
मिथकों से मुक्ति, सही जानकारी पर जोर
प्रशिक्षक सुमन सिन्हा ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान आईयूसीडी एवं पीपीआईयूसीडी से जुड़े सामाजिक मिथकों, गलत धारणाओं और आशंकाओं पर विशेष चर्चा की जा रही है। डीसीएम सह प्रशिक्षक सुमन सिन्हा ने कहा कि जानकारी के अभाव में कई महिलाएं इन सुरक्षित साधनों को अपनाने से हिचकिचाती हैं। इस प्रशिक्षण के बाद स्वास्थ्यकर्मी न केवल तकनीकी रूप से दक्ष होंगे, बल्कि प्रभावी काउंसलिंग के माध्यम से महिलाओं और उनके परिजनों का भरोसा भी जीत सकेंगे।
पीपीआईयूसीडी उपलब्धि में किशनगंज की सशक्त पहचान
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि परिवार नियोजन कार्यक्रम के क्षेत्र में किशनगंज जिला लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। पीपीआईयूसीडी उपलब्धि के मामले में जिला वर्तमान में सूबे में सातवें स्थान पर है, जो जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। प्रशिक्षण के माध्यम से मानव संसाधन को और मजबूत कर इस उपलब्धि को आगे और बेहतर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण में प्रशिक्षण की अहम भूमिका
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी जैसे आधुनिक गर्भनिरोधक साधनों की सही जानकारी और सुरक्षित उपयोग से अनचाहे गर्भधारण में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की कि वे समुदाय में जाकर महिलाओं को सही जानकारी दें, उनके मन में मौजूद शंकाओं को दूर करें और परिवार नियोजन को एक सकारात्मक विकल्प के रूप में प्रस्तुत करें।
महिलाओं को मिलेगा सशक्त, किफायती और भरोसेमंद विकल्प
डीसीएम सुमन सिन्हा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल गर्भनिरोधक साधनों का प्रचार-प्रसार नहीं, बल्कि महिलाओं को उनके स्वास्थ्य और परिवार नियोजन के प्रति जागरूक बनाना भी है। पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी के माध्यम से महिलाओं को अनचाहे गर्भधारण से बचाव का सुरक्षित और दीर्घकालिक विकल्प मिलता है, जिससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की भी संभावना बढ़ती है। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण के बाद जिले में पीपीआईयूसीडी एवं आईयूसीडी सेवाओं की गुणवत्ता, स्वीकार्यता और उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे किशनगंज परिवार नियोजन के क्षेत्र में सूबे में और मजबूत पहचान बनाएगा।