राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
समाज में व्याप्त बाल विवाह जैसी कुरीति को जड़ से मिटाने के लिए ‘राहत संस्था’ द्वारा एक विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ बिहार सरकार के उद्योग सह पथ मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस अवसर पर राहत संस्था की सचिव डॉ. फरजाना बेगम प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने समाज को इस कुप्रथा के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान किया।
कानून का उल्लंघन पड़ेगा भारी
जागरूकता रैली का मुख्य उद्देश्य लोगों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के कड़े प्रावधानों से अवगत कराना है। रैली के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि विवाह के लिए निर्धारित आयु का पालन अनिवार्य है—लड़के की आयु कम से कम 21 वर्ष तथा लड़की की आयु 18 वर्ष होना आवश्यक है। इससे कम उम्र में विवाह करना कानूनन अपराध है।
बाल विवाह कराने वाले माता-पिता या रिश्तेदारों को दो वर्ष तक की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना, अथवा दोनों दंड भुगतने पड़ सकते हैं। जागरूकता अभियान में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बाल विवाह में किसी भी प्रकार की सहायता करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
विवाह संपन्न कराने वाले पंडित, मौलवी या पादरी के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शादी में सेवा देने वाले नाई, हलवाई, बैंड-बाजा और टेंट संचालकों को भी दो वर्ष की सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। यहां तक कि समारोह में शामिल होने वाले व्यक्ति भी कानून की नजर में दोषी माने जाएंगे और उन पर भी समान सजा का प्रावधान है।
बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है। सुरक्षित और सशक्त समाज के निर्माण के लिए जागरूक बनें और इस कुप्रथा को रोकने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
