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ठंड बढ़ी, खतरे बढ़े: सर्द हवाओं के बीच बच्चों की सेहत पर विशेष सावधानी जरूरी।

राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।

सही पोषण, गर्म कपड़े, स्वच्छता और सतर्कता ही बचाव का आधार

सर्दियों की दस्तक के साथ ही जिले में तापमान गिरने लगा है और बर्फीली हवाओं का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर गहराई से पड़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि ठंड के मौसम में बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है, जिसके कारण सर्दी-जुकाम, वायरल फ्लू, निमोनिया, हाइपोथर्मिया, अस्थमा, ब्रोन्काइटिस और डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में माता-पिता को बच्चों की देखभाल में अतिरिक्त सतर्कता बरतना आवश्यक है, ताकि मौसम के प्रभाव से होने वाली संभावित बीमारियों से बचाव हो सके।

सही पोषण ही बच्चों की पहली ढाल — सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि सर्दियों में बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है—सही और पर्याप्त पोषण। ठंड के मौसम में शरीर की ऊर्जा खपत बढ़ जाती है, ऐसे में बच्चों को गर्म और पौष्टिक भोजन देना आवश्यक हो जाता है।

उन्होंने कहा कि हल्का गर्म और घर का ताजा भोजन बच्चों के शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम, बर्फ वाले पेय और रेफ्रिजरेटेड खाद्य पदार्थों से परहेज की भी सलाह दी।

डॉ. चौधरी के अनुसार, सर्दियों में कई बच्चे पर्याप्त पानी नहीं पीते, जिससे डिहाइड्रेशन और कमजोरी हो सकती है। इसलिए बच्चों को दूध, सूप, दाल का पानी, नारियल पानी और साधारण पानी नियमित अंतराल पर देना चाहिए।

उन्होंने बताया कि बच्चों के आहार में दलिया, दाल-चावल, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडा, मौसमी फल, खट्टे फल, गुड़, मछली और सूखे मेवे शामिल करने से उनकी प्रतिरक्षा क्षमता मजबूत होती है, जो उन्हें ठंड से होने वाली बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करती है।

गर्म कपड़े पहनाने में बरतें समझदारी

सिविल सर्जन ने माता-पिता को सलाह दी कि बच्चों को सिर से पैर तक ढककर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे बाजू के कपड़ों के ऊपर स्वेटर, टोपी, कान की पट्टी, दस्ताने और गर्म मोजे अवश्य पहनाएं, क्योंकि सिर, कान और पैर से ठंड सबसे तेजी से शरीर में प्रवेश करती है।

उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को पहले सूती कपड़े पहनाएं, उसके बाद ऊनी कपड़े, ताकि उन्हें किसी प्रकार की एलर्जी या खुजली न हो।
गीले कपड़ों को तुरंत बदलने की सलाह भी दी, क्योंकि नमी बच्चों में सर्दी और निमोनिया का प्रमुख कारण बनती है।

साथ ही, सर्दियों में त्वचा पर होने वाले रैशेज और रूखेपन से बचाने के लिए मॉइश्चराइज़र का उपयोग आवश्यक है। छोटे बच्चों को सुबह की धूप में कुछ देर रखना भी फायदेमंद है।

स्वच्छता ही संक्रमणों से व्यापक सुरक्षा

डॉ. चौधरी ने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि स्वच्छता की आदतें बच्चों को हर मौसम में स्वस्थ रखती हैं, विशेषकर सर्दियों में। उन्होंने माता-पिता से कहा कि छोटे बच्चों को धूल, मिट्टी या गंदगी वाले स्थानों पर खेलने से बचाएं।

उन्होंने बताया कि बच्चों में हाथ धोने की आदत बचपन से ही विकसित करनी चाहिए।
बाहर से आने के बाद, खाने से पहले और शौचालय के बाद हाथ धोने से संक्रमणों का खतरा काफी कम हो जाता है।

बच्चों के कपड़े, बिस्तर और पर्दे समय-समय पर धोने और साफ रखने की सलाह भी दी गई।

माताओं की जागरूकता ही बच्चों को बीमारियों से बचाएगी

डॉ. चौधरी ने कहा कि थोड़ी सी अतिरिक्त सतर्कता, सही पोषण और स्वच्छ वातावरण के माध्यम से बच्चे सर्दियों में भी स्वस्थ रह सकते हैं।
उन्होंने माताओं से अपील की कि वे मौसम में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें, बच्चों को अत्यधिक ठंड के संपर्क में न आने दें और किसी भी लक्षण के दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से सलाह लें।

उन्होंने कहा कि सर्दी का मौसम बच्चों के लिए संवेदनशील होता है। यदि माता-पिता जिम्मेदारी से देखभाल करें और आवश्यक सावधानियां अपनाएं, तो अधिकांश बीमारियों से बचाव संभव है।

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