राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता और जन-जागरूकता को सशक्त बनाने की दिशा में जिले में आज ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस का प्रभावी आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल सेवाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समुदाय को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और आत्मनिर्भर बनाना रहा। जिले के सभी प्रखंडों में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से टीकाकरण, मातृत्व स्वास्थ्य, पोषण, परिवार नियोजन एवं किशोरी स्वच्छता जैसे अहम विषयों को प्राथमिकता दी गई।मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा पर विशेष जोरकार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य की विशेष रूप से जांच की गई। नियमित टीकाकरण, गर्भावस्था जांच, पोषण परामर्श और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई।जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. देवेन्द्र कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण अब केवल अभियान नहीं, बल्कि निरंतर प्रक्रिया बन चुका है।उन्होंने कहा कि टीकाकरण बच्चों और माताओं को गंभीर बीमारियों से बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। हमारा लक्ष्य है कि कोई भी गर्भवती महिला या नवजात आवश्यक सेवाओं से वंचित न रहे।परिवार नियोजन और किशोरी स्वच्छता से जुड़े संवेदनशील मुद्दे कार्यक्रम में परिवार नियोजन पर भी विशेष संवाद किया गया, जहां दंपतियों को सही समय पर सही निर्णय लेने के लिए परामर्श दिया गया। साथ ही ग्रामीण किशोरियों के लिए मासिक धर्म स्वच्छता पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए।किशोरियों को स्वच्छता किट का वितरण कर उन्हें स्वास्थ्य, स्वच्छता और आत्मसम्मान से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी गई, जिससे वे बिना झिझक अपने स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर बात कर सकें।यह कार्यक्रम नहीं, स्वास्थ्य मिशन हैसिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने आयोजन को लेकर कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य को मजबूत करने का निरंतर मिशन है। जब तक अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंचेंगी, तब तक हमारा उद्देश्य अधूरा रहेगा। स्वास्थ्य विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ गांव-गांव तक सेवाएं पहुंचाने में जुटा है।उन्होंने यह भी कहा कि समुदाय की भागीदारी से ही किसी भी स्वास्थ्य अभियान को स्थायी सफलता मिलती है।स्वास्थ्य जागरूकता और परामर्श से बदली सोच कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा स्वच्छता, संतुलित आहार, नियमित जांच और मौसमी बीमारियों से बचाव पर जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि अब स्वास्थ्य को लेकर सोच में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।डॉ. देवेन्द्र कुमार ने कहा कि जब लोग स्वयं आगे बढ़कर जांच और परामर्श के लिए आते हैं, तभी समझा जाता है कि जागरूकता का प्रयास सफल हो रहा है।ग्रामीण समाज में स्वास्थ्य चेतना की नई शुरुआतस्वास्थ्य शिविरों, परामर्श सेवाओं और सामुदायिक संवाद के माध्यम से यह आयोजन ग्रामीण समाज में स्वास्थ्य के प्रति नई चेतना लेकर आया है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम और अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित किए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं हर जरूरतमंद तक समय पर पहुंच सकें।
