कुपोषण केवल एक चिकित्सकीय समस्या नहीं, बल्कि यह सामाजिक एवं आर्थिक विकास से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है, जो बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनके मानसिक एवं बौद्धिक विकास को भी बाधित करता है। जीवन के प्रारंभिक छह वर्षों में यदि बच्चों को संतुलित आहार, समुचित देखभाल एवं अनुकूल वातावरण नहीं मिलता है, तो इसका प्रभाव उनके संपूर्ण जीवन पर पड़ता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक “8वां पोषण पखवाड़ा” आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु पोषण में सुधार, कुपोषण की रोकथाम तथा बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। यह अभियान अब एक समन्वित जनआंदोलन के रूप में विकसित हो रहा है, जिसमें विभिन्न विभागों के साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
जिला प्रशासन की रणनीति: समन्वित और बहुआयामी दृष्टिकोण
जिला पदाधिकारी विशाल राज के नेतृत्व में इस अभियान को बहु-विभागीय समन्वय के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है। ICDS, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज, कृषि एवं अन्य विभागों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने स्तर पर समेकित प्रयास करें, ताकि पोषण से संबंधित सेवाएं प्रभावी ढंग से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकें।
जिला पदाधिकारी ने कहा कि पोषण पखवाड़ा का मूल उद्देश्य केवल कार्यक्रमों का आयोजन नहीं, बल्कि समाज में स्थायी व्यवहार परिवर्तन लाना है। “जब तक परिवार स्तर पर पोषण के प्रति जागरूकता नहीं बढ़ेगी, तब तक कुपोषण की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।”
उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और सरकारी सेवाओं से जुड़कर इस अभियान को सफल बनाएं।
स्वास्थ्य विभाग का दृष्टिकोण: रोकथाम आधारित प्रणाली पर बल
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि कुपोषण की समस्या का समाधान केवल उपचार में नहीं, बल्कि उसकी समय पर पहचान और रोकथाम में निहित है। नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार और VHSND जैसे मंचों के माध्यम से हम इस दिशा में प्रभावी कार्य कर सकते हैं।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि शिशु को जन्म के बाद छह माह तक केवल स्तनपान कराएं तथा उसके बाद पूरक आहार की सही शुरुआत सुनिश्चित करें। बच्चों के वजन और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है।
विद्यालय स्तर पर पहल: व्यवहारिक शिक्षा के माध्यम से जागरूकता
पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत आज बहादुरगंज प्रखंड के नव प्राथमिक विद्यालय, तालबाड़ी में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय की प्रधान शिक्षिका झुमी कुमारी ने छात्र-छात्राओं को पोषण के विभिन्न आयामों—संतुलित आहार, स्वच्छता, स्वास्थ्य आदतों एवं जीवनशैली—के बारे में वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान की।
उन्होंने बच्चों को बताया कि दैनिक भोजन में पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा, जैसे—हरी सब्जियां, दाल, फल एवं दूध—का समावेश उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अनिवार्य है। साथ ही जंक फूड के दुष्प्रभाव एवं स्वच्छता के महत्व को भी विस्तार से समझाया गया।
यह पहल इस बात को दर्शाती है कि यदि बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर ही सही जानकारी दी जाए, तो वे न केवल स्वयं स्वस्थ रह सकते हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी जागरूक कर सकते हैं।
पोषण पखवाड़ा यह स्पष्ट करता है कि कुपोषण की समस्या का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय सहभागिता से ही संभव है। किशनगंज में जिला स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक चल रहे इस अभियान ने यह संकेत दिया है कि अब पोषण को लेकर जागरूकता एक नई दिशा में आगे बढ़ रही है।
सशक्त बचपन ही सशक्त समाज की आधारशिला है, और पोषण ही उसकी सबसे मजबूत कड़ी।
राहुल कुमार, सारस न्यूज़, किशनगंज।
कुपोषण केवल एक चिकित्सकीय समस्या नहीं, बल्कि यह सामाजिक एवं आर्थिक विकास से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है, जो बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनके मानसिक एवं बौद्धिक विकास को भी बाधित करता है। जीवन के प्रारंभिक छह वर्षों में यदि बच्चों को संतुलित आहार, समुचित देखभाल एवं अनुकूल वातावरण नहीं मिलता है, तो इसका प्रभाव उनके संपूर्ण जीवन पर पड़ता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक “8वां पोषण पखवाड़ा” आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु पोषण में सुधार, कुपोषण की रोकथाम तथा बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। यह अभियान अब एक समन्वित जनआंदोलन के रूप में विकसित हो रहा है, जिसमें विभिन्न विभागों के साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
जिला प्रशासन की रणनीति: समन्वित और बहुआयामी दृष्टिकोण
जिला पदाधिकारी विशाल राज के नेतृत्व में इस अभियान को बहु-विभागीय समन्वय के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है। ICDS, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज, कृषि एवं अन्य विभागों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने स्तर पर समेकित प्रयास करें, ताकि पोषण से संबंधित सेवाएं प्रभावी ढंग से अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकें।
जिला पदाधिकारी ने कहा कि पोषण पखवाड़ा का मूल उद्देश्य केवल कार्यक्रमों का आयोजन नहीं, बल्कि समाज में स्थायी व्यवहार परिवर्तन लाना है। “जब तक परिवार स्तर पर पोषण के प्रति जागरूकता नहीं बढ़ेगी, तब तक कुपोषण की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।”
उन्होंने आमजन से अपील करते हुए कहा कि गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें, नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और सरकारी सेवाओं से जुड़कर इस अभियान को सफल बनाएं।
स्वास्थ्य विभाग का दृष्टिकोण: रोकथाम आधारित प्रणाली पर बल
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि कुपोषण की समस्या का समाधान केवल उपचार में नहीं, बल्कि उसकी समय पर पहचान और रोकथाम में निहित है। नियमित टीकाकरण, संतुलित आहार और VHSND जैसे मंचों के माध्यम से हम इस दिशा में प्रभावी कार्य कर सकते हैं।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि शिशु को जन्म के बाद छह माह तक केवल स्तनपान कराएं तथा उसके बाद पूरक आहार की सही शुरुआत सुनिश्चित करें। बच्चों के वजन और स्वास्थ्य की नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है।
विद्यालय स्तर पर पहल: व्यवहारिक शिक्षा के माध्यम से जागरूकता
पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत आज बहादुरगंज प्रखंड के नव प्राथमिक विद्यालय, तालबाड़ी में एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय की प्रधान शिक्षिका झुमी कुमारी ने छात्र-छात्राओं को पोषण के विभिन्न आयामों—संतुलित आहार, स्वच्छता, स्वास्थ्य आदतों एवं जीवनशैली—के बारे में वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान की।
उन्होंने बच्चों को बताया कि दैनिक भोजन में पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा, जैसे—हरी सब्जियां, दाल, फल एवं दूध—का समावेश उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अनिवार्य है। साथ ही जंक फूड के दुष्प्रभाव एवं स्वच्छता के महत्व को भी विस्तार से समझाया गया।
यह पहल इस बात को दर्शाती है कि यदि बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर ही सही जानकारी दी जाए, तो वे न केवल स्वयं स्वस्थ रह सकते हैं, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी जागरूक कर सकते हैं।
पोषण पखवाड़ा यह स्पष्ट करता है कि कुपोषण की समस्या का समाधान केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय सहभागिता से ही संभव है। किशनगंज में जिला स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक चल रहे इस अभियान ने यह संकेत दिया है कि अब पोषण को लेकर जागरूकता एक नई दिशा में आगे बढ़ रही है।
सशक्त बचपन ही सशक्त समाज की आधारशिला है, और पोषण ही उसकी सबसे मजबूत कड़ी।