सारस न्यूज़, किशनगंज।
कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार और जिला प्रशासन किशनगंज के संयुक्त प्रयास से किशनगंज के डुमरिया भट्टा स्थित आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र में शनिवार से छह दिवसीय खेता कढ़ाई कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन विशाल राज ने दीप प्रज्वलित कर किया। यह प्रशिक्षण 14 मार्च से 19 मार्च 2026 तक चलेगा, जिसमें जिले की 40 छात्राएं भाग ले रही हैं।
उद्घाटन समारोह के दौरान जिला पदाधिकारी ने कहा कि पारंपरिक कला किसी भी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत बनाती है। उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि हस्तकला और कढ़ाई जैसी विधाएं केवल विरासत का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि आज के समय में रोजगार का प्रभावी माध्यम भी बन सकती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण को पूरी गंभीरता से सीखने और इसे भविष्य में आत्मनिर्भरता से जोड़ने की अपील की।

जिला पदाधिकारी ने यह भी कहा कि प्रशासन का उद्देश्य स्थानीय पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित करना और महिलाओं को कौशल आधारित अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। उनके अनुसार खेता कढ़ाई बिहार की ऐसी लोककला है जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा प्रतिभागियों को खेता कढ़ाई की बारीक तकनीक, पारंपरिक डिज़ाइन, धागों के चयन, रंग संयोजन और आधुनिक उपयोग के बारे में व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि हस्तकला को बाजार से कैसे जोड़ा जा सकता है ताकि इसे स्वरोजगार का रूप दिया जा सके।
प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशिक्षण समाप्ति पर सभी प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।
इस अवसर पर बैंकिंग शाखा से जुड़े वरीय उपसमाहर्ता, सहायक कोषागार पदाधिकारी, अनुमंडल पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण पदाधिकारी, प्रशिक्षकगण, प्रशिक्षु छात्राएं तथा जिले के कई नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण शिविर स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान देने के साथ-साथ पारंपरिक कला संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
