राजीव कुमार, सारस न्यूज़।
ठाकुरगंज, बिहार: सीमावर्ती इलाकों में नशे का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। हाल ही में ठाकुरगंज क्षेत्र में युवाओं में नशे की लत और नशीले पदार्थों की उपलब्धता को लेकर स्थानीय प्रशासन और समाजसेवियों ने चिंता जताई है। स्कूल-कॉलेजों के छात्र, बेरोजगार युवा और मजदूर वर्ग इस जाल में फंसते जा रहे हैं, जिससे सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने पर असर पड़ रहा है।
इस गंभीर स्थिति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित G-20 शिखर सम्मेलन में वैश्विक स्तर पर ड्रग और आतंक नेटवर्क को तोड़ने की अपील की। उन्होंने कहा: “दुनिया ड्रग और आतंक नेटवर्क को तोड़े, पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को बचाएं।“
प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नशे का कारोबार और आतंकवाद के बीच गहरा संबंध है, जो युवाओं को बर्बाद करता है, तस्करी को बढ़ावा देता है और देशों की आर्थिक व राजनीतिक स्थिरता को कमजोर करता है।
ठाकुरगंज जैसे सीमावर्ती क्षेत्र इस खतरे के सबसे बड़े शिकार बनते हैं, जहां नशे के पदार्थों की तस्करी आसानी से होती है। स्थानीय पुलिस ने हाल ही में कई छापेमारी कर नशीले पदार्थ बरामद किए हैं, लेकिन समस्या की जड़ें गहरी हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा G-20 मंच पर उठाया गया यह मुद्दा ठाकुरगंज जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद प्रासंगिक है। अब ज़रूरत है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाएं — ताकि युवाओं को नशे के अंधेरे से बाहर लाया जा सके और समाज को सुरक्षित रखा जा सके।
🟠 सम्बंधित खबर: G-20 सम्मेलन में पीएम मोदी ने ड्रग और आतंक नेटवर्क के खिलाफ वैश्विक पहल की बात कही। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को संरक्षित करने और अफ्रीकी देशों के साथ युवाओं के कौशल विकास को जोड़ने के तीन प्रस्ताव भी रखे।
